गोरखपुर के सोनौली रोड के किनारे बसे मोहरीपुर में एक सप्ताह से बाढ़ का 'कर्फ्यू' क्या लगा, बच्चे दूध के लिए तरस गए। जिन घरों में कोई बीमार है, उसके लिए दवा का इंतजाम भी कठिन है। अब महानगर में शामिल हो चुके इस इलाके में जरूरी सामान की किल्लत के कारण मुसीबत बढ़ती जा रही है। जिले की सभी नदियां उफान पर हैं। बाढ़ का पानी नदी के किनारे बसे इलाकों में फैल चुका है। बारिश के चलते पहले ही निचले इलाकों में पानी भरा था। बाढ़ ने हालत को बदतर कर दिया। सोनौली रोड पर स्थित मोहरीपुर समेत आसपास के शेखपुरवा, हमीरपुर, नवापार, रामपुर आदि गांव पिछले साल गोरखपुर महानगर में शामिल कर लिए गए थे। इन सभी में बाढ़ का पानी भरा हुआ है। सड़क के किनारे तीन से चार फुट तक, जबकि अंदर के हिस्सों में पांच से सात फुट तक पानी है। मोहरीपुर (जंगल बहादुर अली) में शिवप्रताप सिंह का परिवार एक सप्ताह से घर में फंसा है। इस परिवार के एक सदस्य को बुखार है, जबकि छोटे बच्चे के लिए दूध का संकट है।
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गोरखपुर में बाढ़।
- फोटो : अमर उजाला।
दो दिन पहले एक पड़ोसी ने किसी तरह से दो पैकेट दूध पहुंचाया। उसी में पानी मिलाकर काम चल रहा है। पेट्रोल पंप के पीछे भी एक परिवार फंसा हुआ है। इनकी मुश्किल यह है कि एक तरफ पेट्रोल पंप है, जिधर से निकल नहीं सकते और सामने सात से आठ फुट तक पानी भरा है। इसी गली में महेश गुप्ता की मकान भी है। अभी एक मंजिल बने इस मकान में ताला लगा है और इनकी कार सामने पानी में आधी डूबी हुई है। एक सप्ताह से पानी भरा होने के चलते कार के बगल में जलकुंभी व शैवाल दिखने लगा है।
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गोरखपुर में बाढ़।
- फोटो : अमर उजाला।
जंगल बेनी माधव निवासी रमेश का मकान गोरखपुर-सोनौली मुख्य मार्ग के किनारे है, लेकिन इनके घर में भी करीब दो फुट तक पानी है। रमेश ने बताया कि सारा सामान कमरों में तख्त पर रखकर परिवार समेत सड़क के किनारे बने टिनशेड में आ गए हैं। किसी तरह से एक छोटे कमरे में ही भोजन और विश्राम हो रहा है।
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गोरखपुर में बाढ़।
- फोटो : अमर उजाला।
लाखों का माल भी फंसा है
मोहरीपुर इलाके में गोरखनाथ क्षेत्र के कई दुकानदारों का गोदाम है। शहर से थोड़ा बाहर स्थित इस इलाके में कम रेट में अच्छा गोदाम पाए व्यापारियों ने माल सुरक्षित रखा था। लेकिन बाढ़ ने सब कुछ बर्बाद कर दिया। गणेश नगर कॉलोनी निवासी दिलीप ने बताया कि गोदाम में करीब तीन ट्रक माल है। दिक्कत यह है कि किसी तरह से एक गाड़ी वहां तक पहुंच रही है। धीरे-धीरे कुछ सामान ट्रक पर लोड कर निकाल रहे हैं। अभी भी आधा माल गोदाम में पड़ा है।
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आशीष कुमार गुप्ता व घनश्याम शर्मा।
- फोटो : अमर उजाला।
बाढ़ पीड़ित बोले- भोजन-पानी का संकट गहराया
मोहरीपुर के आशीष कुमार गुप्ता ने बताया कि घर में सात दिन से पानी भरा है। पीने के पानी के लिए परेशान होना पड़ रहा है। पूरा परिवार पहली मंजिल पर शरण लिए हुए है। सामान तख्त पर रखकर सुरक्षित किया गया है। अभी तक प्रशासन की तरफ से कोई हाल पूछने भी नहीं आया। पानी कम नहीं हुआ तो अब दिक्कत और ज्यादा होगी।
एक-एक मिनट बड़ी मुश्किल से बीत रहा
मोहरीपुर के घनश्याम शर्मा ने बताया कि घर में सात फुट पानी भरा हुआ है। रसोई का सारा सामान, सूखा अनाज, बिस्तर, कपड़ा आदि भीगकर खराब हो चुका है। परिवार के सदस्यों को रिश्तेदार के वहां भेजना पड़ा है। अकेले वक्त काट रहा हूं। दिन में बिजली भी नहीं मिलती। कमरों में पानी भरा होने के चलते रात में नींद नहीं आती। एक-एक मिनट भारी पड़ रहा है।
मदद नहीं, पानी से मुक्ति दिला दें
मोहरीपुर जंगल बहादुर अली के जयराम कसौधन ने बताया कि बाढ़ ने जीवन को मुश्किल में डाल दिया है। घर छोड़कर पत्नी-बच्चों के साथ बाहर निकल जाएं तो रहेंगे कहां। शासन-प्रशासन ने अभी तक बाढ़ से प्रभावित लोगों के लिए कहीं कोई इंतजाम नहीं किया है। विधायक जी आए थे, हाल पूछकर चले गए। अफसर सड़क से ही मौका-मुआयना कर लौट रहे हैं। मदद नहीं बाढ़ से मुक्ति का उपाय हो
खुद ही करना है सारा इंतजाम
मोहरीपुर जंगल बहादुर अली के हसन आलम ने बताया कि प्रशासन की तरफ से बाढ़ पीड़ितों को कोई ऐसी सहायता नहीं दी जा रही है, जिससे कि राहत मिल सके। जिन घरों में बाढ़ का पानी भरा है, वहां रह रहे लोगों को भोजन-पानी, दवाओं आदि की जरूरत है। लेकिन उन तक सामान पहुंचाना तो दूर, कोई पूछने तक नहीं जा रहा है। जो लोग आ रहे हैं, वह सड़क से ही तमाशा देखकर लौट जा रहे हैं।जंगल बेनी माधव निवासी रमेश का मकान गोरखपुर-सोनौली मुख्य मार्ग के किनारे है, लेकिन इनके घर में भी करीब दो फुट तक पानी है। रमेश ने बताया कि सारा सामान कमरों में तख्त पर रखकर परिवार समेत सड़क के किनारे बने टिनशेड में आ गए हैं। किसी तरह से एक छोटे कमरे में ही भोजन और विश्राम हो रहा है।