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दर्दनाक कहानी: सिर से उठा पिता का साया, सपनों पर लगा ग्रहण, बच्चे बोले- अब हमारे सामने केवल अंधेरा है

Mon, 24 May 2021 10:27 AM IST
vivek shukla विवेक सिंह, गोरखपुर।
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परिवार के साथ सालगिरह मनाते प्रधानाध्यापक शैलेश राय (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला।
पंचायत चुनाव में ड्यूटी के दौरान कोरोना से संक्रमित होकर जान गंवाने वाले शिक्षकों के परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। घर के इकलौते कमाने वाले मुखिया के चले जाने से दो वक्त की रोटी, सिर पर छत से लेकर बच्चों की पढ़ाई और बेटी की शादी करने तक की चिंता सता रही है। रिश्तेदार बच्चों को सांत्वना दे रहे हैं, लेकिन गुजर बसर कैसे होगा यह कोई नहीं बता रहा है। चुनावी ड्यूटी के बाद कोरोना से संक्रमित होकर जान गंवाने वाले दो शिक्षकों के बच्चों से बातचीत की गई तो दर्दनाक कहानी सामने आई। बच्चे कहते हैं कि हमारे सिर से पिता का साया उठ गया और सपनों को ग्रहण लग गया... हमारा गुजर बसर कैसे होगा? जिंदगी की गाड़ी कैसे चलेगी? इलाज पर लाखों खर्च किया गया, लेकिन जान नहीं बची... अब हमारे सामने केवल अंधेरा है।
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परिवार के साथ सालगिरह मनाते प्रधानाध्यापक शैलेश राय (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला।
कैसे चलेगी जिंदगी की गाड़ी: अभिषेक
भटहट ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय रसूलपुर झुंगिया के दिवंगत प्रधानाध्यापक अशोक कुमार सिंह के पुत्र अभिषेक सिंह ने बताया कि परिवार के 11 लोगों का भरण पोषण पिता के वेतन से होता था। मैं खुद प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहा हूं। दोनों बहनें अर्पिता और रश्मि सिंह भी उच्च शिक्षा में अध्ययनरत हैं। पिता का साया सिर से उठ जाने से न तो कोई गाइड करने वाला बचा है और न ही आर्थिक की रूप से मदद करने वाला। जिले में 15 अप्रैल को होने वाले पंचायत चुनाव के लिए 13 अप्रैल से टीमों को रवाना किया जा रहा था।
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परिवार के साथ सालगिरह मनाते प्रधानाध्यापक शैलेश राय (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला।
पूरे दिन ब्लॉक पर रहने के बाद शाम को जब लौटे तो सब ठीक था। मगर 14 को उन्हें कमजोरी के साथ स्वास्थ्य ठीक न होने का अहसास हुआ। जांच कराई तो रिपोर्ट पॉजिटिव निकली। कुछ दिन आईसोलेट करने के बाद जब 19 को शहर के एक अस्पताल में भर्ती कराया। जहां 29 को उनका निधन हो गया। तीन लाख रूपये इलाज में खर्च हुए। मगर सरकार कह रही है कि चुनावी ड्यूटी में जान नहीं गई तो चुनाव कराने का औचित्य क्या था। क्या सरकार मेरे पिता को वापस लौटा सकती है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
पिता ही नहीं, पूरे परिवार का भविष्य ही हमसे रूठा: अर्चना
बांसगांव ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय बाढ़ा बुजुर्ग पर तैनात रहे प्रधानाध्यापक शैलेष राय की बेटी अर्चना राय ने बताया कि पांच भाई बहनों की पढ़ाई के साथ साथ घर का खर्च और अन्य जरूरतों की पूर्ति पिता के वेतन से होती है। मैं खुद बीएससी की छात्रा हूं। छोटा भाई शिवम बीकॉम, छोटी बहन जुही बारहवीं तो सबसे छोटा भाई सौरभ दसवीं का छात्र है। सबसे बड़ी बहन रूचि राय का विवाह पिता ने किया था। पिता के चले जाने से दुनिया ही उजड़ गई है। मां का रो रोकर बेहाल है। परिवार रिश्तेदार होनी को यही मंजूर था की सांत्वना देते हैं। मगर आगे का जीवन कैसे कटेगा, ये समझ में नहीं आता है।
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कोरोना वायरस (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : iStock
सरकार की बेरूखी सपनों के साथ साथ मनोबल को तोड़ रही है। 15 को चुनावी ड्यूटी से लौटने के बाद अगले ही दिन पिता की तबियत खराब हो गई। कुछ दिन होम आईसोलेट कराया गया। हालत में सुधार हुआ, मगर अचानक तबियत फिर खराब होने लगी। अस्पताल में भर्ती कराया, 1.70 लाख का बिल खर्च हुआ, मगर जान नहीं बचा सके। सरकार को पीड़ित परिवार के साथ हमदर्दी होनी चाहिए। ड्यूटी के दौरान जान गंवाने के नियमों के तहत परिवार के मुआवजा और आश्रितों को नौकरी देने का कार्य प्राथमिकता के आधार पर करना चाहिए।
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