स्वास्थ्य मंत्रालय ने रेमडेसिविर, आइवरमेक्टिन और स्टेरॉयड बच्चों को देने पर रोक लगा दी है। विशेषज्ञों ने कोरोना की तीसरी लहर को बच्चों के संक्रमण के लिहाज से अधिक खतरनाक बताया है। इसे देखते हुए स्वास्थ्य मंत्रालय ने गाइडलाइन जारी की है। इसके तहत सिर्फ कोरोना से ग्रसित गंभीर बच्चों को ही अस्पताल में भर्ती करने की जरूरत होगी। बाकी का इलाज होम आइसोलेशन में रखकर किया जा सकेगा। जिन बच्चों का ऑक्सीजन लेवल 90 से नीचे पाया जाएगा सिर्फ उन्हें ही कोविड अस्पताल में भर्ती किया जाएगा। बच्चों को स्टेरॉयड, रेमडेसिविर, आइवरमैक्टिन, फैवीपिराविर जैसी दवाओं को देने से मना किया गया है।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज में बाल रोग की विभागाध्यक्ष डॉ. अनीता मेहता ने बताया कि जिन बच्चों का ऑक्सीजन लेवल 90 से कम आता है, उन्हें गंभीर निमोनिया, एक्यूट रिसपाइटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम, सैप्टिक शॉक, मल्टी आर्गन डिस्फंक्शन सिंड्रोम जैसी बीमारियां हो सकती हैं। ऐसे मरीजों को फौरन किसी कोविड अस्पताल में भर्ती कराएं। जरूरत पड़े तो आईसीयू में शिफ्ट किया जाए। इन बच्चों को जरूरत के मुताबिक स्टेरॉयड दिया जा सकता है।
विज्ञापन
2 of 5
प्रतीकात्मक तस्वीर।
- फोटो : istock
दूसरी लहर में संक्रमित बच्चों में डायरिया की शिकायत मिली है। उनका इलाज कोरोना की तर्ज पर किया जा रहा है। हालांकि उनका स्टूल टेस्ट कराने पर संक्रमण की सही जानकारी हो जाएगी। बताया कि कुछ बच्चों में मल्टी सिस्टम इन्फ्लैमटोरी सिंड्रोम भी हो सकता है। इसके लिए सतर्क रहने की जरूरत है।
विज्ञापन
3 of 5
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : iStock
सिर्फ कोरोना ग्रसित गंभीर बच्चों को भर्ती कराने की जरूरत पड़ सकती है। अन्य का इलाज होम आइसोलेशन में रहकर किया जा सकता है। क्योंकि ज्यादातर बच्चे लक्षणविहीन हो सकते हैं। इसलिए उनका इलाज सावधानी से करने की जरूरत है।
4 of 5
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : iStock
ये हैं लक्षण
ज्यादातर बच्चे लक्षण विहीन या हल्के-फुल्के लक्षण वाले होंगे।
बुखार, खांसी, सांस लेने में तकलीफ, थकावट, सूंघने व टेस्ट की क्षमता में कमी आना, नाक बहना, मांसपेशियों में तकलीफ, गले में खराश जैसे लक्षण।
36 सेंटीग्रेड तक हो सकता है बुखार
मल्टी सिस्टम इंफलामेट्री सिंड्रोम होगा। ऐसे बच्चों को बुखार 38 सेंटीग्रेड से अधिक होगा, उनके लक्षण सार्स कोविड-टू से संबंधित हो सकता हैं। इन बच्चों में खांसी, नाक बहना व गले में खराश जैसे लक्षण भी हो सकते हैं।