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तस्वीरें: नेपाल की बारिश से भारत की नदियां उफान पर, यूपी के इन जिलों में मचा रहीं तबाही

Thu, 26 Aug 2021 05:53 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
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गोरखपुर-बस्ती मंडल में बाढ़। - फोटो : अमर उजाला।
नेपाल के पहाड़ों और मैदानी इलाकों में हो रही बारिश का असर गोरखपुर- बस्ती मंडल में बह रही नदियों पर पड़ा है। लगातार हो रही बारिश के कारण नदियों का जलस्तर बढ़ने लगा है जिससे मंडल के कई गांव बाढ़ के चपेट में आ गए हैं। गोरखपुर में राप्ती, गोर्रा और घाघरा नदी खतरे के निशान से अब भी ऊपर बह रही है। जबकि रोहिन अभी खतरे के निशान से 54 सेमी नीचे है। नदियों का जलस्तर लगातार नीचे-ऊपर हो रहा है। घाघरा नदी का जलस्तर बुधवार शाम से कम हुआ है फिर भी वह खतरे के निशान से 13 सेमी ऊपर हैं। वहीं राप्ती नदी के बढ़ने का क्रम जारी है पर रफ्तार बहुत धीमी है। बुधवार शाम वह खतरे के निशान से 72 सेमी ऊपर बह रही थी। गोर्रा नदी का जलस्तर स्थिर था। फिर भी वह खतरे के निशान से 45 सेमी ऊपर बह रही थी। आगे की स्लाइड्स में देखें तस्वीरें...
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गोरखपुर में बाढ़। - फोटो : अमर उजाला।
गोरखपुर
लगातार हो रही बारिश से नदियों का जलस्तर बढ़ने के कारण जिले के 125 गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। इससे 150225 की आबादी प्रभावित हुई है। जबकि 6500 हेक्टेयर क्षेत्रफल की फसल बर्बाद हो गई है। जिला प्रशासन की ओर से बाढ़ प्रभावित गांवों में आवागमन के लिए 155 नावों को लगाया गया है। इसके साथ ही जनपद में स्थापित सभी 86 बाढ़ चौकियों को सक्रिय कर दिया गया है। प्रशासन की तरफ से बाढ़ प्रभावित गांवों में लगातार राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है। बाढ़ से जो गांव प्रभावित हैं उनमें सबसे अधिक संख्या 51 गांव गोला तहसील के हैं। जबकि सदर तहसील के 30 गांव, सहजनवां के 16, खजनी के 17, कैंपियरगंज का एक, चौरीचौरा तीन व बांसगांव के सात गांव बाढ़ से प्रभावित हैं। स्वास्थ्य विभाग की ओर से बाढ़ प्रभावित गांवों के लोगों के उपचार के लिए नौ मेडिकल टीम का गठन किया गया है।  बाढ़ प्रभावित गांवों में पशुओं के चारे की समस्या भी है। इसे देखते हुए कई स्थानों पर भूसा का भी वितरण किया गया। बाढ़ प्रभावित जगहों पर 40 क्विंटल भूसा वितरित किया गया जबकि 100 क्विंटल भूसा रखा गया है। जहां जरूरत होगी वहां पशुओं को दिया जाएगा। अब तक 3790  राहत खाद्यान पैकेट बाढ़ पीड़ितों में वितरित किया जा चुका है।
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बस्ती में बाढ़। - फोटो : अमर उजाला।
बस्ती
वहीं बस्ती जिले में सरयू नदी का जलस्तर घटने लगा है। इससे कटान का खतरा बढ़ गया है। अयोध्या केंद्रीय जल आयोग के अनुसार बुधवार को शाम पांच बजे सरयू नदी का जलस्तर खतरे के निशान 92.73 से 12 सेमी ऊपर 92.85 रिकार्ड किया गया था। मंगलवार को नदी खतरे के निशान से करीब 21 सेंटीमीटर ऊपर थी। अपस्ट्रीम में नदी के जलस्तर फिर बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं। जलस्तर में आई कमी के चलते जहां ग्रामीणों ने बाढ़ के खतरे से राहत की सांस ली है, वहीं घटते जलस्तर से कटान होने का डर सताने लगा है। विकास क्षेत्र के संदलपुर व पड़ाव क्षेत्र पर नदी का दबाव बना हुआ है।

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देवरिया में बाढ़। - फोटो : अमर उजाला।
देवरिया
देवरिया जिले में गोर्रा और राप्ती नदी के जलस्तर में बेतहाशा वृद्धि होने से वर्ष 1998 की तरह प्रलयकारी बाढ़ का संकट गहराने लगा है। दो दिन से दोनों नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। नदियों का जलस्तर लाल निशान को पार कर जाने से दोआबा के 52 और कछार के 64 गांवों के लोग दहशत में हैं। राप्ती नदी के तट पर बसा भेड़ी गांव के पास ठोकर धंसने से बंधे के अंदर कटान हो रही है। यहां नदी के तटवर्ती इलाके में बसे गांव वालों को तहसील प्रशासन ने मकानों को खाली करने का निर्देश दिया है। दोनों नदियां खतरे के निशान 70.50 मीटर से करीब 50 सेमी ऊपर चली गई हैं। गोर्रा नदी सिलहटा के पास तेजी से कटान कर रही है। यहां पायलट प्रोजक्ट पूरी तरह चौपट हो गया है।
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संतकबीरनगर में बाढ़। - फोटो : अमर उजाला।
संतकबीरनगर
संतकबीरनगर जिले में लगातार हुई बारिश के चलते क्षेत्र में स्थित राप्ती नदी का जलस्तर फिर बढ़ गया है। नदी खतरे के निशान से मात्र 10 सेंटीमीटर नीचे है। करमैनी-बेलौली तटबंध पर राप्ती नदी का जलस्तर लगातार दबाव बनाए हुए है। वर्तमान में राप्ती का जलस्तर खतरे के निशान 79.50 मीटर से 10 सेंटीमीटर नीचे बना हुआ है। 19.200 किलोमीटर लंबे करमैनी बेलौली तटबंध पर राप्ती नदी का बढ़ता जलस्तर दबाव बना रहा है। मंगलवार को नदी का जलस्तर जहां 79.45 मीटर से घटकर शाम चार बजे 79.30 मीटर आ गया था। बुधवार सुबह आठ बजे नदी के जलस्तर में पांच सेंटीमीटर का इजाफा देखा गया और जलस्तर 79.35 मीटर पहुंच गया। जबकि शाम चार बजे ड्रेनेज खंड के अधिकारियों ने जब जलस्तर मापा तो नदी का जलस्तर 79.40 मीटर पर पहुंच गया, जो खतरे के निशान से मात्र 10 सेंटीमीटर नीचे है। विभागीय अधिकारियों का दावा है कि चौतरफा बारिश के कारण नदी के जलस्तर में तीसरी बार उछाल आया है, लेकिन बाढ़ की आशंका निराधार है। तटबंध पूरी तरह से सुरक्षित है। फिलहाल बढ़ता जलस्तर विभाग व क्षेत्र के लोगों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। सहायक अभियंता राम उजागिर लाल व अवर अभियंता वीरेंद्र यादव ने बताया कि नदी के बढ़ते जलस्तर के बाद भी तटबंध पूरी तरह से सुरक्षित है। बाढ़ की आशंका कही से भी नही है। लोगों व तटबंध की सुरक्षा को लेकर विभाग व प्रशासन पूरी तरह से सर्तक है।
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सिद्धार्थनगर में बाढ़। - फोटो : अमर उजाला।
सिद्धार्थनगर
सिद्धार्थनगर जिले में बाढ़ का असर कम नहीं हो रहा है। राप्ती नदी जहां पिछले 24 घंटे में स्थिर बनी हुई है, वहीं बूढ़ी राप्ती खतरे के निशान से एक मीटर ऊपर बह रही है। इसके जलस्तर में बढ़ोतरी से कछारवासियों के होश उड़ गए हैं। नेपाल से सीधे संपर्क में रहने वाली वानगंगा नदी के घटाव से राहत भरी खबर है। जबकि कूड़ा और घोघी नदी के जलस्तर में वृद्धि जारी है। ड्रेनेज खंड के रिपोर्ट के मुताबिक, बुधवार को वानगंगा नदी खतरे के निशान से दो मीटर नीचे बह रही थी। शहर से सटे जमुआर नाला का जल स्तर भी खतरे के निशान से 2.50 मीटर नीचे थी। जनप्रतिनिधि व जिला प्रशासन के अधिकारियों ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर राहत कार्य कराने का निर्देश दिया।
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