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Grahan 2020: जानिए वैज्ञानिक नजरिए से कैसे लगता है सूर्य और चंद्र ग्रहण

Sun, 21 Jun 2020 08:26 AM IST
vivek shukla विवेक सिंह, गोरखपुर।
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सूर्य ग्रहण
सूर्य और चंद्र ग्रहण एक खगोलीय घटना है। वैज्ञानिक और ज्योतिष नजरिए से इसका विशेष महत्व है। वैज्ञानिक रूप से ग्रहण एक अनोखी खगोलीय घटना है जबकि धार्मिक और ज्योतिष नजरिए से ग्रहण  की घटना व्यक्ति के जीवन पर विशेष प्रभाव डालती है। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार ग्रहण को अशुभ माना गया है। 21 जून को एक बार फिर सूर्य तो 5 जुलाई को चंद्र ग्रहण लगने वाला है। आइए जानते हैं ग्रहण को वैज्ञानिक नजरिया...
 
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सूर्य ग्रहण - फोटो : ANI
वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला के खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि विज्ञान के अनुसार पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा करती है जबकि चंद्रमा पृथ्वी के चारों ओर घूमता है। पृथ्वी और चंद्रमा घूमते-घूमते एक समय पर ऐसे स्थान पर आ जाते हैं जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा तीनों एक सीध में रहते हैं।
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सूर्य ग्रहण - फोटो : रॉयटर्स
ऐसे में पृथ्वी धूमते-धूमते सूर्य व चंद्रमा के बीच में आ जाती है। चंद्रमा इस स्थिति में पृथ्वी की ओट में पूरी तरह छिप जाता है और उस पर सूर्य की रोशनी नहीं पड़ पाती है इसे चंद्र ग्रहण कहते है। वहीं जब चंद्रमा, सूर्य और पृथ्वी के बीच में आ जाती है और वह सूर्य को ढक लेता है तो इसे सूर्य ग्रहण कहते है।

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सूर्य ग्रहण - फोटो : रॉयटर्स
आंखों से न देंखे सूर्यग्रहण
खगोलविद ने बताया कि आंशिक और वलयाकार सूर्य ग्रहण आंखों के लिए पूर्ण सूर्य ग्रहण के ज्यादा खतरनाक होता है। इसे देखने के लिए सोलर चश्मा, टेलीस्कोप, पिन होल कैमरा, सूर्यग्रहण प्रोजेक्टेर, सोलर दूरबीन की मदद लें। नंगी आंखों से सूर्य ग्रहण को देखने का प्रयास न करें।
 
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सूर्य ग्रहण - फोटो : अमर उजाला
सूर्य ग्रहण का समय
भारत में सूर्य ग्रहण का समय अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग होगा। दिल्ली में सूर्य ग्रहण की शुरुआत सुबह 10 बजकर 20 मिनट के आस पास आरंभ होगी और दोपहर 1 बजकर 49 मिनट समाप्त हो जाएगा। सूर्य ग्रहण दोपहर 12 बजकर 2 मिनट के करीब चरम पर होगा। भारत में यह सूर्य ग्रहण दिखाई देने के कारण इसका सूतक मान्य रहेगा। सूर्य ग्रहण में सूतक काल 12 घंटे पहले ही लग जाता है। ऐसे में ग्रहण के एक दिन पहले यानी 20 जून की रात 9 बजकर 52 मिनट से सूतक लग जाएगा और ग्रहण की सामाप्ति पर यह खत्म होगा।
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