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Janmashtami Special: मथुरा ही नहीं, यहां भी है एक वृंदावन, जहां पेड़ का छिलका निकालने पर उभरता था राम का नाम

Mon, 30 Aug 2021 02:48 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, कुशीनगर।
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Janmastami 2021 - फोटो : अमर उजाला।
मथुरा के अलावा एक वृंदावन कुशीनगर जिले के पडरौना में भी है। इसे वर्ष 1835 में बसाया गया था। तत्कालीन राजा बहादुर ईश्वरी प्रताप नारायण सिंह ने राजमहल के बगल में वृंदावन का निर्माण करवाया था। करीब 15 एकड़ क्षेत्रफल के मंदिर परिसर में ही वृंदावन की मिट्टी और कदंब के पौधे लाकर लगाए गए थे। इसके एक तरफ रासलीला होती थी, जिसे वृंदावन में बैठे महल के लोग देखते थे और चहारदीवारी से कुछ दूरी पर आम जनता देखती थी।

इस वृंदावन में कदंब का एक विशाल पेड़ भी है। कहा जाता है कि उसके छिलके हटाने पर राम राम की आकृति उभरकर आती थी। राजस्थान के काले और सफेद संगमरमर से बनी राधा बल्लभ जी की मूर्ति आज भी है। इस मंदिर में संगमरमर पर बनी बेजोड़ नक्काशी उस समय की कला को आज भी जीवंत बनाए हुए है।
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Janmastami 2021 - फोटो : अमर उजाला।
यहां की फलों और सब्जियों का लगता है भोग
मंदिर परिसर में बागवानी और सब्जियों की खेती होती है। फूल भी लगाए गए हैं, जो सिर्फ राधा बल्लभ (राधे-कृष्ण) को भोग लगाए जाते हैं। इस मंदिर को ठाकुर जी का मंदिर भी कहते हैं। उस जमाने में यहां दो कुएं खुदवाए गए थे, जिनसे पानी की सभी आवश्यकताए पूरी होती थी। उन कुओं के अवशेष आज भी हैं।
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Janmastami 2021 - फोटो : अमर उजाला।
उसी समय का है पडरौना का रामधाम पोखरा और चीनी मिल
वर्ष 1836 में ही रामधाम पोखरा का निर्माण कराया गया था। यहां पुरुषों और महिलाओं के लिए अलग-अलग स्नान घर बनवाए गए थे, जो आज भी हैं। पडरौना राजपरिवार की तरफ से ही वर्ष 1933 से 1935 के बीच पडरौना, खड्डा और कठकुइयां चीनी मिलों की स्थापना की गई थी। पडरौना चीनी मिल और इससे संबद्ध फर्मों की स्थापना ठाकुर जी के नाम पर श्रीकृष्ण शुगर मिल के नाम से की गई थी।

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Kushinagar news - फोटो : अमर उजाला।
पडरौना राज परिवार के कुंवर अनिल प्रताप नारायण सिंह बताते हैं कि मंडी और वृंदावन की स्थापना राजपरिवार ने कराई थी। यहां वृंदावन बसाने के लिए मथुरा वृंदावन में जमीन खरीदकर वहां से मिट्टी और कदंब के पौधे लाए गए थे। इस क्षेत्र को भगवान श्री कृष्ण की लीला के लिए बनाया गया था। यहां रोज रात में रासलीला होती थी।
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Janmastami 2021 - फोटो : अमर उजाला।
यहां अलग से भगवान विष्णु की मूर्ति और सिंहासन भी बनवाया गया था। मूर्ति चोरी हो गई, लेकिन सिंहासन अभी भी है। कुछ वर्ष पूर्व कदंब के विशाल पेड़ को छंटवा देने के बाद छिलके के नीचे राम-राम की आकृति दिखनी बंद हो गई। यहां की विशेषताओं की जानकारी मंदिर के पुजारी राधा कृष्ण पांडेय के वंशज राजीव कुमार पांडेय और महेश सैनी ने भी दी।
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