पटाखा फैक्टरी में धमाका। (फाइल फोटो)
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मंजर देखकर लोगों का कलेजा दहल गया था। थोड़ी सी चूक का खामियाजा पूरा क्षेत्र ने भुगता। विस्फोट में दो परिवारों के आठ लोगों की मौत हुई थी। धानी क्षेत्र में हुई घटना में घायल हुए डबलू बताते हैं कि 2010 की घटना बेहद भयावह थी। उसे सोच कर अब भी रूह कांप उठती है। आंखों के सामने अपनों का साथ छोड़ते देख कर कलेजा दहल जाता है। घटना का दर्द आज भी झेल रहे हैं। न तो धूप बर्दाश्त होती है, न ही ठंड। पटाखा विस्फोट की घटना की पुनरावृत्ति न हो, उसके लिए प्रशासन को बेहद सतर्क रहना होगा। कस्बे से दूर व नाबालिगों को पटाखा से दूर रखना चाहिए।