शहीद अशफाक उल्ला खां प्राणि उद्यान गोरखपुर (चिड़ियाघर) में आने वाले पर्यटकों के लिए इन दिनों सबसे बड़ी परेशानी पेयजल की है। कड़ी धूप में प्राणि उद्यान आने वाले लोगों के डिस्पोजल बोतल गेट पर ही जमा करा लिए जा रहे हैं, जबकि अंदर पानी का कोई साधन उपलब्ध नहीं है। हालांकि परिसर में प्रवेश करते ही गेट पर एक वाटर कूलर है। लेकिन टिकट लेने के बाद अंदर जाने पर पानी की सुविधा नहीं है।
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गोरखपुर चिड़ियाघर।
- फोटो : अमर उजाला।
प्राणि उद्यान का परिसर 121 एकड़ से अधिक क्षेत्र में फैला है। प्रतिदिन कम से कम चार से पांच हजार लोगों का यहां प्रवेश होता है। मार्च खत्म होते ही गर्मी शुरू हो गई। अंदर के हिस्से में धूप से बचने के लिए छांव की जगह नहीं है। साथ ही यहां आने वाले लोगों को अपने साथ कुछ भी लाने की अनुमति नहीं है। अभी कैंटीन, कैफेटेरिया भी नहीं खुल सके हैं। ऐसे में पानी के लिए अंदर की तरफ अतिरिक्त इंतजाम नहीं है। निदेशक राजामोहन ने बताया कि परिसर में चार जगह पेयजल के इंतजाम किए गए हैं। दो प्रवेश द्वार के पास, एक अंदर की तरफ कियॉस्क और एक अन्य जगह। पर्यटक डिस्पोजल बोतल के अलावा अपने साथ अन्य किसी भी बोतल में पानी ला सकते हैं।
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Gorakhpur Zoo
- फोटो : अमर उजाला।
स्टील व घरेलू बर्तन में लाएं पानी
निदेशक राजामोहन ने बताया कि लोगों को अपने साथ यदि पीने का पानी लाना है तो वह स्टील के बोतल या अन्य किसी घरेलू बर्तन में ला सकते हैं। स्टाफ कर्मियों को भी इस बारे में पर्यटकों को बताना होगा। इसकी व्यवस्था बनाई जाएगी।
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शुभम यादव।
- फोटो : अमर उजाला।
कैंपियरगंज के शुभम यादव ने बताया कि रविवार को कड़ी धूप में चिड़ियाघर घूमने गया था। अंदर पीने के पानी के लिए काफी परेशानी हुई। वाटर कूलर एक ही जगह था लेकिन इसके आसपास सैनिटाइजर का कोई इंतजाम नहीं था। ऐसे में डर ही लग रहा था कि बिना हाथ सैनिटाइज किए पानी पीने के लिए वॉल कैसे दबाएं? लेकिन प्यास लगी थी तो फिर पीना पड़ा।
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शिवम कुमार।
- फोटो : अमर उजाला।
धानी के शिवम कुमार ने बताया कि गर्मी में बिना पानी के घूमने में काफी परेशानी उठानी पड़ी। ऐसे में यदि दोबारा घूमने के लिए कोई कहे तो नहीं आऊंगा। कड़ी धूप से न तो बचने का ठिकाना है और न ही पेयजल के इंतजाम है। प्यास लगने पर गला सूखने की वजह से कोई हादसा हुआ तो इसकी जिम्मेदारी प्राणि उद्यान लेगा क्या?
कंप्यूटराइज्ड नहीं मैन्यूअली कट रहे टिकट
प्राणि उद्यान के सभी टिकटों को कंप्यूटरीकृत व्यवस्था के तहत काटना था। इसके लिए बाकायदा टेंडरिंग भी की गई थी। लेकिन इसे अभी तक शुरू नहीं किया जा सका है। लिहाजा मैल्यूअली ही टिकट काटे जा रहे हैं। चिड़ियाघर सूत्रों की मानें तो टिकटों के मैन्यूअली होने से बिक्री में गड़बड़ी की जा रही है। क्योंकि इसका रिकार्ड सुरक्षित नहीं हो पाता। अंदर की तरफ गोल्फ कार्ट के टिकट भी ऐसे ही काटे जा रहे हैं। निदेशक राजामोहन ने बताया कि कंप्यूटर वाले टिकट अभी नहीं शुरू हो पाए हैं। इसके लिए फर्म को चिह्नित किया गया है। उसके सभी स्टाफ को कोरोना हो गया है। क्रम संख्या के हिसाब से सुबह रशीद दी जाती है और इसी हिसाब से उनसे शाम को मिलान करावाया जाता है।