गोरखपुर शहर के विभिन्न इलाकों में जलभराव शुक्रवार को तीसरे दिन कुछ कम हुआ, लेकिन लोगों की दुश्वारियां अब भी बरकरार हैं। मंगलवार रात से बुधवार सुबह तक हुई बारिश के बाद शहर के विभिन्न इलाकों में जलभराव हो गया था। शुक्रवार को तीसरे दिन कुछ जलनिकासी हुई पर अभी ज्यादातर स्थानों पर समस्या बनी हुई है। सदर सांसद रवि किशन शुक्ला के आवास के पास जलनिकासी के लिए सड़क खुदवाकर नाली बनानी पड़ी। इधर, बीआरडी मेडिकल कॉलेज रोड पर लोक निर्माण विभाग ने ह्यूमपाइप डलवाकर जलनिकासी के इंतजाम किए।
बृहस्पतिवार के बाद शुक्रवार को भी मौसम पूरी तरह से साफ रहा। इसके बावजूद मेडिकल कॉलेज रोड के अलावा सिंघड़िया के पास के कई इलाकों में जलभराव बना रहा। सिंघड़िया के पास प्रकृति नगर, गोरक्षनगर समेत अन्य इलाकों में काफी ज्यादा पानी भरा है। यहां नगर निगम और जल निगम की ओर से कुल चार पंप जलनिकासी के लिए लगाए गए हैं। बीआरडी मेडिकल कॉलेज रोड के विष्णुपुरम, बशारतपुर पश्चिमी, भोलाजीपुरम आदि इलाकों में जलभराव है। इसकी वजह से लोगों को परेशानी हो रही है। भेड़ियागढ़ वार्ड के पार्षद अजय यादव ने बताया कि पहले जहां लोगों के घरों में पानी भरा हुआ था, अब कम होकर गेट तक रह गया है।
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गोरखपुर में जलभराव।
- फोटो : अमर उजाला।
नगर आयुक्त ने लिया जायजा, खुदवाए नाले
नगर आयुक्त अविनाश सिंह ने नगर निगम की टीम संग जलभराव वाले क्षेत्रों का निरीक्षण किया। रामजानकी नगर एवं राप्तीनगर वार्डों के निरीक्षण के दौरान कई निर्देश भी दिए। पंप लगाकर एवं सड़क खुदवाकर पानी निकासी की व्यवस्था बनाई गई। गोरक्षनगर में सदर सांसद के आवास के पास जल निकासी के लिए रास्ते को खोदवाकर पानी निकालने की व्यवस्था बनाई गई।
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गोरखपुर में जलभराव।
- फोटो : अमर उजाला।
देवरिया रोड पर कम हुआ पानी
सिंघड़िया एवं एक कंपनी के शोरूम के बीच देवरिया रोड पर शुक्रवार को जलभराव काफी कम हो गया। हालांकि, प्रकृति नगर कॉलोनी, गोरक्षनगर, वसुंधरानगर, मालवीय नगर आदि मोहल्लों में पानी भरा हुआ है। नगर आयुक्त ने बताया कि जलभराव को देखते हुए सभी इलाकों में पंप लगाए गए हैं।
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गोरखपुर में जलभराव।
- फोटो : अमर उजाला।
उपसभापति ने भी किया विभिन्न इलाकों का निरीक्षण
उपसभापति ऋषि मोहन वर्मा के साथ मनोनीत पार्षद वीर सिंह सोनकर, रणंजय सिंह जुगनू, धर्मदेव चौहान एवं उप नगर आयुक्त संजय शुक्ला, मुख्य अभियंता सुरेश चंद, प्रवर्तन दल के प्रभारी कर्नल सीपी सिंह ने महादेव झारखंडी, सिंघड़िया, नंदानगर, गणेशपुरम, स्पोर्ट्स कॉलेज चरगावां, रामजानकी नगर आदि मोहल्लों के जलनिकासी के लिए लगे पंपिंग सेट मशीनों का निरीक्षण किया तथा व्यवस्था देखी। उपसभापति ने बताया कि कई स्थानों पर जल निकासी के मामले को लेकर अगल-बगल के मोहल्ले के नागरिक आपस में ही भिड़ जा रहे हैं। ऐसे में नागरिकों को समझा-बुझाकर जलनिकासी की व्यवस्था बनाई गई।
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गोरखपुर में जलभराव।
- फोटो : अमर उजाला।
नाले-पोखरे में बने मकान, नगर निगम के लिए परेशानी का सबब
नाले-पोखरे और प्राकृतिक जलभराव वाले क्षेत्रों में बने मकान नगर निगम के लिए परेशानी का सबब बन गए हैं। नगर आयुक्त ने ऐसे मकानों के खिलाफ जिला प्रशासन को पत्र भेजने का निर्णय लिया है। वजह यह है कि जो जमीन नाले-पोखरे या प्राकृतिक जलभराव वाली श्रेणी के हैं वहां अनधिकृत रूप से मकान कैसे बन गए? दरअसल गोरखपुर शहर तकरीबन चारों ओर पानी का प्राकृतिक बहाव है। दशकों पहले इन सभी इलाकों में ही बारिश का पानी भरता था। गोड़धोइया नाला, झझवा गड्ढा, डोमिनगढ़, मोतीपोखरा, चक्सा हुसैन, रसूलपुर भट्टा, इलाहीबाग, सुमेर सागर, सिंघड़िया इलाका प्राकृतिक जलभराव का क्षेत्र था, लेकिन इन सभी इलाकों में आज मकान बन चुके हैं। ऐसे में जब भी बारिश हो रही है कि तब इन सभी इलाकों में पानी भर जाता है।
गोड़धोइया नाला से रामगढ़ ताल के बीच कई मकान
नगर निगम के उप नगर स्वास्थ्य अधिकारी अखिलेश श्रीवास्तव ने बताया कि गोड़धोइया नाला से रामगढ़ ताल के बीच झरना टोला, जंगल तुलसी राम पूर्वी, जंगल तुलसीराम पश्चिमी, जंगल सालिक ग्राम, शिवपुर सहबाजगंज, सेमरा आदि में अब मकान ही मकान बन गए हैं। वहीं मोती पोखरा, बशारतपुर, चक्सा हुसैन इलाके में अहमदनगर, साकेतपुर, रसूलपुर भट्ठे में ग्रीन सिटी मोहल्ला, राजेंद्र नगर पश्चिमी में द्वारिकापुर, बैकुंठधाम, डोमिनगढ़ इलाके में मोहनलालपुर मस्जिद के बीच का इलाके में, इलाहीबाग रेगुलेटर के इलाके में, सुमेर सागर ताल, सिंघड़िया आदि इलाके प्राकृतिक जलभराव के क्षेत्र थे। इन सब में बारिश का पानी इकट्ठा होता था, लेकिन इन दिनों इन इलाकों में काफी संख्या में मकान बन गए हैं।
नगर आयुक्त अविनाश सिंह ने बताया कि शहर के कई इलाकों के नाले-पोखरे में मकान बना लिए गए हैं। अनधिकृत रूप से इन मकानों को मनाया गया है। नाले-पोखरे की जमीन पर आखिर कैसे ये मकान बना लिए गए हैं? ऐसे बने मकानों के मामलों की जांच के लिए जिला प्रशासन को पत्र भेजा जा रहा है।