गोरखपुर में देखरेख के अभाव में फैली जलकुंभी से रामगढ़ताल की खूबसूरती पर दाग लग रहा है। ये दाग देखने में तो गंदे हैं ही संदेश भी खराब दे रहे। बोटिंग करने पहुंच रहे सैकड़ों लोग ताल में फैली जलकुंभी देखकर निराश होकर लौट जा रहे हैं।
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रामगढ़ताल।
- फोटो : अमर उजाला।
बता दें कि स्थायी समाधान नहीं होने से रामगढ़ताल के आधे से अधिक क्षेत्रफल में जलकुंभी फैल जा रही है। इससे पर्यटकों के बीच व्यवस्था को लेकर खराब संदेश पहुंच रहा है। बुधवार को भी जेट्टी के चारों तरफ जलकुंभी फैलने से बोटिंग प्रभावित हुई जिससे सैकड़ों की संख्या में पर्यटकों को निराश लौटना पड़ा।
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रामगढ़ताल।
- फोटो : अमर उजाला।
जीडीए उपाध्यक्ष आशीष कुमार के मुताबिक जलकुंभी की सफाई के लिए विशेषज्ञ फर्म को काम सौंपा जाएगा। इसके लिए आज से टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। समय न लगे, इसलिए अल्पकालिक टेंडर निकाला जाएगा और जल्द ही व्यवस्थित तरीके से पूरे ताल से जलकुंभी की सफाई शुरू होगी।
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रामगढ़ताल।
- फोटो : अमर उजाला।
दरअसल रामगढ़ताल के देखरेख की जिम्मेदारी हाल ही में जल निगम से शिफ्ट होकर जीडीए को मिली है। विशेषज्ञ फर्म के चयन तक ताल की सफाई के लिए जीडीए ने खुद प्रयास शुरू किया है। जीडीए के मुख्य अभियंता पीपी सिंह के नेतृत्व में टीम ने मजदूर लगाकर नौकायन के पास से ताल की सफाई शुरू कराई गई है।
गौरतलब है कि नया सवेरा और जेट्टी पर सबसे अधिक भीड़ जुटने से जीडीए प्राथमिकता के आधार पर सर्किट हाउस से लेकर जेट्टी तक जलकुंभी की सफाई कराता है। मगर पूर्वी एवं उत्तर छोर पर सफाई नहीं होने से जब भी उधर से हवा चलती है तो पूरे ताल में जलकुंभी फैल जाती है। इससे प्राय: बोटिंग प्रभावित हो जाती है।