गोरखपुर में हाथी का तांडव।
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पंजीकरण हो तो जांची जाए सेहत, तब न हों हादसे
नियमानुसार हाथी पालने वाले को वन विभाग में पंजीकरण कराना जरूरी होता है, ताकी विभाग की ओर से पशु डॉक्टर उसकी समय-समय पर जांच कर सकें। लेकिन, न तो वन विभाग की ओर से हाथी पालकों से संपर्क करने की कोशिश की जाती है। न खुद हाथी पालने के शौकीन लोग वन विभाग से संपर्क करते हैं। हादसा होने के बाद नाम उजागर होने पर मामले को रफा-दफा कर दिया जाता है।
नोटिस जारी कर भूल गए
जनप्रतिनिधि के हाथी ने जब महावत को जान से मारा था तो तत्कालीन डीएफओ अविनाश कुमार ने नौ लोगों को नोटिस भेजा था। बाद में इसमें क्या हुआ किसी को पता नहीं चला। इस तरह नोटिस भेजकर वन विभाग के अधिकारी खानापूर्ति कर लेते हैं।