गोरखपुर जिले में अगस्त के अंतिम सप्ताह में डरा रही नदियां अब शांत होने लगी हैं। मंगलवार शाम तक जिले की चारों प्रमुख नदियों के जलस्तर में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई। रोहिन नदी खतरे के निशान से तीन मीटर 15 सेमी नीचे आ गई है। सरयू (घाघरा) 27 सेंटीमीटर नीचे बह रही है। राप्ती व गोर्रा नदियों के भी जलस्तर में कमी आई है। हालांकि अभी ये दोनों नदियां खतरे के निशान से 40 सेंटीमीटर ऊपर बह रही हैं। राप्ती का पानी कम होने के चलते राजघाट पुल की सीढ़ियां नजर आने लगी हैं। नेपाल के साथ-साथ पूर्वांचल के सभी जिलों में पिछले महीने हुई मूसलाधार बारिश के चलते प्रमुख नदियों के साथ-साथ बरसाती नाले और ताल-पोखरे भी उफना गए थे। राप्ती, सरयू, गोर्रा और रोहिन नदी का पानी बांध की ऊंचाई तक पहुंच गया था। नालों के पानी से उफनाई आमी नदी भी गोरखपुर-वाराणसी हाईवे के ऊपर से बहने लगी थी। सितंबर के प्रथम सप्ताह में नदियों का पानी घटना शुरू हुआ तो राहत नजर आई।
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गोरखपुर में घट रहा नदियों का जलस्तर।
- फोटो : अमर उजाला।
इधर, पांच दिन पहले फिर से सरयू का जलस्तर बढ़ने लगा था। इसके अलावा राप्ती व गोर्रा का जलस्तर भी धीरे-धीरे कम हो रहा था। अब सभी नदियां तेजी से नीचे आने लगी हैं। मंगलवार शाम को बाढ़ खंड के कंट्रोल रूम से मिली जानकारी के अनुसार सरयू नदी अयोध्या में 92.460 मीटर पर बह रही थी, जो खतरे के निशान से 27 सेंटीमीटर नीचे है। मंगलवार शाम चार बजे रोहिन का जलस्तर 79.290 मीटर पर था। यह खतरे के निशान से तीन मीटर 15 सेंटीमीटर नीचे है। राप्ती के जलस्तर में भी गिरावट आई है। हालांकि यह नदी अभी खतरे के निशान से 40 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है, लेकिन यह भी बीते 24 घंटे में 28 सेंटीमीटर नीचे आ गई है। गोर्रा नदी भी 70.900 मीटर पर बह रही थी। यह भी खतरे के निशान से 40 सेंटीमीटर ऊपर है। बीते 24 घंटे में जलस्तर में लगभग 20 सेंटीमीटर की कमी आई है।
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गोरखपुर में घट रहा नदियों का जलस्तर।
- फोटो : अमर उजाला।
शरणालय से घर लौटने लगे बाढ़ पीड़ित
राप्ती का पानी उतरकर अब राजघाट की सीढ़ियों तक आ गया है। इसका असर यह है कि बगल के हनुमान चक गांव के अधिकांश मकान बाढ़ के पानी से बाहर निकल गए हैं। बाढ़ में घर डूबा होने के चलते जिन लोगों ने लालडिग्गी क्षेत्र के बाल विहार स्कूल में शरण ले रखी थी वे अब अपने घर लौटने लगे हैं। मंगलवार को शरणालय में केवल 15-20 लोग बचे रह गए थे, जबकि पिछले सप्ताह यह संख्या 200 से अधिक थी।
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गोरखपुर में घट रहा नदियों का जलस्तर।
- फोटो : अमर उजाला।
राप्ती का जलस्तर इस बार खतरे के निशान से 2.32 मीटर ऊपर तक पहुंच गया था। इसके चलते नदी से सटे शहर के कई इलाके भी बाढ़ की चपेट में आ गए थे। बहरामपुर, हनुमानचक, डोमिनगढ़, कोलिया, चकरा पूर्वी, समेत दर्जन भर से अधिक गांव मैरूंड हो गए थे। एक पखवारे तक बाढ़ में डूबे रहे इन गांवों के लोगों के लिए हर्बर्ट बांध के किनारे लाल डिग्गी क्षेत्र के बाल विहार स्कूल में बाढ़ शरणालय बनाया गया था। जिन लोगों को कहीं शरण नहीं मिल पाई थी, वे यहां आकर रह रहे थे।
डीएम के निर्देश पर इन पीड़ितों को दोनों वक्त भोजन-पानी भी दिया जा रहा था। इसके अलावा राशन भी उपलब्ध कराया गया था। अब जबकि बाढ़ का पानी काफी कम हो चुका है, तो लोग घर लौटने लगे हैं। मंगलवार को यहां केवल 15-20 लोग ही मिले। बरामदे में सो रहे 65 वर्षीय राम बुझावन ने बताया कि जिनके घर से पानी निकल गया है वे अब परिवार समेत वापस चले गए हैं। अब यहां वही लोग बचे हैं, जिनके घरों में अब भी पानी भरा है। हालांकि जिस तरह से स्थिति सुधरी है, उम्मीद है कि दो से तीन दिन में सभी लोग अपने घरों को लौट जाएंगे। बाढ़ शरणालय में रह रहे लोगों ने बताया कि प्रशासन दोनों वक्त भोजन का पैकेट दे रहा है। मंगलवार को सुबह पूड़ी-सब्जी बंटी थी।