गोरखपुर जिले की राप्ती नदी 23 साल पहले के जल तांडव की तरफ बढ़ गई है। शहर से होकर गुजरने वाली इस नदी का जलस्तर खतरे के निशान से 2.23 मीटर ऊपर पहुंच गया है। यदि 33 सेंटीमीटर जलस्तर और बढ़ गया तो बांधों के कटने का खतरा रहेगा। साल 1998 में राप्ती नदी का जलस्तर खतरे के निशान से 2.56 मीटर ऊपर पहुंचा था तो बाढ़ ने तबाही मचाई थी। शहरी क्षेत्र के बांध भी टूट गए थे। तारामंडल व रूस्तमपुर सहित तमाम मोहल्ले जलमग्न हो गए थे। दूसरी तरफ देर रात नौसड़ सहित शहर व देहात क्षेत्र के तमाम बांधों से पानी का रिसाव होने का सिलसिला जारी रहा। इससे दहशत रही। बांधों के कटान का खतरा भी है। नेपाल की पहाड़ियों पर बारिश से गोरखपुर की नदियां उफान पर हैं। सहजनवां क्षेत्र से होकर बहने वाली आमी नदी के बाढ़ का पानी कौड़ीराम से करीब तीन किलोमीटर पहले बगहा बीर बाबा मंदिर और नकबैठा पुल के पास गोरखपुर-वाराणसी राष्ट्रीय राजमार्ग पर आ गया है।
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गोरखपुर में बाढ़।
- फोटो : राजेश कुमार।
इससे कौड़ीराम के पास से बड़े वाहनों का आवागमन बंद कर दिया गया है। बैरियर लगाकर पुलिस निगरानी कर रही है। अब बड़े वाहनों को डायवर्ट करके खजनी और बांसगांव के रास्ते से निकाला जा रहा है। अगर पानी बढ़ा तो राष्ट्रीय राजमार्ग को पूरी तरह से बंद करना पड़ेगा। इससे पहले गोरखपुर-सोनौली राष्ट्रीय राजमार्ग पर भी बाढ़ का पानी चढ़ा था। इस कारण एसबीएम स्कूल के सामने की एक लेन की सड़क बंद की गई है। नदियों से जुड़े ज्यादातर बांधों से पानी का रिसाव हो रहा है। कई बांधों के कटने का खतरा बना हुआ है। इससे शहरी और ग्रामीण क्षेत्र के लोग सहमे हुए हैं। तमाम परिवारों ने बांध को ही आशियाना बना लिया है।
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गोरखपुर में बाढ़।
- फोटो : अमर उजाला।
खतरनाक स्थिति में राप्ती, बांधों से पानी का रिसाव
राप्ती नदी का जलस्तर खतरनाक स्थिति की तरफ बढ़ चला है। केंद्रीय जल आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक बुधवार शाम चार बजे तक नदी का जलस्तर 77.21 मीटर रिकार्ड किया गया था, जो खतरे के निशान से 2.23 मीटर ज्यादा है। खतरनाक स्तर तक जलस्तर बढ़ने से राप्ती नदी से जुड़े बांधों पर जबरदस्त दबाव है। बेला मलांव बांध से लगातार पानी का रिसाव हो रहा है, जिससे कटान का खतरा बढ़ गया है। लिहाजा, मलांव, बेला और देवकली गांव के लोगों को सतर्क रहने को कहा गया है। सोहगउरा, बरहीं, और चनेऊर बांध से भी पानी का रिसाव हो रहा है, जिससे कटान का खतरा बरकरार है।
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- फोटो : अमर उजाला।
जिले के 243 गांवों में भरा बाढ़ का पानी, 2.09 लाख की आबादी प्रभावित
नदियों के उफनाने से 62 और गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। अब गोरखपुर में बाढ़ग्रस्त गांवों की संख्या 243 हो गई है। मंगलवार तक 181 गांव बाढ़ की चपेट में थे। जिला प्रशासन की तरफ से जारी आंकड़ों के मुताबिक बाढ़ से 2.09 लाख आबादी प्रभावित है। 31,690 हेक्टेयर फसल बर्बाद हो गई हैं। सबसे ज्यादा प्रभाव गोला और सदर तहसील क्षेत्र में है। इन तहसीलों के क्रमश: 57 और 55 गांव बाढ़ की चपेट में हैं। सहजनवां के 36, कैंपियरगंज के 31, चौरीचौरा के 11, खजनी के 25 और बांसगांव के 28 गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया है।
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- फोटो : अमर उजाला।
रोहिन-सरयू नदी का जलस्तर कुछ कम
रोहिन नदी का जलस्तर नीचे आने लगा है। बावजूद वह खतरे के निशान से 2.28 मीटर ऊपर बह रही है। सरयू नदी का पानी मंगलवार से कम हुआ है। यह नदी बुधवार को स्थिर रही। हालांकि खतरे के निशान से 46 सेमी ऊपर बह रही है। जबकि गोर्रा नदी खतरे के निशान से 1.30 सेमी ऊपर बह रही है। कुआनो नदी ने खतरे के निशान को पार नहीं किया है। आमी नदी भी डरा रही है। इसकी बाढ़ की वजह से कई संपर्क मार्ग बंद हो गए हैं।
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गोरखपुर में बाढ़।
- फोटो : अमर उजाला।
हर जगह बांधों पर हो रहा रिसाव
नदियों के खतरे के निशान से काफी ऊपर पहुंचने के कारण हर जगह बांधों से पानी रिसाव हो रहा है। जगह-जगह सिंचाई विभाग की टीमें रिसाव को रोकने में लगी हैं। सिंचाई विभाग के चीफ इंजीनियर, अधीक्षण अभियंता, अधिशासी अभियंता, अवर अभियंता बांधों पर दौड़ लगा रहे हैं। प्रशासनिक अमला भी बांधों की निगरानी कर रहा है। जहां से भी रिसाव की सूचना आ रही है वहां पर युद्ध स्तर पर काम करके रिसाव रोका जा रहा है।
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- फोटो : अमर उजाला।
लहसड़ी बांध से रिसाव, सिंचाई विभाग के अफसरों को खदेड़ा
शहर से सटे लहसड़ी बांध से भी जबरदस्त पानी का रिसाव हुआ। इसकी जानकारी आसपास के लोगों ने सिंचाई विभाग के अफसरों को दी गई लेकिन अफसर समय से नहीं पहुंच सके। रिसाव बढ़ा तो सबकी बेचैनी बढ़ गई। इसी बीच सिंचाई विभाग के अफसर भी पहुंच गए। पहले नाराज लोगों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया और उन्होंने सिंचाई विभाग की टीम को खदेड़ लिया। इसकी जानकारी प्रशासनिक अफसरों को भी मिली। कुछ देर बाद जिलाधिकारी विजय किरन आनंद मौके पर पहुंचे और पानी के रिसाव को बंद कराया।
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- फोटो : अमर उजाला।
नदियों के उफनाने से नदी खतरे का निशान (मीटर में) जलस्तर (मंगलवार) जलस्तर (बुधवार- शाम चार बजे तक)
राप्ती (बर्डघाट) 74.98 76.95 77.21
रोहिन (त्रिमुहानी घाट) 82.44 84.97 84.72
सरयू (अयोध्या) 92.73 93.26 93.19
कुआनो (मुखलिसपुर) 78.65 77.52 77.53
गोर्रा (पिंडरा) 77.50 71.52 71.80
सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता दिनेश सिंह ने बताया कि राप्ती नदी के जलस्तर का लगातार बढ़ना चिंतनीय है। गोरखपुर-वाराणसी राष्ट्रीय राजमार्ग पर दोनों तरफ पानी भर गया है, लेकिन पानी सड़क को पार नहीं किया है। अभी रास्ता बंद नहीं हुआ है। गोरखपुर-सोनौली मार्ग पर चिउटहा के पास एक लेन को बंद करना पड़ा है। सड़क की दूसरी लेन से वाहन आ-जा रहे हैं। नदियों के हर बांध पर रिसाव हो रहा है, लेकिन चौकसी बढ़ा दी गई है। बांधों को बचाने के लिए विभाग दिन रात जुटा हुा है।