गोरखपुर जनपद में बहने वाली प्रमुख नदियों में से कुछ नदियों का जलस्तर काफी नीचे आ गया है पर बाढ़ प्रभावित गांवों की संख्या कम होने का नाम नहीं ले रही है। रविवार को आपदा प्रबंधन कार्यालय से मिले आंकड़े के मुताबिक 113 गांव बाढ़ से प्रभावित हैं। इन गांवों की 60692 आबादी पर इससे असर पड़ा है। इन गांवों की 5500 हेक्टेयर फसल को नुकसान पहुंचा है। प्रशासन की तरफ से बाढ़ प्रभावित गांवों में राहत सामग्री वितरित की जा रही है। आपदा प्रबंधन कार्यालय से जारी आंकड़े के मुताबिक सबसे अधिक 40 गांव गोला तहसील के प्रभावित हैं। ग्रामीण नावों से सड़क तक पहुंच रहे हैं। सदर तहसील के 26 गांव बाढ़ के पानी से घिरे हैं। यहां पर राप्ती और रोहिन का असर है। इसके अलावा सहजनवां और कैंपियरगंज के 13-13 गांवों में भी बाढ़ का पानी है। खजनी के 15 बांसगांव के चार गांव में बाढ़ का पानी पहुंचा है। अब तक बाढ़ प्रभावित गांवों में 1165 खाद्यान्न पैकेट वितरित किया जा चुका है।
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गोरखपुर में बाढ़।
- फोटो : अमर उजाला।
पशुओं को नहीं मिला चारा, डीएम ने मांगा स्पष्टीकरण
डीएम विजय किरण आनंद ने बांसगांव के बाढ़ प्रभावित गांवों के निरीक्षण में पशुओं के चारा नहीं मिलने की घटना पर संबंधित से स्पष्टीकरण मांगा है। उन्होंने तहसील-बांसगांव के बाढ़ प्रभावित ग्राम करजहीं, नवापार, आइमा, कतरारी एवं धस्की का निरीक्षण किया। इस दौरान लोगों ने पशुओं का चारा उपलब्ध नहीं कराने की शिकायत की। डीएम ने पशु चिकित्साधिकारी कौड़ीराम से स्पष्टीकरण लिए जाने के निर्देश के साथ चारे की तत्काल उपलब्धता का निर्देश दिया है।
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गोरखपुर में बाढ़।
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निरीक्षण के दौरान डीएम ने निर्देश दिया कि नदियों के जलस्तर में वृद्धि, अतिवृष्टि से प्रभावित व्यक्तियों एवं परिवारों को नियमानुसार शासन द्वारा अनुमन्य राहत खाद्यान्न किट का वितरण निर्बाध रूप से कराया जाए। बेला संपर्क मार्ग में कई जगहों पर क्षतिग्रस्त मिलने पर तत्काल मरम्मत कार्य कराये जाने के लिए लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता को निर्देशित करते हुए कार्यवाही की विस्तृत रिपोर्ट तत्काल प्रस्तुत करने को कहा। एसडीएम बांसगांव को बाढ़ प्रभावित ग्रामों में निरंतर फागिंग कराने के निर्देश दिए। इस दौरान एसडीएम बांसगांव ने बताया कि मलांव बांध से ग्राम की तरफ जाने वाली सड़क को यदि 1.5 मीटर ऊंचा कर दिया जाए तो बरसात के दिनों में आवागमन बाधित नहीं होगा। इसके बाद डीएम ने संबंधित विभाग के माध्यम से प्रस्ताव तैयार कर प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।
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गोरखपुर में बाढ़।
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बिजली-पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करने का निर्देश
डीएम ने निरीक्षण के दौरान बिजली आपूर्ति निर्बाध रूप से बनी रहने के लिए जरूरी संसाधन जैसे ट्रांसफार्मर इत्यादि का भौतिक सत्यापन भी सुनिश्चित करने के लिए कहा। कहा कि बाढ़ प्रभावित ग्रामों में शुद्ध पेयजल की आपूर्ति बनी रहनी चाहिए। जरूरत के हिसाब से तत्काल टैंकर आदि से जलापूर्ति सुनिश्चित करायी जाए। एसडीएम बांसगांव द्वारा अवगत कराया गया कि यदि नदी जलस्तर में भारी वृद्धि होती है तो विस्थापित ग्रामीणों के लिए तटबंध के पास पंचायत भवन उपलब्ध है। इसे बाढ़ शरणालय के लिए चिह्नित किया गया है। उन्होंने एसडीएम को निर्देशित किया कि बाढ़ शरणालय पर समुचित व्यवस्थायें सुनिश्चित कर ली जाएं।
बढ़ रहा है घाघरा नदी का जलस्तर
घाघरा नदी का जलस्तर लगातार घट-बढ़ रहा है। शनिवार को नदी खतरे के निशान से नीचे बह रही थी वहीं रविवार को वह खतरे के निशान से सात सेंटीमीटर ऊपर पहुंच गई। राप्ती नदी का जलस्तर नीचे की तरफ आ रहा है पर वह अब भी खतरे के निशान से 76 सेंटीमीटर ऊपर है। एक दिन में दो मीटर तक ऊपर जाने वाली रोहिन नदी खतरे के निशान से 81 सेंटीमीटर नीचे आ गई है। बाढ़ खंड दो के अधिशासी अभियंता रुपेश कुमार खरे ने बताया कि जनपद में बहने वाली एक और नदी गोर्रा का जलस्तर स्थिर है। फिर भी वह खतरे के निशान से 40 सेमी ऊपर बह रही है।