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दुर्घटना को दावत दे रहे हैं सड़कों पर घूम रहे बेसहारा पशु, तस्वीरों में देखें कैसे बढ़ी राहगीरों की परेशानी

Sun, 20 Sep 2020 09:16 AM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
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सड़कों पर घूम रहे बेसहारा पशु। - फोटो : अमर उजाला।
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर शहर में जिस ओर भी निकल जाइए, सड़कों के बीचोबीच बेसहारा पशु बैठे हुए दिखाई दे जाएंगे। सड़कों पर बैठे या इधर-उधर चलते ये पशु न सिर्फ यातायात में बाधक बन रहे हैं, बल्कि कई बार दुर्घटना के सबब भी बन रहे हैं। कई बार इनके कारण लोगों की जान पर भी बन आती है।
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सड़कों पर बैठे बेसहारा पशु - फोटो : अमर उजाला।
बता दें कि जिस नगर निगम के पास इन पर नियंत्रण की जिम्मेदारी है, वह अपनी आंखें मूंदे बैठा है। सड़कों पर निकलने वाली जनता मुसीबत झेल रही है। यह स्थिति तब है, जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी बेसहारा पशुओं के खिलाफ लगातार अभियान चलाने और सड़कों पर पशुओं को छोड़ने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आदेश दे चुके हैं।
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सड़कों पर घूम रहे बेसहारा पशु - फोटो : अमर उजाला।
इस बीच अमर उजाला की टीम ने शुक्रवार को शहरी क्षेत्र में बेसहारा पशुओं की स्थिति की पड़ताल की। हर चौक-चौराहे, गली व सड़कों पर ऐसे पशुओं का झुंड दिखा। गोलघर के चेतना तिराहे के पास तो मुख्य सड़क पर बेसहारा पशुओं का जमावड़ा लगा मिला। इससे यातायात व्यवस्था बाधित रही। चरगांवा आईटीआई के सामने, विष्णु मंदिर के पास, एसएसपी आवास के सामने, यातायात तिराहा, लाल डिग्गी पार्क, इंदिरा तिराहा, हार्वर्ड बांध, बगहा बाबा मंदिर रोड, रुस्तमपुर, तारामंडल और सहारा इस्टेट परिसर की सड़कों पर भी पशु बैठे मिले। सड़क पर ही गोबर फैला मिला। इससे वाहनों के फिसलने या फिर हादसे का खतरा बना रहा है।

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सड़कों पर घूम रहे बेसहारा पशु - फोटो : अमर उजाला।
10 कर्मचारियों के भरोसे संस्था
शहर के पशुओं की धरपकड़ और उसके बाद पकड़े गए पशुओं को कान्हा उपवन (पशुबाड़े) में देखभाल के लिए बलिया की एक स्वयंसेवी संस्था प्रकाश ग्रामीण सेवा संस्थान को जिम्मेदारी दी गई है। यह संस्था 10 कर्मचारियों के सहारे काम कर रही है। सवाल यह उठता है कि इतने बड़े शहर के बेसहारा पशुओं को 10 कर्मचारी कैसे संभालते हैं?
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सड़कों पर घूम रहे बेसहारा पशु - फोटो : अमर उजाला।
सालाना 10 लाख रुपये खर्च, नतीजा कुछ नहीं
बेसहारा पशुओं को पकड़ने पर नगर निगम हर माह करीब 85 हजार रुपये खर्च करता है। इस हिसाब से देखें तो सालाना 10 लाख रुपये खर्च हो जाते हैं। इसके बावजूद नतीजा जस का तस है। शहर की सड़कों पर बेसहारा पशुओं की भरमार है। हालांकि पिछले दो तीन महीने से इन पशुओं को पकड़ने का अभियान ठप है। इसकी असली वजह कोरोना वायरस का प्रकोप बताया जा रहा है।
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कान्हा उपवन। - फोटो : अमर उजाला।
कान्हा उपवन में पशुओं को रखने की जगह नहीं
लावारिस पशुओं के लिए बना कान्हा उपवन भर गया है। इससे चुनौती बढ़ गई है। कान्हा उपवन में 900 पशु रखे जा सकते हैं। अभी 925 पशु हैं। अब महेवा में कान्हा उपवन का निर्माण किया जा रहा है। उप नगर आयुक्त संजय शुक्ला का कहना है कि लॉकडाउन के पहले चलाए गए अभियान के दौरान तक नगर निगम ने 1125  पशुओं को पकड़ा था। इनमें से 200 पशुओं को खजनी स्थित पशुबाड़े में भेज दिया गया था। कान्हा उपवन में 925 पशु हैं।
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सड़कों पर घूम रहे बेसहारा पशु - फोटो : अमर उजाला।
शहर में डेयरी से बढ़ी मुसीबत
शहर में करीब 80 डेयरियां संचालित हैं। डेयरी संचालक दूध निकालने के बाद इन पशुओं को सड़क पर छोड़ देते हैं। ग्रामीण इलाकों से भी पशुपालक सांड़ या बछड़े को शहर की ओर लाकर छोड़ देते हैं। इस कारण पशुओं की संख्या कम होने का नाम नहीं ले रही है।

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सड़कों पर घूम रहे बेसहारा पशु - फोटो : अमर उजाला।
10 हजार रुपये जुर्माने का प्रावधान
दुधारू पशुओं को पकड़े जाने पर 10 हजार रुपये जुर्माने का प्रावधान है। साथ ही पशु क्रूरता अधिनियम में पशुपालकों के खिलाफ मुकदमा का दर्ज कराया जा सकता है। अब तक नगर निगम प्रशासन की ओर से तीन मुकदमे दर्ज कराए गए हैं। सितंबर में ही 50 हजार रुपये जुर्माना वसूला जा चुका है।
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सड़कों पर घूम रहे बेसहारा पशु - फोटो : अमर उजाला।
उप नगर आयुक्त एवं कान्हा उपवन प्रभारी संजय शुक्ला ने बताया कि पशुओं को पकड़ने का अभियान फिलहाल नहीं चल रहा रहा है। जहां से शिकायत आती है, वहां टीम भेजकर बेसहारा पशुओं को पकड़वाया जाता है। दुधारू पशु पकड़े जाते हैं तो पशुपालकों से जुर्माना वसूला जाता है। सितंबर में ही करीब 50 हजार रुपये जुर्माना वसूला गया है। पशुपालक के खिलाफ एफआईआर कराई गई है। इसके बाद भी थोड़ी समस्या बनी हुई है। कुछ दिनों बाद अभियान फिर चलाया जाएगा। अभी पशुओं को रखने की दिक्कत है। कान्हा उपवन में क्षमता के बराबर पशुओं को रखा गया है। कुछ पशु खजनी के पशुबाड़े में भेजे गए हैं। महराजगंज के मधवलिया में भी पशुबाड़े का शेड तैयार हो रहा है। वहां करीब छह हजार पशुओं को रखने की व्यवस्था है। जब वहां पशुओं को रखने का काम शुरू हो जाएगा तो समस्या काफी हद तक हल हो जाएगी।
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