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नेपाल में राजशाही शासन की बहाली की मांग को लेकर प्रदर्शन, लोगों ने कहा- 'राष्ट्रीय एकता के लिए है जरूरी'

Mon, 02 Nov 2020 07:13 PM IST
vivek shukla संवाद न्यूज एजेंसी, महराजगंज।
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nepal news - फोटो : अमर उजाला।
नेपाल में पुनः राजशाही शासन की बहाली की मांग को लेकर सोमवार की शाम रूपनदेही जिले के बुटवल में रैली का आयोजन किया गया। जिसमें वीर गोरखाली अभियान द्वारा 'देश और श्री पांच सरकार' की सुरक्षा के लिए एक मोटरसाइकिल रैली निकली।
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nepal news - फोटो : अमर उजाला।
राष्ट्रीय ध्वज और नेपाल के पूर्व राजा-रानी ज्ञानेंद्र-कोमल शाह की तस्वीर के साथ टी-शर्ट पहने हुए स्थानीय लोगों ने राजशाही शासन की मांग की। बुटवल ट्रैफिक चौक से मणिग्राम तक रैली निकली। रैली कार्यक्रम के संयोजक बसंत विक्रम पांडेय ने बताया कि लगभग दो हजार मोटरसाइकिल रैली में शामिल हुई।
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nepal news - फोटो : अमर उजाला।
गणतंत्र की स्थापना के बाद रूपनदेही जिले में राजतंत्र के पक्ष में आज का प्रदर्शन सबसे बड़ा रहा। रैली के बाद ट्रैफिक चौक पर आयोजित एक सभा को संबोधित करते हुए कार्यक्रम संयोजक बसंत विक्रम पांडेय, समन्वयक प्रवीण थापा, दिलीराज खनाल ने कहा कि राष्ट्रीय एकता और स्थिरता के लिए राजशाही बहाली आवश्यक है।

 

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nepal news - फोटो : अमर उजाला।
काठमांडू में छात्रों ने किया प्रदर्शन
वहीं नेपाल छात्र संघ और मुख्य विपक्षी दल नेपाली कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने सरकार पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए और निर्दोष छात्र नेताओं की गिरफ्तारी के विरोध में काठमांडू में प्रदर्शन किया। सोमवार की दोपहर नेपाल छात्र संघ और नेपाली कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने महासचिव बलदेव तिमालसीना के नेतृत्व में काठमांडू स्थित नेकपा कार्यालय के निकट सरकार पर भ्रष्टाचार और निर्दोष नेताओं की गिरफ्तारी के विरोध में प्रदर्शन कर नारे लगाए।

 
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nepal news - फोटो : अमर उजाला।
महासचिव बलदेव तिमालसीना ने बताया कि सरकार भ्रष्टाचार को नियंत्रित करने में विफल रही है। बलुवतार भूमि घोटाले में शामिल लोगों को मंत्रियों के रूप में नियुक्त किया और कोरोना महामारी फैलने पर नि:शुल्क उपचार बंद कर जनता के साथ धोखा किया गया। हमारे साथियों को पुलिस हिरासत में अत्यधिक यातना दी गई है। किसी को नियंत्रण में लेना और उन्हें पीटना अवैध है। ऐसे पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। सरकार की ओर से मानवाधिकारों की सार्वभौमिक मान्यता को नजरअंदाज करते हुए अपने छात्र नेताओं को हिरासत में लेकर अत्यधिक मानसिक और शारीरिक यातनाएं देना बेहद अन्यायपूर्ण है।
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