चौरी-चौरा : एक पुनरावलोकन
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इस ऐतिहासिक तथ्य का उल्लेख दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के मध्यकालीन एवं आधुनिक इतिहास विभाग के आचार्य एवं भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद नई दिल्ली भारत सरकार के सदस्य प्रो. हिमांशु चतुर्वेदी की पुस्तक में मिलता है। उनकी पुस्तक का नाम है, चौरी-चौरा : एक पुनरावलोकन, राष्ट्रीय आयाम की स्थानीय घटना। 348 पन्नों की इस पुस्तक में 120 पन्ने परिशिष्ट हैं, जिसमें घटना से संबंधित मूल दस्तावेज हैं।
चौरीचौरा घटना के शताब्दी दिवस पर चार फरवरी को इस पुस्तक के लोकार्पण की योजना है। पुस्तक के लेखक संपादक हिमांशु कहते हैं, यह पुस्तक चार काल खंडों में विभाजित है। इसमें घटना के दूसरे दिन यानी पांच फरवरी 1922 को प्रमुख समाचार पत्रों में छपी खबरों की प्रति, शहीदों के परिजनों की जुबानी, घटना से जुड़े साक्ष्यों को आधार बनाकर लिपिबद्ध किया गया है। कई ऐसे रोचक प्रसंग समाने आए हैं, जिनसे आम जनमानस अभी तक अछूता है।