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दिल दहला देने वाली कहानी: 12 साल की बच्ची बनी मां, इंस्टाग्राम पर दोस्त बनकर आया दरिंदा, तबाह कर दी जिंदगी

Wed, 31 May 2023 02:54 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
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12 साल की बच्ची बनी मां, बाएं आरोपी। - फोटो : अमर उजाला।
अभी तो उसकी खेलने खाने की ही उम्र थी। महज 11 साल की ही थी। अभी तो उसकी खेलने खाने की यह उम्र थी। गलती सिर्फ एक हो गई कि पढ़ाई के साथ ही उसने इंटरनेट का इस्तेमाल शुरू कर दिया। इंटाग्राम पर दोस्तों से बातचीत करती थी। लेकिन, फिर उसकी जिंदगी में एक ऐसा शातिर दरिंदा दोस्त बनकर आ गया, जिसने उसकी जिंदगी ही तबाह कर डाली। शातिर शेख के चंगुल में फंसी बच्ची ने 11 साल की उम्र में ही उससे शादी करने की ठान ली और फिर आरोपी के पास हैदराबाद पहुंच गई। शेख उसे एक दरगाह पर ले गया और कथित तौर पर शादी भी रचा ली।

 
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नाबालिग के साथ दुष्कर्म। - फोटो : अमर उजाला।
इतने पर ही उसकी दरिंदगी नहीं रुकी, एक कमरे में उसके साथ रहने लगा। इधर, पिता केस दर्ज कराकर थाने का चक्कर काट रहे थे। 24 दिसंबर 2021 को केस दर्ज होने के सात महीने बाद बच्ची को मुक्त कराया जा सका, तब तक वह सात महीने की गर्भवती हो गई थी। तीन महीने तक तो वह कमरे में खुद को कैद करे रही, बड़ी मुश्किल से लंबे मानसिक रोग का इलाज के बाद संभली है। इस साल उसका आठवीं में दाखिला कराया गया पर जिंदगी फिर भी पटरी पर नहीं आ पा रही ।

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दुष्कर्म मामला। - फोटो : amar ujala
बच्ची की उम्र अब 13 साल हो गई है। लेकिन, आज भी वह उस दर्द को याद कर सिहर जाती है। खुद तो सामने नहीं आती है, लेकिन परिजन बताते हैं, उससे इस विषय पर कोई बात नहीं करता है। हम लोग भी पूछते हैं तो यही बोलती है, प्लीज कुछ नहीं कहना और रोने लगती है। इस वजह से अब उसे कुछ भी याद नहीं दिलाना चाहते हैं। आसापास के लोगों को भी कुछ नहीं मालूम है। पिता कहते हैं, बच्ची पढ़ने में काफी होनहार थी। फालतू किसी से बात भी नहीं करती थी। वह कैसे शातिर शेख के चंगुल में फंसी आज तक समझ में नहीं आता है।

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Instagram - फोटो : iStock
वहीं, बच्ची ने पुलिस को दिए बयान में बताया कि उसकी शेख से दोस्ती इंटाग्राम पर हुई थी। तब उसे लगा कि वह सही कर रही है। बातचीत में बहकावे में उसने हैदराबाद बुलाया और शादी का दिखावा करके सात महीने साथ रखा। हालांकि, इस दौरान मारपीट करने जैसी बातों से उसने इन्कार किया है। विवेचक दुर्गेश शुक्ला बताते हैं कि केस की विवेचना जब उन्हें मिली तो आरोपी गिरफ्तार नहीं हुआ था। उसके पीछे लगा गया और फिर उसे लातूर से गिरफ्तार कर लाया गया है। सबूतों के साथ विवेचना पूरी कर चार्जशीट दाखिल की जाएगी, ताकि सजा हो सके।

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सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : सोशल मीडिया
कुछ मत पूछिए, बहुत बुरी बीत रही हम पर
घटनाक्रम को बताने के बाद पिता भी रुआंसे हो जाते हैं। दरिंदे की हरकतों के बच्ची पर हुए असर का पिता के चेहरे पर साफ नजर आता है। वह कहते हैं, मत पूछिए, जो हुआ, वह बीता कल है। अब उसे याद नहीं करना चाहता हूं। बहुत बुरी बीती और बीत रही है। बेटी भी किसी तरह से भूल गई है और अब वह पढ़ाई भी करने लगी है। जो झेला उसे याद कर आज भी डर लग जाता है। गलती तो मेरी भी है, जो बेटी का ध्यान नहीं दे पाया। सभी मां-बांप को कहना चाहता हूं-बहुत ध्यान रखें बच्चों का। इर्द-गिर्द मंडरा रहे दरिंदे ही नहीं, सोशल मीडिया पर सक्रिय भेड़िए भी बच्चों की जिंदगी नरक बना दे रहे हैं।

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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
मासूम बेटी का प्रसव कराने का दर्द समझिए
एक रिश्तेदार ने बताया कि क्या कह सकते हैं, ऐसे ही समझ लीजिए कि एक 11-12 साल की बेटी के प्रसव कराने का दर्द क्या हो सकता है। किस तरह से समाज से बचते हुए सब कुछ कराया गया, यह हम ही लोग जानते हैं। आप तो जानते ही हैं, यह समाज अगर जान जाए तो कभी यह नहीं सोचेगा कि कौन सही है कौन गलत है। उसकी बातों का बच्ची पर क्या असर पड़ेगा, इससे भी किसी से कोई मतलब नहीं है। यही वजह है कि बड़ी सावधानी से हर काम को किया जा रहा है।

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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
बच्चे समझ नहीं पाते कि क्या खतरे हैं
गोरखपुर विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग के प्रो. धनंजय कुमार ने बताया कि आसानी से इंटरनेट की उपलब्धता इसका सबसे बड़ा कारण है। उम्र से पहले किसी भी चीज का मिल जाना प्रारंभिक जोखिम को बढ़ा देता है। वर्तमान में यही हो रहा है। इंटरनेट सस्ते हैं, मोबाइल भी पढ़ाई के लिए आज की जरूरत बन चुकी है। यही वजह है माता-पिता को न चाहते हुए भी मोबाइल फोन देना पड़ता है। फिर इसी में शातिर लोग बाल मन पर अपनी ऐसी छवि बना लेते हैं कि वह भटक जाते हैं। इसका एक बड़ा कारण इंटरनेट पर आसानी से उपलब्ध वह सामग्री है, जिसे एक उम्र के बाद ही सोचा और समझा जा सकता है। बाल उम्र में इंटरनेट व आधुनिकता का असर हो जाता है और फिर बच्चे समझ नहीं पाते कि वह क्या कर रहे हैं और किन खतरों में फंस रहे हैं। फिर उनसे गलती हो जाती है। परिवार के लोग भी अपने दैनिक कामों में व्यस्त होने की वजह से ध्यान नहीं दे पाते हैं। ऐसे बच्चों को परिवार के सहयोग की सबसे ज्यादा जरूरत होती है।



 
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