नेपाल राष्ट्र के हिमालय पर्वत की चोटियों से निकली नारायणी नदी के तट एवं सोहगीबरवा वन्य जीव प्रभाग अंतर्गत निचलौल रेंज के मनोरम वादियों के बीच स्थित दर्जिनिया ताल तेजी से विकसित हो रहा है।
अगर आप जंगल और जंगली जानवरों को देखने के शौकीन है, तो यह जगह आपके लिए बेहद खास है।
दर्जनिया ताल मतलब मगरमच्छों का बसेरा, जहां पर्यटन के अनगिनत रंग बिखरे हैं। चहुओर फैली हरियाली और नारायणी के लहरों के मधुर स्वरों के बीच जंगलों से घिरे एक ताल में अगर आपको एक साथ एक दो नहीं बल्कि दर्जनों मगरमच्छ दिख जाए, तो आपके यात्रा का आनंद शायद दोगुना हो जाएगा।
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- फोटो : अमर उजाला।
जिला मुख्यालय के अंतिम छोर पर बसा गांव भेडिहारी का कटान टोला जहां आदमी के साथ मगरमच्छ भी रहते हैं। चारों ओर से जंगलों से घिरे इस गांव से सटे एक ताल में करीब 450 मगरमच्छ रहते हैं। जिसे सुबह शाम आसानी से देखा जा सकता है। ताल में निर्मित टीलों पर अपने बच्चों के साथ खेलते व झुंडों में मगरमच्छ लुभावने लगते हैं।
जब मगरमच्छ अपने शिकार के लिए टीलों से पानी मे छलांग लगाते हैं, तो नजारा देखते ही बनता है। इसके अलावा ताल से थोड़ी दूरी पर बहने वाली नारायणी गंडक नदी, जिसमे डॉलफिन (गंगा चीता) व घड़ियाल भी देखे जा सकते हैं। वहीं निकट में नारायणी नदी है। जिसमें वन विभाग ने घड़ियालों के संरक्षण के लिए बीते वर्ष लखनऊ कुकरैल प्रजनन केंद्र से 42 मादा व 13 नर सहित 55 घड़ियालों को लाकर छोड़ा था।
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पांच हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैला दर्जिनिया ताल
रेंजर जगरनाथ प्रसाद ने बताया कि दर्जिनिया ताल करीब पांच हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैला हुआ है। मनोरम वादियों के कारण यहां मगरमच्छों के लिए अनुकूल आबोहवा है। प्रत्येक वर्ष इनकी संख्या बढ़ती जा रही है। पिछले वर्ष हुई गणना में इनकी संख्या साढ़े तीन सौ थी।
जबकि इस वर्ष इनकी संख्या बढ़कर करीब साढ़े चार सौ के पास पहुंच गई है। बीते एक वर्ष में करीब 70 हजार पर्यटकों ने मनोरम वादियों के बीच स्थित दर्जिनिया ताल पर पहुंचकर मगरमच्छों को देखकर लुप्त उठाया है।
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दर्जिनिया में पूर्वांचल का बनेगा पहला बटरफ्लाई
पर्यटकों की संख्या को देख शासन द्वारा दर्जिनिया में 80 लाख की लागत से करीब 50 डिसमिल जमीन पर पूर्वांचल का पहला बटरफ्लाई पार्क बनेगा। जिसके किनारे तकरीबन 70 मीटर इंटरलॉकिंग सड़क होगी। जहां पर्यटक आराम से टहल कर सैकड़ो प्रजाति के रंग बिरंगी तितलियों को भी देख कर लुप्त उठा सकेंगे। वहीं पार्क में एंट्री गेट, ओक ट्री सहित अनेक प्रजाति के प्लांट लगाए जाएंगे।
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मगरमच्छ-घड़ियाल का नजारा देख लुप्त उठाते हैं पर्यटक
मगरमच्छों का प्रज्जनन केंद्र के नाम से विख्यात दर्जिनिया ताल के निकट नारायणी नदी की तट है। जिसके कारण यहां मगरमच्छ-घड़ियाल दोनों देखकर पर्यटक लुप्त उठाते हैं। नारायणी नदी के तट के किनारे वन विभाग ने एक रेस्ट हाउस भी बना रखा है। जहां पर दूर दराज के पर्यटक अपने परिवार तथा दोस्तों के साथ ठहरकर मनोरम वादियों का आनंद लेते हैं। वहीं नदी की दूसरी छोर पर स्थित सोहगीबरवा गांव की टापू भी दिखाई देती है।
दर्जिनिया पर पर्यटकों का घुमने का सही समय
दर्जनिया ताल घुमने और मगरमच्छों को आसानी से घंटों तक देखने के लिए नवंबर से मार्च का महीना सबसे बेहतर माना जाता है। ठंड के दौरान मगरमच्छ ज्यादातर समय रेस्टिंग आइलैंड पर बिताते हैं। मगरमच्छों की अठखेलियां करते हुए देखा जा सकता है।