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यह बात सुनकर रामधन सेठ ने कहा कि आपका जितना भी माल है उसे यही उतार दो, उसके पैसा दूंगा। इसके बाद अचानक एक ही दिन में हल्दी व सोंठ का रेट दोगुना हो गया। सेठ ने उसकी बिक्री से कमाए गए मुनाफे से अपने निजी जमीन में पंचमुखी शिव मंदिर व विशाल पोखरे का निर्माण कराया। आज भी रामधन सेठ की यह कहानी लोगों की जुबां पर है।
सुअरहवा में स्थित पंचमुखी शिव मंदिर व पोखरा ऐतिहासिक विरासत की पहचान बनी हुई है। वर्तमान समय में रामधन सेठ के परिजन आशुतोष जायसवाल, भवतोष, प्रवीण,अवनींद, पंकज व नीरज ने पंचमुखी शिव मंदिर पोखरा व अगल-बगल की जमीन गुरु गोरक्षनाथ मंदिर को दान करते हुए दान कर दिया।