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मनीष गुप्ता हत्याकांड: कोर्ट में हाजिर होने की फिराक में हैं हत्यारोपी पुलिसकर्मी, इनसे साधा संपर्क

Sun, 10 Oct 2021 10:22 AM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।

सार

आरोपियों को पकड़ने के लिए पुलिस जेएन सिंह या अन्य आरोपियों के हर उस करीबी तक पहुंच चुकी है, जिनसे कुछ सुराग मिल सके, लेकिन अभी पुलिस के हाथ खाली हैं।
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मनीष हत्याकांड के आरोपी। - फोटो : अमर उजाला।
कानपुर के कारोबारी मनीष गुप्ता की हत्या के आरोपी इंस्पेक्टर जेएन सिंह, चौकी इंचार्ज रहे अक्षय मिश्रा कोर्ट में हाजिर होने की फिराक में हैं। गिरफ्तारी के लिए बढ़ते दबाव के बीच इंस्पेक्टर जेएन सिंह के सहयोगियों ने गोरखपुर के कुछ बड़े अधिवक्ताओं से संपर्क साधा है। हालांकि, एक ने यह केस लड़ने से मना भी कर दिया।

आरोपियों को पकड़ने के लिए पुलिस जेएन सिंह या अन्य आरोपियों के हर उस करीबी तक पहुंच चुकी है, जिनसे कुछ सुराग मिल सके, लेकिन अभी पुलिस के हाथ खाली हैं। सूत्रों का कहना है कि जेएन सिंह भी कानून को बारीकी से जानता है। कब क्या करना ठीक होगा, उसे भली प्रकार से पता है, इस वजह से वह कोर्ट में छुट्टी के दिन हाजिर होने की फिराक में है। आगे की स्लाइड्स में पढ़ें पूरी खबर ...

 
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मनीष हत्याकांड: मनीष का दोनों हाथ, दोनों पैर पकड़ ले जाती पुलिस। - फोटो : अमर उजाला।
एसटीएफ और एसओजी में तैनात रहा है जेएन सिंह
इंस्पेक्टर जेएन सिंह और उसके आरोपी साथी पुलिस के काम करने के सभी तरीकों को बारीकी से जानते हैं। यही वजह है कि पुलिस उन तक आसानी से पहुंच नहीं पा रही है। लापता पुलिस वाले कोई छुटभैया बदमाश नहीं हैं, उन्हें खुद पुलिस विभाग के कामकाज का लंबा अनुभव है। इस मामले में मुख्य आरोपी बनाया गया जेएन सिंह खुद एसओजी व एसटीएफ में तैनात रहा है। ऐसे में वह पुलिस की रग-रग से वाकिफ है।

 
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मनीष हत्याकांड: मौके पर हत्यारोपी दरोगा जेएन सिंह सीसीटीवी में कैद हो गया। - फोटो : अमर उजाला।
वह सिपाही से प्रमोशन पाकर इंस्पेक्टर बना था। अब तक की सर्विस में सैकड़ों गिरफ्तारियां, दर्जनों एनकाउंटर कर आउट आफ टर्म प्रमोशन पाने वाले जेएन सिंह के बारे में गोरखपुर पुलिस का भी मानना है कि उसकी तलाश में लगाई गई टीमें अभी जो सोच रही और कर रही हैं, वह उससे आगे का रास्ता जानता है।

 

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मनीष हत्याकांड - फोटो : अमर उजाला।
अक्षय मिश्रा के साथ जेएन सिंह गोरखपुर से गया था बाराबंकी
सूत्रों का कहना है कि वारदात के अगले दिन 28 सितंबर को इंस्पेक्टर जेएन सिंह और दरोगा अक्षय मिश्रा थाने में जीडी लिखकर बाकायदा अपनी सर्विस रिवाल्वर और सीयूजी मोबाइल जमा करते हुए लखनऊ नंबर की काली स्कॉर्पियो से निकल गए और पुलिस उनका बाल तक बांका नहीं कर सकी। इसके बाद भी आरोपी भूमिगत नहीं हुए। सूत्रों के मुताबिक वह रामगढ़ताल थाने से निकलकर सीधा लखनऊ गए और बाराबंकी में पूरी रात गुजारी। कहा जा रहा है कि बाराबंकी स्थित अक्षय मिश्रा के घर पर ही इंस्पेक्टर और दरोगा रात में ठहरे थे। इसके बाद वह लखनऊ चिनहट भी गए। हालांकि, इस बीच पुलिस का बढ़ता दबाव देख जब वह गायब हुए तो फिर पुलिस उनकी परछाई भी नहीं छू सकी। खबर है कि दोनों ने कुछ समय बलिया में भी गुजारा।
 
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मनीष हत्याकांड की जांच करती एसआईटी। - फोटो : अमर उजाला।
120 और 201 की धारा में फंस सकती है कई और की गर्दन
मनीष गुप्ता हत्याकांड की एसआईटी की जांच अभी जारी है। इसी बीच खबर यह भी है कि इस मामले में आपराधिक साजिश की धारा (120) और साक्ष्य मिटाने की धारा (201) के तहत भी कई लोगों की गर्दन फंस सकती है। साक्ष्य मिटाने में होटल के लोग फंस सकते हैं तो उन्हें बचाने वालों पर एसआईटी 120 की धारा में कार्रवाई कर सकती है। इस ओर भी एसआईटी की जांच जारी है।
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