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गोरखपुर: कोरोना की तीसरी लहर से निपटने की तैयारी, बीआरडी में की जा रही बच्चों के लिए 500 से अधिक बेड की व्यवस्था

Sun, 16 May 2021 04:01 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
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प्रतीकात्मक तस्वीर। - फोटो : पिक्साबे
गोरखपुर में कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर के दौरान विशेषज्ञ बच्चों को अधिक खतरा बता रहे हैं। इस आशंका को देखते हुए शासन ने बच्चों के लिए अलग से बेड बढ़ाने के निर्देश दे दिए हैं। इसकी तैयारी में बीआरडी मेडिकल कॉलेज और स्वास्थ्य विभाग जुट गया है। स्वास्थ्य विभाग हर सीएचसी पर दो-दो बेड बढ़ाने की तैयारी कर रहा है। जबकि बीआरडी मेडिकल कॉलेज के इंसेफेलाइटिस वार्ड में संक्रमित बच्चों का इलाज होगा। जरूरत के मुताबिक बच्चों के आईसीयू बेड भी बढ़ाए जाएंगे। इसके लिए कॉलेज प्रशासन शासन बेड के लिए प्रस्ताव भेजने की तैयारी में हैं। शासन का निर्देश है कि अधिक से अधिक बच्चों के लिए आईसीयू और वेंटिलेटर बढ़ाई जाए। साथ ही ऑक्सीजन प्लांट भी तैयार किए जाएं।
 
आईसीयू और वेंटिलेटर पर ज्यादा जोर
सीएमओ डॉ. सुधाकर पांडेय ने बताया कि तीसरी लहर से पहले विभाग सभी तैयारियां पूरी कर लेगा। हर सीएचसी पर मिनी इंसेफेलाइटिस सेंटर के तीन-तीन बेड हैं। यहां दो-दो बेड और बढ़ाए जाएंगे। इसके अलावा जिला अस्पताल में 17 बेड बच्चों के लिए हैं। यहां भी पांच बेड बढ़ाए जाएंगे। जरूरत के मुताबिक शासन से बच्चों के लिए आईसीयू और वेंटिलेटर की मांग की जाएगी।
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सीएमओ डॉ. सुधाकर पांडेय। - फोटो : अमर उजाला।
निजी अस्पतालों का भी लिया जाएगा सहयोग
सीएमओ डॉ. सुधाकर पांडेय ने बताया कि बच्चों के इलाज में निजी अस्पतालों का भी सहयोग लिया जाएगा। अस्पतालों से वार्ता कर बच्चों के लिए आईसीयू और वेंटिलेटर के लिए कहा जाएगा। इसके अलावा शहर में कई ऐसे अस्पताल है जहां पर बच्चों के लिए अलग से एनआईसीयू और आईसीयू वार्ड बने हैं। उन अस्पतालों का भी सहयोग लिया जाएगा।
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बीआरडी मेडिकल कॉलेज। - फोटो : अमर उजाला।
बीआरडी में बने इंसेफेलाइटिस वार्ड का हो सकता उपयोग
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्रभारी प्राचार्य डॉ. पवन प्रधान ने बताया कि शासन से निर्देश मिलने के बाद तीसरी लहर को लेकर तैयारियां शुरू कर दी गई है। मेडिकल कॉलेज के इंसेफेलाइटिस वार्ड में बच्चों के लिए अलग से बेड और आईसीयू वार्ड बनाए गए हैं। इसमें 400 बेड हैं। इन 400 बेड में 177 बेड फ्रेबीकेटेड वार्ड में बनाए गए हैं, जिसकी दीवार कंक्रीट से न बनकर प्लास्टिक से तैयार की गई है। इस वार्ड के रास्ते भी अलग हैं। इन वार्डों का उपयोग हम कोविड वार्ड के रूप में कर सकते हैं। इस बीच अगर इंसेफेलाइटिस के मरीज मिलते हैं तो थोड़ी मुश्किल होगी, लेकिन शासन ने यह भी निर्देश दिया है कि जरूरत के मुताबिक बच्चों के उपयोग में आने वाले आईसीयू और वेंटिलेटर की खरीदारी कर सकते है

 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
बच्चों के डॉक्टरों को मिलेगा प्रशिक्षण
तीसरी लहर से पहले बच्चों के डॉक्टरों को प्रशिक्षण देने की तैयारी चल रही है। पीड्रियाट्रिक वार्ड में किस तरह कोविड के बच्चों का इलाज करना होगा। इसके लिए केजीएमयू और एसजीपीजीआई के डॉक्टर ऑनलाइन प्रशिक्षण देंगे। इसमें निजी अस्पतालों समेत बीआरडी और जिला अस्पताल के डॉक्टर भी शामिल होंगे। इसके अलावा देश भर के बच्चों के विशेषज्ञ डॉक्टर भी प्रशिक्षण में शामिल होंगे, जिन्होंने हाल में ही मासूमों को कोविड से जंग जीतने में अहम भूमिका निभाई है।
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बीआरडी स्थित 500 शैया युक्त बाल रोग चिकित्सालय संस्थान। - फोटो : अमर उजाला।
500 से अधिक बेड बनाने की तैयारी
जिले में बच्चों के लिए कुल 500 से अधिक बेड बनाने की तैयारी हैं। इसमें 400 बेड तो बीआरडी मेडिकल कॉलेज के इंसेफेलाइटिस वार्ड में ही हैं। इसके अलावा बीआरडी के बाल रोग संस्थान में 500 बेड बनाए गए हैं। इसमें 300 बेड का कोविड अस्पताल चल रहा है। वहीं, दूसरी ओर बच्चों के अधिक संक्रमित मिलने पर निजी अस्पतालों के बेडों को विभाग शामिल करेगा।
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प्रतीकात्मक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला।
दो मासूमों की हो चुकी हैं कोविड से मौत
दूसरी लहर में अब तक बीआरडी मेडिकल कॉलेज में पीपीगंज के चार साल के मासूम और सिद्धार्थनगर जिले के रहने वाले 10 साल के बालक की मौत कोविड से हो चुकी है। बताया जाता है कि इनके फेफड़े में संक्रमण अधिक था। इसकी वजह से उन्हें सांस लेने में परेशानी हो गई थी। शरीर में क्लाटिंग (खून के थक्के) बन गए थे। इसकी वजह से मासूमों की मौत हुई है। जबकि पहली लहर में एक भी मासूम की मौत नहीं हुई थी।
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डॉ. अश्वनी मिश्रा। - फोटो : अमर उजाला।
फेफड़े खराब कर रहा नया स्ट्रेन
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के चेस्ट विभागाध्यक्ष डॉ. अश्वनी मिश्रा ने बताया कि दूसरी लहर का नया स्ट्रेन 12 से 15 घंटे में 70 से 75 फीसदी फेफड़ों को खराब कर रहा है। इसकी वजह से इस बार मौत ज्यादा हो रही है। माना जा रहा है कि तीसरी लहर का वायरस मौजूदा स्ट्रेन से ज्यादा खतरनाक साबित हो सकता है। इसे देखते हुए तैयारी की जा रही है।
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