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किसी फिल्म से कम नहीं था सीएम योगी का ये मास्टर प्लान, सालों पहले दिखाया था ट्रेलर

Thu, 09 Apr 2020 10:00 AM IST
vivek shukla डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर।
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योगी आदित्यनाथ। - फोटो : अमर उजाला।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्पेशल सीरीज का ये 9वां भाग है। पहले आठ भाग में आपने पढ़ा कि कैसे योगी आदित्यनाथ उत्तराखंड स्थित पैतृक गांव पंचूर से गोरखपुर आए और दीक्षा लेकर संन्यासी बन गए। मां-बाप ने भी बेटे के फैसले के आगे हार मान ली। योगी ने पहली बार गोरखनाथ मंदिर के बाहर निकलकर छात्रों का नेतृत्व किया और पहली बार में ही एसएसपी को फोन कर चेतावनी दे डाली। छोटी उम्र में ही योगी नायक बन गए थे। अब आगे पढ़ें...
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सीएम योगी आदित्यनाथ। - फोटो : अमर उजाला।
उत्तर प्रदेश के सीएम योगी का 1999 से ही आजमगढ़ आना जाना था, इस दौरान एक पुजारी की हत्या हो गई थी, जिसे लेकर योगी ने बड़ा प्रदर्शन किया था। इसके बाद 2005 में मऊ दंगे के बाद हिंदू युवा वाहिनी ने आजमगढ़, मऊ और अन्य आसपास के जिलों में अपनी गतिविधियां बढ़ा दी थी।
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योगी आदित्यनाथ। - फोटो : अमर उजाला।
अहमदाबाद धमाकों के एक महीने बाद गुजरात पुलिस ने आजमगढ़ से हमले में शामिल एक आरोपी अबू बशीर को पकड़ा। भगवा संगठनों ने हिंदू युवा वाहिनी के नेतृत्व में एलान किया कि वो आजमगढ़ में आतंकवाद के खिलाफ रैली निकालेंगे।

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cm yogi - फोटो : अमर उजाला।
दिन तय हुआ, 7 सितंबर 2008, जगह- डीएवी कॉलेज का मैदान। सीएम योगी उसमें मुख्य वक्ता थे। रैली की सुबह, गोरखनाथ मंदिर से करीब 40 वाहनों का काफिला निकला। उन्हें आजमगढ़ में विरोध की पहले से ही आशंका थी, इसलिए टीम योगी पहले से ही तैयार थी।
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सीएम योगी आदित्यनाथ। - फोटो : अमर उजाला
काफिले में योगी की लाल एसयूवी सातवें नंबर पर थी। आजमगढ़ के करीब पहुंचने तक काफिले में करीब 100 चार पहिया और सैकड़ों की संख्या में बाइक जुड़ चुकी थीं। एक पत्थर काफिले में मौजूद सातवीं गाड़ी यानि सीएम योगी के गाड़ी पर लगा।
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cm yogi - फोटो : amarujala
योगी के काफिले पर हमला हो चुका था। हमला सुनियोजित था।  काफिला तीन हिस्सों में बंट चुका था। हमलावर अपने लक्ष्य को ढूंढ रहे थे। लेकिन योगी आखिर थे कहां? हर कोई यही सवाल कर रहा था। उनकी तलाश में लोग व्याकुल हो रहे थे, तभी पता चला कि योगी आगे गई छह कारों के साथ निकल चुके थे, वास्तव में वो काफिले के पहले एसयूवी में थे।
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सीएम योगी। - फोटो : अमर उजाला
रैली तीन घंटे तक चली। योगी ने आतंकी हमलों और बशीर की गिरफ्तारी को राजनीतिक रंग देने पर तीखा हमला बोला, लेकिन अपने ऊपर हुए जानलेवा हमले पर एक शब्द भी नहीं कहा। रैली के करीब 10 दिन बाद ही, दिल्ली पुलिस ने जामिया नगर स्थिति के बाटला हाउस में इंडियन मुजाहिदीन की तलाश में छापे मारे, जिसमें दो संदिग्ध मारे गए। वहीं दो फरार होने में सफल रहे। जांच में पता चला कि ये सभी सदस्य आजमगढ़ के थे।

साभार- यह कहानी योगी आदित्यनाथ की जीवन यात्रा पर लिखी किताब योद्धा योगी से लिया गया है, इसे प्रवीण कुमार ने लिखा है।

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