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यूपी के इस जिले में शुरू हुई काले गेहूं की खेती, इन गंभीर बीमारियों के लिए है 'रामबाण'

Fri, 05 Mar 2021 02:57 PM IST
vivek shukla राजीव रंजन, गोरखपुर।
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अपनी फसल के साथ खेत में किसान। - फोटो : अमर उजाला।
सामान्य तौर पर गोरखपुर समेत पूरे पूर्वांचल में सुनहरे रंग के गेहूं की खेती होती है, लेकिन अब यहां काले रंग के गेहूं की खेती भी शुरू हो गई है। चौरीचौरा के झंगहा इलाके के अमहिया नामक गांव में कई किसानों ने इस प्रजाति के गेहूं की खेती शुरू की है। गेहूं की इस प्रजाति में न सिर्फ जिंक, आयरन समेत कई अन्य तरह के पोषक तत्व हैं, बल्कि शुगर, ब्लड प्रेशर, गठिया, मोटापा आदि रोगों के नियंत्रण में भी यह काफी फायदेमंद होता है। सामान्य गेहूं की तुलना में यह तीन से चार गुना तक ज्यादा महंगा है, यानि किसानों के लिए भी काफी फायदेमंद है।
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अपनी फसल के साथ खेत में गौतम त्रिपाठी। - फोटो : अमर उजाला।
बेतियाहाता निवासी गौतम त्रिपाठी ने झंगहा इलाके के अमहिया में अपने फार्म हाउस की जमीन पर इस विशेष किस्म का गेहूं लगाया है। उनके अलावा अमहिया के ही महेंद्र सिंह, उदय प्रताप सिंह, अमरनाथ सिंह, रविंद्र सिंह ने भी अपने खेत में प्रयोग के तौर पर काले गेहूं की फसल लगाई है। गौतम त्रिपाठी ने बताया कि इंदौर में नौकरी के दौरान उन्हें काले गेहूं के बारे में जानकारी मिली। उसके बाद उन्होंने गोलघर स्थित एक बीज भंडार के माध्यम से इस विशेष प्रजाति के गेहूं के बीज को मंगाया। डेढ़ एकड़ में इसकी खेती की है। आठ हजार रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से इसके बिकने की संभावना है। इसकी उपज भी सामान्य गेहूं की तरह ही होगी। बस इसकी बुआई सामान्य गेहूं की तुलना में 15 दिन बाद तक करनी होती है।
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काले गेहूं की फसल। - फोटो : अमर उजाला।
पंजाब के मोहाली स्थित नेशनल एग्री फूड बायोटेक्नॉलजी इंस्टीट्यूट (नाबी) ने इस विशेष किस्म के गेहूं की प्रजाति को विकसित किया है। इस गेहूं की खास बात यह है कि इसका रंग काला है। हालांकि शुरू में इसकी बालियां भी आम गेहूं जैसी हरी होती हैं, पकने पर दानों का रंग काला हो जाता है।

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अपनी फसल के साथ खेत में किसान महेंद्र सिंह। - फोटो : अमर उजाला।
एंथोसायनिन की मात्रा ज्यादा होने की वजह से रंग काला
गोरखपुर विश्वविद्यालय के शिक्षक प्रो. डीके सिंह का कहना है कि फलों, सब्जियों और अनाजों का रंग उनमें मौजूद प्लांट पिगमेंट या रंजक कणों की मात्रा पर निर्भर करता है। काले गेहूं में एंथोसायनिन नाम के पिगमेंट होते हैं। एंथोसायनिन की अधिकता से फलों, सब्जियों, अनाजों का रंग नीला, बैंगनी या काला हो जाता है।
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अपनी फसल के साथ खेत में किसान मगरू यादव। - फोटो : अमर उजाला।
सेहत के लिए भी है फायदेमंद
प्रो. डीके सिंह ने बताया कि एंथोसायनिन नेचुरल एंटीऑक्सीडेंट भी है। इसी वजह से यह सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता है। आम गेहूं में एंथोसायनिन महज 5 पीपीएम (पार्ट्स पर मिलियन) होता है, लेकिन काले गेहूं में यह 100 से 200 पीपीएम के आसपास होता है। एंथोसायनिन के अलावा काले गेहूं में जिंक और आयरन की मात्रा में भी अंतर होता है। काले गेहूं में आम गेहूं की तुलना में 60 फीसदी आयरन ज्यादा होता है। हालांकि, प्रोटीन, स्टार्च और दूसरे पोषक तत्व समान मात्रा में होते हैं। इसके गेहूं के आटे का रंग थोड़ा काला होता है, लेकिन स्वाद में कोई अंतर नहीं होता है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला।
कई ई-कॉमर्स वेबसाइट पर पर है उपलब्ध
फ्लिपकार्ट, अमेजन जैसे कुछ अन्य ई-कॉमर्स वेबसाइट पर काले गेहूं की बिक्री शुरू हो गई है। काले गेहूं का आटा 200 रुपये प्रति किलो की दर से बिक रहा है।
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