गोरखपुर शहर की वायु गुणवत्ता काफी खराब हो गई है। रविवार को एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) 300 के ऊपर दर्ज किया गया। वायु प्रदूषण की यह स्थिति मानव स्वास्थ्य के लिए काफी खराब मानी जाती है। आंखों में जलन के अलावा सांस लेने में तकलीफ होने लगती है। बच्चों पर इसका काफी गंभीर असर पड़ता है। फेफड़ा सिकुड़ जाता है। जानकार बताते हैं कि दिल्ली-एनसीआर से प्रदूषित हवा के गोरखपुर पहुंचने से स्थिति और खराब हुई है।
इन दिनों आकाश में जो धुंध सी दिखाई दे रही है, वह असल में प्रदूषण की चादर है, जो जिले के आसमान में छाई हुई है। जाहिर है कि हवा में प्रदूषण की मात्रा काफी ज्यादा बनी हुई है, जोकि स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से बेहद खतरनाक श्रेणी में आती है। दीपावली के बाद से ही शहर और औद्योगिक क्षेत्र सहजनवां की हवा काफी प्रदूषित हो गई है। इस कारण लोगों को स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें होने लगीं हैं। देश की राजधानी नई दिल्ली में 400 से ज्यादा एक्यूआई होने की वजह से सोमवार से स्कूल बंद कर दिए गए हैं, लेकिन गोरखपुर में एक्यूआई 304 से 325 तक होने के बावजूद कोई कदम नहीं उठाया जा रहा है।
मौसम विशेषज्ञ कैलाश पांडेय ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से एयर क्वालिटी इंडेक्स बहुत खराब बना हुआ है। दिल्ली के ऊपर छाया प्रदूषण गोरखपुर तक पहुंच गया है। वहीं गोरखपुर के ऊपर हवा की रफ्तार काफी कम होने से प्रदूषण यहां से जा नहीं पा रहा है। इस कारण हवा की गुणवत्ता लगातार खराब बनी हुई है।
विज्ञापन
5 of 6
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. राजेश गुप्ता
- फोटो : अमर उजाला।
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. राजेश गुप्ता ने बताया बच्चों के लिए प्रदूषण का वर्तमान स्तर बहुत खतरनाक है। इससे उन्हें सांस की दिक्कत हो सकती है। एलर्जी की आशंका है। ऐसे में खास कर ऐसे बच्चे जो एलर्जिक या अस्थमा से पीड़ित हैं, उन्हें एहतियात बरतने की आवश्यकता है।
फिजिशियन डॉ. अखिलेश कुमार सिंह ने बताया कि 300 से ज्यादा एयर क्वालिटी इंडेक्स होना सामान्य लोगों के लिए भी खतरनाक है। ऐसे में हृदय और सांस के मरीजों के लिए बहुत सावधानी बरतने की आवश्यकता है। हार्ट और सांस के मरीजों को मास्क का इस्तेमाल अवश्य करना चाहिए। सुबह की सैर को बंद कर देना चाहिए।