गोरखपुर में स्टेरॉयड का अधिक इस्तेमाल लोगों की जिंदगी में अंधेरा ला रहा है। स्टेरॉयड के इस्तेमाल से लोग ग्लूकोमा (काला मोतिया बिंद) के शिकार हो रहे हैं। पहले जहां 10 से 15 मरीज मिलते थे वहीं अब यह संख्या 30 तक पहुंच गई है। इनमें पांच प्रतिशत मरीज ऐसे भी हैं जिनकी आंखों की 70 प्रतिशत से अधिक रोशनी जा चुकी है। बीआरडी मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विभाग की ओपीडी में ऐसे मरीजों की संख्या अचानक बढ़ गई है। विशेषज्ञ इस बीमारी को साइलेंट किलर भी कहते हैं।
मेडिकल कॉलेज में नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डॉ रामकुमार जायसवाल बताते हैं कि स्टेरॉयड की वजह से मरीजों को पहले ब्लैक फंगस और व्हाइट फंगस जैसी गंभीर बीमारी से जूझना पड़ा। अब यही स्टेरॉयड मरीजों को ग्लूकोमा बीमारी का दर्द दे रहा है। ग्लूकोमा ने इन मरीजों की आंखों की नसों को क्षतिग्रस्त कर दिया है। जब ऐसे मरीजों से दवाओं के बारे में जानकारी ली गई तो पता चला कि इन लोगों ने स्टेरॉयड का इस्तेमाल अधिक किया है। बताया कि ग्लूकोमा को लेकर लोगों में जागरूकता की कमी है। लोग इस गंभीर बीमारी को नहीं जानते हैं जो धीरे-धीरे मरीजों को अंधा कर दे रही है। अगर स्टेरॉयड का इस्तेमाल इसी तरह से बढ़ता रहा तो लोगों के आंखों को सबसे अधिक खतरा होगा, जिसका इलाज करना मुश्किल होगा।