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बाइस्कोप: संजय दत्त से पहले इन नायकों ने की ‘खलनायक’ बनने की पूरी कोशिश, आमिर का पत्ता इस वजह से कटा

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खलनायक - फोटो : रोहित झा, अमर उजाला
जैकी श्रॉफ और आयशा श्रॉफ के घर साल 1990 में किलकारी गूंजी। 2 मार्च को उस साल जय हेमंत श्रॉफ का जन्म हुआ तो जैकी श्रॉफ को फिल्म ‘हीरो’ में बतौर मेन लीड लॉन्च करने वाले हिंदी सिनेमा के दूसरे शो मैन ‘सुभाष घई’ ने इस बच्चे को पहला शगुन दिया और ये एलान किया कि ये इस बच्चे का पहला साइनिंग अमाउंट है। घई ने ये भी कहा कि ये बच्चा जब भी बड़ा होगा, पहली फिल्म उनके साथ ही करेगा। उस बात को 30 साल बीत चुके हैं। जय हेमंत पूरी दुनिया में टाइगर श्रॉफ के नाम से मशहूर हो चुका है और सुभाष घई की किसी फिल्म में उनका काम करना अब भी बाकी है।

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खलनायक - फोटो : सोशल मीडिया
हां, ये दिलचस्प रहा देखना कि जैकी श्रॉफ की बतौर हीरो जहां पहली फिल्म ‘हीरो’ रही वहीं टाइगर की फिल्म का नाम रहा ‘हीरोपंती’। बाप बेटे का नाम पिछले कुछ महीनों से लगातार इस बात के लिए भी लिया जा रहा है कि टाइगर जल्द ही सुभाष घई की ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘खलनायक’ की रीमेक में काम करने वाले हैं। सुभाष घई ने सात साल पहले इस रीमेक के बारे में पहली बार बात की थी। तब से इसके बनने की सिर्फ चर्चाएं हैं। टाइगर श्रॉफ ने कुछ ही दिनों पहले इस फिल्म के बारे में पूछे जाने के बारे में बस इतना कहा, ‘ऐसा कुछ अभी कनफर्म तो नहीं हुआ है।’

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खलनायक - फोटो : सोशल मीडिया
‘खलनायक’ देश दुनिया में 6 अगस्त 1993 को रिलीज हुई। इसी साल शाहरुख खान की फिल्म ‘बाजीगर’ 12 नवंबर को और ‘डर’ 24 दिसंबर को रिलीज हुई। तीनों फिल्मों में नायकों ने फिल्म के खलनायक का किरदार किया है और तीनों फिल्में सुपरहिट। ये तो आपको पता ही है कि फिल्म ‘डर’ में शाहरुख वाला किरदार पहले आमिर को ऑफर हुआ था। आमिर ने ये किरदार करने से मना तो कर दिया लेकिन जल्द ही उन्हें अपनी गलती का एहसास हो गया। फिर आमिर को किसी ने इस फिल्म के बारे में बताया तो आमिर ने बाकायदा सुभाष घई से मुलाकात की, बैठकें की और उनसे उस फिल्म के बारे में भी खूब पूछा जिसे वह नाना पाटेकर और जैकी श्रॉफ के साथ बना रहे थे।

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खलनायक - फोटो : सोशल मीडिया
जी हां, फिल्म ‘खलनायक’ पहले जैकी और नाना के साथ ही बन रही थी, एक आर्ट फिल्म के रूप में। थोड़ा और पीछे जाएं तो पता चलता है कि फिल्म ‘खलनायक’ दरअसल सुभाष घई की उस फिल्म ‘देवा’ की परिवर्तित संस्करण है, जो वह अमिताभ बच्चन के साथ बनाने वाले थे। फिल्म का बंबई में शानदार मुहूर्त भी हुआ लेकिन फिल्म इससे आगे बढ़ नही सकी। सुभाई घई आत्ममुग्ध फिल्ममेकर रहे हैं और उनके साथ जल्दी जल्दी किसी की पटरी बैठ पाना आसान नहीं है। हवा में लच्छे छोड़ने के वह शौकीन हैं और फिल्मों की तैयारियां वह दरबार लगा कर करते हैं। जिस तरह की कामयाबी उन्होंने पाई है, उस हिसाब से ये सब करना उन्हें भाता भी है। नाना पाटेकर जब तक फिल्म में थे, बल्लू का किरदार एक अधेड़ आदमी का ही रहा, लेकिन जैसे जैसे राम केलकर के साथ सुभाई घई फिल्म की पटकथा पर आगे बढ़ते गए ये किरदार एक गुमराह नौजवान का हो गया। घई ने इसका जिक्र नाना से किया तो उन्होंने स्क्रिप्ट के हिसाब से नया हीरो चुन लेने की छूट उन्हें दे तो दी लेकिन कभी इस हरकत के लिए सुभाष घई को माफ़ नही किया।

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खलनायक - फोटो : सोशल मीडिया
नाना फिल्म से बाहर हुए तो आमिर खान को लगा कि अब मौका है और वह एक निगेटिव रोल करके ‘डर’ के हाथ से निकल जाने की कमी पूरी कर सकते हैं। लेकिन, आमिर के हाथ से ये मौका भी निकल गया क्योंकि सुभाष घई ने उन्हें बल्लू के रोल की बजाय राम का यानी पुलिस इंस्पेक्टर वाला रोल ऑफर कर दिया। हालांकि, बल्लू के रोल के लिए कहते हैं कि अनिल कपूर ने भी सुभाष घई को ‘कनविन्स’ करने की पूरी कोशिश की लेकिन घई का यही कहना रहा कि अनिल के अपनी इच्छा जताने से पहले ही वह ये रोल संजय दत्त को दे चुके थे। संजय दत्त का फिल्म ‘खलनायक’ का हिस्सा होना ही सुभाष घई के लिए कास्टिंग के मामले में बड़ी जीत थी। और, इसके इश्तेहार भी उन्होंने शानदार तरीके से छपवाए। घई इससे पहले 1982 में रिलीज हुई फिल्म ‘विधाता’ में भी संजय दत्त को निर्देशित कर चुके थे।

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फिल्म ‘खलनायक’ की कास्ट आखिरकार संजय दत्त, जैकी श्रॉफ और माधुरी दीक्षित के साथ फाइनल हुई। ये वह वक्त था जब संजय दत्त बहुत तनाव भरे जीवन से गुजर रहे थे। बंबई शहर में अयोध्या मसले को लेकर मारकाट मची थी। पत्नी ऋचा शर्मा अपने इलाज के लिए विदेश में रह रही थीं। पिता सुनील दत्त दिन भर सांप्रादायिक सौहार्द बनाने में लगे रहते और संजय दत्त का तनाव बढ़ता रहता। ऐसे माहौल में उन्हें माधुरी दीक्षित का साथ मिला। माधुरी दीक्षित इस फिल्म से पहले भी संजय दत्त के साथ काम कर चुकी थीं, लेकिन फिल्म ‘खलनायक’ की शूटिंग के दौरान ही उन्हें समझ आ गया कि ये फिल्म उनके करियर का टर्निंग प्वाइंट होने जा रही है। फिल्म ‘बेटा’ के बाद से माधुरी का करियर गोता मारने लगा था। उनकी एक के बाद एक फिल्में फ्लॉप हो रही थीं और एक अदद हिट की जिद में ही माधुरी ने फिल्म ‘खलनायक’ में ‘चोली के पीछे क्या है..’ जैसे गाने पर भी एतराज नहीं किया।

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खलनायक - फोटो : सोशल मीडिया
फिल्म ‘खलनायक’ की शूटिंग के दौरान संजय दत्त और माधुरी दीक्षित की कथित मोहब्बत के किस्से बंबई की फिल्म पत्रिकाओं में खूब छपते थे। हर गॉसिप मैगजीन उनके किस्सों से  रंगी होती। और, कहा तो ये भी जाता है कि माधुरी से तब फिल्म के निर्माता निर्देशक सुभाष घई ने उनके एग्रीमेंट में ‘नो प्रेगनेंसी’ क्लॉज पर भी साइन करा लिए थे। माधुरी बहुत ही सुशील और संस्कारी परंपरा वाली लड़की थी, उन्होंने इस करार पर साइन भी कर दिया और सुभाष घई  के साथ अपना तीन फिल्मों का करार भी पूरा किया। लेकिन, यही सुभाष घई इस फिल्म के बाद बनी अपनी फिल्म ‘परदेस’ की हीरोइन महिमा चौधरी को तीन फिल्मों के करार में बांध नहीं सके। घई पर तब राजनीतिक दबाव पड़ा था। लाख चाहकर कैटरीना कैफ को भी वह ऐसे किसी करार में बांध नहीं सके। हालांकि, इस बार जो पड़ा वह सलमान खान का दबाव नहीं था।

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खैर, हम लौटते हैं अपनी आज के बाइस्कोप की फिल्म ‘खलनायक’ की तरफ। सुभाष घई तब तक हिंदी सिनेमा के नए शो मैन घोषित हो चुके थे। ‘हीरो’, ‘कर्मा’, ‘राम लखन’, ‘सौदागर’ उनकी कंपनी की बैक टू बैक ब्लॉकबस्टर फिल्में थीं और सुभाष घई का मन हो आया एक हॉलीवुड फिल्म डायरेक्ट करने का। इस सपने को पंख लगाए टेनिस खिलाड़ी अशोक अमृतराज ने। दोनों ने ओमर शरीफ से मुलाकात की और वह भी इस प्रोजेक्ट का हिस्सा बनने को राजी हो गए। लेकिन, लॉस एंजिलिस से लौटते समय घई का मन बदल गया। उन्हें समझ आ गया कि विदेशी कंपनी में बस एक कामगार बनकर काम करने से अच्छा है अपनी देसी कंपनी का राजा होकर काम करना। घई तब तक सिनेमा और प्रोजेक्ट दोनों बनाने में माहिर थे। राम केलकर उनके पुराने साथी थे, संवाद लेखन के लिए उन्हें कमलेश पांडे जैसे दिग्गज का साथ मिला और तैयार हो गई पूरी पटकथा फिल्म ‘खलनायक’ की।

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फिल्म ‘खलनायक’ संगीत के मामले में लक्ष्मीकांत प्यारेलाल और सुभाष घई की साथ साथ काम करने वाली आखिरी फिल्म मानी जाती है क्योंकि इस फिल्म के बाद घई ने फिल्म ‘परदेस’ निर्देशित की साल 1997 में और तब तक नदीम श्रवण हर बड़ी फिल्म की जरूरत बन चुके थे। फिल्म ‘खलनायक’ का संगीत चर्चित हुआ इसके एक विवादास्पद गाने ‘चोली के पीछे.. ’ को लेकर हुए अदालती मुकदमे के चलते और इस फिल्म के संगीत की टिप्स म्यूजिक कंपनी की लगाई कीमत को लेकर। इससे पहले तक सुभाष घई की फिल्मों का संगीत एचएमवी म्यूजिक कंपनी लिया करती थी। इस फिल्म के लिए भी घई को उन्होंने 40 लाख रुपये का ऑफर दिया लेकिन घई ने इस फिल्म का संगीत एक करोड़ रुपये में टिप्स को बेच दिया। टिप्स ने इस फिल्म के एक करोड़ के करीब कैसेट और सीडी उसी साल बेच डाले। ‘चोली के पीछे..’ के लिए ही अलका याग्निक और इला अरुण को बेस्ट फीमेल सिंगर का फिल्मफेयर अवार्ड मिला और इसी गाने के लिए मशहूर कोरियोग्राफ सरोज खान ने जीता बेस्ट कोरियोग्राफर का फिल्मफेयर अवार्ड।

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फिल्म ‘खलनायक’ की कहानी बल्लू नाम के एक बदमाश की कहानी है जो कई संगीन अपराधों में शामिल है। एक नेता के खून के वक्त वह रंगेहाथों पकड़ा जाता है और फिर जेल से भाग जाता है। पुलिस इंस्पेक्टर राम का दामन दागदार होता है तो उसकी मित्र गंगा उसकी मदद के लिए मैदान में उतरती है। पूरी फिल्म में इन्हीं तीनों किरदारों के बीच चूहे बिल्ली का खेल चलता रहता है। इस खेल के दूसरे खिलाड़ी भी अपने अपने फन के माहिर हैं। अनुपम खेर, राखी, प्रमोद माउथो और नीना गुप्ता के अलावा इस फिल्म में बल्लू की प्रेमिका के रूप में नजर आईं राम्या कृष्णन। जी हां, वही राम्या कृष्णन जिन्हें नई पीढ़ी फिल्म ‘बाहुबली’ की रानी शिवगामी देवी के रूप में जानती है। राम्या को साउथ के समंदर से फिरोज खान ने खोजकर निकाला था फिल्म ‘दयावान’ के लिए। यहीं सुभाष घई की नजर उन पर पड़ी और उन्होंने राम्या को ‘खलनायक’ की सोफिया सुलोचना बना दिया। फिल्म का टाइटल सॉन्ग ‘नायक नहीं खलनायक हूं मैं...’ राम्या और संजय दत्त पर ही फिल्माया गया है..

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फिल्म ‘खलनायक’ की शूटिंग पूरी ही होने वाली थी कि संजय दत्त मुंबई बम धमाकों के मामले में गिरफ्तार हो गए। लोगों को लगा कि सुभाष घई की ये फिल्म अब कभी रिलीज नहीं होगी। लेकिन, संजय दत्त की सर्वोच्च न्यायालय को लिखी चिट्ठी रंग लाई और उनको जमानत पर रिहा कर दिया गया। संजय दत्त ने सिद्धिविनायक के बाद मातोश्री जाकर माथा टेका और फिल्म ‘खलनायक’ की डबिंग पूरी की। फिल्म के गाने को लेकर हुए विवाद में भी सुभाई घई को शिवसेना के मुखपत्र ‘सामना’ की काफी मदद मिली। फिल्म को लेकर पब्लिक का मूड भांपने के लिए सुभाष घई ने फिल्म के एक साथ करीब एक दर्जन प्रीमियर किए। इस दौरान उमड़ी भीड़ को देख घई को यकीन हो गया कि ये फिल्म फ्लॉप नहीं होने वाली। पूरे देश में इस फिल्म के पहले दिन पहले शो के दौरान भीड़ नियंत्रित करने के लिए हर सिनेमाघर पर पुलिस बुलानी पड़ी थी। आज के बाइस्कोप में इतना ही, कल बात करेंगे एक और ओल्डी गोल्डी की..। सिलसिला जारी है।

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(बाइस्कोप अमर उजाला डिजिटल का दैनिक कॉलम है जिसमें हम उस दिन रिलीज हुई किसी पुरानी फिल्म के बारे में चर्चा करते हैं।)
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