सनोज मिश्रा, अर्शिन मेहता, जीतेंद्र नारायण सिंह, अल्फिया शेख, अन्य
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फिल्म में एक ऐसे राष्ट्र के बारे में बताया गया है, जो पतन के कगार पर है, जो हिंसक विरोध प्रदर्शनों, राजनीतिक फायदों और क्रूर कार्रवाई से तबाह हो गया है। सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच क्रूर झड़पों में पुलिस अधिकारियों सहित 170 से अधिक लोग मारे गए हैं। पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के अपदस्थ होने से आहत सरकार ने नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस के नए शासन के तहत कर्फ्यू और इंटरनेट ब्लैकआउट सहित कठोर नियम लागू किए हैं। आलोचकों का कहना है कि यूनुस, जो कभी शांति और माइक्रो फाइनेंस का प्रतीक थे, अब वे पश्चिमी हितों की कठपुतली बन गए हैं, जो ऐसी नीतियां लागू कर रहे हैं, जिसने देश के दुख को और गहरा कर दिया है।