ओटीटी के आने के बाद से बड़े पर्दे की फिल्मों के कंटेंट में काफी बदलाव देखने को मिल रहा है। आज कल मेकर्स रियल स्टोरी या घटना पर आधारित फिल्में बनाना पसंद कर रहे हैं। हालांकि छोटे पर्दे पर इसका उल्ट हो रहा है। टीवी धारावाहिक को देखकर ऐसा लग रहा है कि यहां मेकर्स का ध्यान कंटेंट की बजाए केवल टॉप टीआरपी सीरियल्स की सूची में जगह बनाने पर केंद्रित कर रहे हैं। यही कारण है कि वह एक ही सीन पर हफ्ते निकाल दे रहे हैं और 'कल देखें' के नाम पर अपने दर्शकों के साथ मजाक कर रहे हैं।