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Shashi Kapoor: ‘चोर मचाए शोर’ के पूरे हुए 50 साल, शशि कपूर की इन हिट फिल्मों में दिखा अदाकारी का अनोखा चांद

Mon, 18 Mar 2024 10:33 AM IST
आकांक्षा गुप्ता अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

सार

शशि कपूर का असली नाम बलबीर राज पृथ्वीराज कपूर था। तीनों भाइयों में शशि कपूर सबसे छोटे थे। मां को उनको असली नाम पसंद नहीं आया तो उन्होंने प्यार से उन्हें शशि कहकर बुलाना शुरू किया और यहीं से उनका नाम शशि कपूर हो गया। 
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शशि कपूर - फोटो : अमर उजाला

अभिनेता शशि कपूर का जन्म 18 मार्च 1938 के दिन कलकत्ता (अब कोलकाता) में हुआ था। शशि कपूर का असली नाम बलबीर राज पृथ्वीराज कपूर था। तीनों भाइयों में शशि कपूर सबसे छोटे थे। मां को उनको असली नाम पसंद नहीं आया तो उन्होंने प्यार से उन्हें शशि कहकर बुलाना शुरू किया और यहीं से उनका नाम शशि कपूर हो गया। भारतीय सिनेमा में उनके योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें 2011 में पद्म भूषण और 2014 में दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया। आज शशि कपूर के जन्मदिन पर आइए जानते हैं, उनके करियर की 10 प्रमुख फिल्मों के बारे में.. 

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जब जब फूल खिले - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

फिल्म : जब जब फूल खिले (5 नवंबर 1965)

सूरज प्रकाश के निर्देशन में बनी फिल्म 'जब जब फूल खिले' में  शशि कपूर और नंदा की लीड भूमिका रही। फिल्म में एक अमीर लड़की, एक गरीब लड़के के प्यार में पड़ जाती है, और लड़की के पिता को उनका प्यार मंजूर नहीं है। शशि कपूर ने इस फिल्म में राज कुमार की भूमिका निभाई थी और नंदा ने रीता खन्ना की भूमिका निभाई थी। फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर सिल्वर जुबली मनाई और 1965 की सबसे बड़ी हिट फिल्मों में से एक बन गई और साथ ही शशि कपूर की सर्वश्रेष्ठ फिल्मों में से एक बन गई। इस फिल्म का गीत 'परदेसियों से ना अंखिया मिलाना' जबरदस्त हिट हुआ था। इसी फिल्म से शशि कपूर हिंदी सिनेमा में स्थापित हुए।

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हसीना मान जाएगी - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

फिल्म : हसीना मान जाएगी (1 जनवरी 1968)

फिल्म 'हसीना मान जाएगी' में शशि कपूर ने दोहरी भूमिका निभाई थी। शशि कपूर के अपोजिट बबीता थीं। प्रकाश मेहरा के निर्देशन में बनी इस फिल्म के सभी गाने हिट थे। खासकर मो. रफी और लता मंगेशकर की आवाज में फिल्माया गाना 'बेखुदी में सनम, उठ गये जो कदम' काफी लोकप्रिय हुआ था। जो आज भी लोगों की जुबान पर है। इसी शीर्षक पर बाद में डेविड धवन ने भी फिल्म बनाई थी।

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कन्यादान - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

फिल्म : कन्यादान (9 अगस्त 1968)

फिल्म 'कन्यादान' मोहन सहगल के निर्देशन में बनी सामाजिक रोमांटिक ड्रामा फिल्म फिल्म थी। फिल्म की कहानी बाल विवाह जैसे सामाजिक मुद्दे के इर्द-गिर्द घूमती है। फिल्म के माध्यम से यह संदेश देने की कोशिश की गई थी कि बचपन में की गई शादी असली शादी नहीं होती है। और, असली कन्यादान वह होता है जब माता -पिता बेटी के वयस्क हो जाने पर उसकी सहमति से उनके लिए वर चुने। इस फिल्म में शशि कपूर ने अमर और आशा पारेख ने रेखा की भूमिका निभाई थी।

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एक श्रीमान एक श्रीमती - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

फिल्म : एक श्रीमान एक श्रीमती (31 दिसंबर 1968)

फिल्म 'एक श्रीमान एक श्रीमती' का निर्माण अनिल कपूर के पिता सुरिंदर कपूर ने किया था। भप्पी सोनी के निर्देशन में बनी इस फिल्म में शशि कपूर और बबीता की अहम भूमिका थी। फिल्म में शशि कपूर ने प्रीतम और बबीता कपूर ने दीपाली की भूमिका निभाई थी। प्रीतम को दीपाली से प्रेम हो जाता है जो पहले  से अजीत( प्रेम चोपड़ा)को अपने जीवन साथी के रूप में चुन चुकी है। दीपाली के चाचा का दिल जीतकर प्रीतम कैसे उनके करीब पहुंचता है और दीपाली का प्यार जीत लेता है, इसी के इर्द -गिर्द फिल्म की कहानी घूमती है। यह फिल्म साल की सफल फिल्म रही है।

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शर्मीली - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

फिल्म : शर्मीली (1 जनवरी 1971)

फिल्म 'शर्मीली' का निर्माण सुबोध मुखर्जी और निर्देशन समीर गांगुली ने किया था। यह एक रोमांटिक फिल्म है जिसमें शशि कपूर ने कैप्टन अजीत कपूर की भूमिका निभाई थी। इस फिल्म में राखी ने कामिनी और कंचन की दोहरी भूमिका निभाई थी। कहानी में अचानक नया मोड़ तब आता है जब कैप्टन अजीत कपूर को पता चलता है कि जिससे उनकी शादी हो रही है वो वह लड़की नहीं जिसे वह पसंद करता है। बल्कि वह कंचन की जुड़वा बहन कामिनी है। इस फिल्म के सभी गीत हिट रहे हैं जिसमें 'आज मदहोश हुआ जाए रे', खिलते हैं गुल यहां और 'ओ मेरी शर्मिली' आज भी लोगों की जुबान  पर हैं। 

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जानवर और इंसान - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

फिल्म : जानवर और इंसान (1 जनवरी 1972)

तापी चाणक्य के निर्देशन में बनी फिल्म 'जानवर और इंसान' में  शशि कपूर और राखी की मुख्य भूमिकाएं थी। इस फिल्म में शशि कपूर ने शेखर की भूमिका निभाई थी जो बाघ के आतंक को कम करने के लिए उसको घायल कर देता है, लेकिन बाघ निडर और आदमखोर बन जाता है। शेखर द्वारा उसको फंसाने और मारने की सभी कोशिशें बेकार जाती हैं। इसी कोशिश में उसकी मुलाकात मीना से होती है और दोनों एक-दूसरे के प्यार में पड़ जाते हैं। इस फिल्म में मीना की भूमिका राखी ने निभाई थी। यह फिल्म साल 1972 की सफल फिल्मों में रही है।

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आ गले लग जा - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

फिल्म : आ गले लग जा (16 नवंबर 1973)

निर्देशक मनमोहन देसाई की रोमांटिक मेलोड्रामा फिल्म 'आ गले लग जा' में विवाह पूर्व यौन संबंध और गर्भावस्था पर प्रकाश डाला गया, जिसे लंबे समय तक सामाजिक कलंक माना जाता था। फिल्म ने अपनी आकर्षक कहानी और अद्भुत संगीत के माध्यम से सभी प्रकार की सामाजिक वर्जनाओं को तोड़ दिया। इस फिल्म में शशि कपूर ने प्रेम और शर्मिला टैगोर ने प्रीति की भूमिका निभाई थी। इस फिल्म का गीत 'तेरा मुझसे है कोई नाता' खूब लोकप्रिय हुआ था। इस फिल्म का तेलुगु और तमिल में भी रीमेक बन चुका है। अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती की फिल्म 'प्यार झुकता नहीं' इसी फिल्म से प्रेरित थी। 

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चोर मचाए शोर - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

फिल्म : चोर मचाए शोर ( 18 मार्च 1974) 

फिल्म 'चोर मचाए शोर' में शशि कपूर ने विजय की भूमिका निभाई थी जिसे रेखा नाम की लड़की से प्यार हो जाता है। लेकिन विजय के गरीब होने के कारण रेखा के पिता उससे शादी के लिए मना कर देते एक अमीर राजनेता के बेटे से शादी तय कर देते हैं। रेखा के पिता और नेता मिलकर विजय को एक झूठे मामले में अपराधी बना देते है और उसको जेल हो जाती है। इस फिल्म में रेखा की भूमिका मुमताज ने निभाई थी। अशोक रॉय के निर्देशन में बनी इस फिल्म का गीत 'दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे' खूब प्रसिद्ध हुआ था, जिसके बाद इसी के नाम पर यशराज फिल्म्स ने 'दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे' का निर्माण किया। 

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सत्यम शिवम सुंदरम - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

फिल्म : सत्यम शिवम सुंदरम ( 22 मार्च 1978)

निर्माता - निर्देशक राज कपूर की फिल्म 'सत्यम शिवम सुंदरम' की पूरी अवधारणा हमारा ध्यान इस दुनिया की कड़वी सच्चाई की ओर आकर्षित करना था जो किसी व्यक्ति को बाहरी सुंदरता के आधार पर आंकती है। इस फिल्म में शशि कपूर और जीनत अमान की मुख्य भूमिका थी। इस फिल्म में शशि कपूर ने राजीव नाम के एक इंजिनियर की भूमिका निभाई थी जो रूपा का गाना सुनकर उनकी तरफ आकर्षित होता है। इस फिल्म ने भी सिनेमा हाल में हंगामा मचा दिया था। फिल्म के सभी गाने सुपरहिट रहे हैं। इस फिल्म की शूटिंग के दौरान शशि कपूर काफी व्यस्त चल रहे थे और इस फिल्म के लिए वक्त नहीं दे पाते थे। राज कपूर ने नाराज होकर उन्हें टैक्सी कह दिया था क्योंकि शशि कपूर का मीटर हमेशा डाउन रहता था। 

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जुनून - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

फिल्म : जुनून (30 मार्च 1979)

श्याम बेनेगल के निर्देशन में बनी फिल्म 'जुनून' का निर्माण शशि कपूर ने खुद ही किया था। इस फिल्म की कहानी साल 1857 के भारतीय विद्रोह के इर्द - गिर्द घूमती है। इस फिल्म में शशि कपूर ने जावेद खान की भूमिका निभाई थी जो मुस्लिम पठान विरासत का एक लापरवाह सामंती सरदार है। इस फिल्म में शशि कपूर की पत्नी की भूमिका शबाना आजमी ने निभाई थी। यह फिल्म रस्किन बॉन्ड की काल्पनिक उपन्यास  'ए फ्लाइट ऑफ पिजन्स' पर आधारित थी। इस फिल्म ने हिंदी में सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म का राष्ट्रीय पुरस्कार और सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का फिल्मफेयर पुरस्कार भी जीता। इसके अलावा इस फिल्म को कई अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोहों में प्रदर्शित किया गया था।

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