राजकुमार राव
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उन्होंने बताया, स्कूल की किताबों और ट्यूशन फीस के लिए वह कभी-कभी हमारे रिश्तेदारों से मदद मांगती थीं। इस तरह उन्होंने हमारा पालन-पोषण किया। दो या तीन साल स्कूल के शिक्षकों ने हमारी फीस भरी। क्योंकि हम तीन थे और स्कूल की फीस के लिए पैसे नहीं थे। वे नहीं चाहते थे कि हमें स्कूल से निकाल दिया जाए, इसलिए उन्होंने हमारे लिए पैसे जुटाए।