'आडुजीवितम - द गोट लाइफ' रिव्यू
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
वहीं, नजीब ने रेगिस्तान में फंसने के अपने दर्द को साझा करते हुए कहा, मैंने हमेशा सोचा था कि मैं कभी नहीं बचूंगा। मेरे लिए प्रार्थना करने के लिए कोई भी देवता नहीं बचा था। मैंने हर एक भगवान से प्रार्थना की। जिंदगी से बेहतर तो मौत थी। कई बार मैं यूं ही रेत पर लेट जाता था, ताकि कुछ जीव मुझे काट लें और मैं मर जाऊं।' उन्होंने कहा, 'मैं जब उठा, तो मैंने केवल अपने परिवार के बारे में सोचा। मैं जब वहां पहुंचा तो मेरी पत्नी पहले से ही 8 महीने की गर्भवती थी। मेरे दिमाग में केवल यही बात थी कि उसने बच्चे को जन्म दिया या नहीं।'