वीर जारा
- फोटो : अमर उजाला, मुंबई
वह आगे बताते हैं, “सन 2003 की बात है, एक दिन यश जी ने मुझसे कहा कि छह सालों के बाद उन्होंने कोई फिल्म निर्देशित करने का फैसला किया है, लेकिन यह एक ऐसी फिल्म है, जिसमें गुजरे जमाने के म्यूजिक की जरूरत पड़ेगी, एक ऐसा संगीत जो आजकल घुस आए पश्चिमी प्रभावों से पूरी तरह मुक्त हो। मेरे मुंह से सहज ही यह निकल गया कि मेरे पास गुजरे जमाने की मेलोडी वाले कुछ टेप पड़े हुए हैं, लेकिन उनको 28 सालों से मैंने नहीं सुना। इस सुझाव से वह उत्साहित नजर आए और उन्होंने काफी आश्चर्य जाहिर किया कि इससे पहले कभी मैंने इस बात का जिक्र नहीं किया था! उनके बेटे आदित्य चोपड़ा इस नई फिल्म की स्क्रिप्ट लिख रहे थे। आदि वर्तमान में जीने वाले व्यक्ति हैं और उन्हें कमर्शियल रूप से स्वीकार किए जाने वाले गानों की जरूरत थी। केवल यश जी और आदि को ही पता था कि उन्हें क्या चाहिए।“