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बाइस्कोप: 50 साल पुरानी धुनों ने ‘वीर जारा’ में दिखाया था कमाल, मदन मोहन के बेटे ने सुनाई पूरी कहानी

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वीर जारा - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
शाहरुख खान, रानी मुखर्जी और प्रीति जिंटा स्टारर यश चोपड़ा की रोमांटिक फिल्म ‘वीर जारा’ हिंदी सिनेमा की एक ब्लॉकबस्टर फिल्म है। सरहदों से बंटे रिश्तों और एहसासों की इस खूबसूरत कहानी को दर्शकों ने हाथोंहाथ लिया। फिल्म में इसके कलाकारों के अभिनय और यश चोपड़ा के बेहतरीन निर्देशन के साथ ही इसके संगीत ने लोगों का मन मोह लिया। जी हां, ‘वीर जारा’ का संगीत बेमिसाल है। ये संगीत हिंदी सिनेमा में अपनी तरह का अनूठा प्रयोग रहा क्योंकि ऐसा पहली बार हुआ कि किसी दिवंगत संगीतकार की अतीत में बनाई धुनों को उनके जाने के बाद किसी फिल्म के ओरिजनल संगीत में शामिल किया गया।

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वीर जारा फिल्म - फोटो : यशराज फिल्म्स
स्वर्गीय मदन मोहन के इस संगीत ने फिल्म को सफल बनाने में सबसे बड़ा योगदान दिया। जो लोग यश चोपड़ा को करीब से जानते रहे हैं, उन्हें पता है कि फिल्म का ‘तेरे लिए’ गाना उन्हें इतना पसंद था कि उन्होंने इसे आखिरी सांस तक अपनी रिंगटोन बनाए रखा।

यश चोपड़ा इस फिल्म में गुजरे जमाने के संगीत का इस्तेमाल करना चाहते थे और इसके लिए उन्होंने अलग-अलग संगीतकारों के साथ लंबी बैठकें भी कीं लेकिन काम नहीं बना। संयोग की बात है कि उस समय यशराज फिल्म्स में बतौर सीईओ काम कर रहे मदन मोहन के बेटे संजीव कोहली ने यश जी से जिक्र किया कि उनके स्वर्गीय पिता कुछ बिल्कुल अनछुई धुनें छोड़ गए हैं और उनकी विरासत को घरवालों ने बहुत संभाल कर रखा है। यश चोपड़ा और आदित्य चोपड़ा ने उन धुनों को सुना और तुरंत फैसला कर लिया कि ‘वीर जारा’ में उस्ताद मदन मोहन का संगीत ही इस्तेमाल किया जाएगा।
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veer zara
अपनी पुस्तक ‘वीर जारा, द मेमॉयर्स ऑफ अ लव लीजेंड’ में संजीव कोहली लिखते हैं, “वीर-जारा मेरा सपना सच होने जैसा था, एक ऐसा सपना जिसके बारे में मैंने कभी सोचा नहीं था कि यह कभी हकीकत में बदलेगा। जब मेरे पिता संगीतकार स्वर्गीय मदन मोहन 1975 में गुजरे, तब उनकी उम्र मात्र 51 साल थी। जमाना उनको महान संगीतकार मानता था लेकिन बड़े बैनर, बड़े सितारों वाली फिल्में और लोकप्रिय अवॉर्ड उनकी झोली में कभी नहीं आए। दरअसल यह हकीकत उनके दिल में तीर की तरह चुभती रहती थी। उनके टेप सुरक्षित रख दिए गए थे हालांकि पिछले कुछ सालों से वे क्षतिग्रस्त होते जा रहे थे और तकनीकी विकास को देखते हुए वे जल्द ही बेकार हो जाते।“

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वीर जारा - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
वह आगे बताते हैं, “सन 2003 की बात है, एक दिन यश जी ने मुझसे कहा कि छह सालों के बाद उन्होंने कोई फिल्म निर्देशित करने का फैसला किया है, लेकिन यह एक ऐसी फिल्म है, जिसमें गुजरे जमाने के म्यूजिक की जरूरत पड़ेगी, एक ऐसा संगीत जो आजकल घुस आए पश्चिमी प्रभावों से पूरी तरह मुक्त हो। मेरे मुंह से सहज ही यह निकल गया कि मेरे पास गुजरे जमाने की मेलोडी वाले कुछ टेप पड़े हुए हैं, लेकिन उनको 28 सालों से मैंने नहीं सुना। इस सुझाव से वह उत्साहित नजर आए और उन्होंने काफी आश्चर्य जाहिर किया कि इससे पहले कभी मैंने इस बात का जिक्र नहीं किया था! उनके बेटे आदित्य चोपड़ा इस नई फिल्म की स्क्रिप्ट लिख रहे थे। आदि वर्तमान में जीने वाले व्यक्ति हैं और उन्हें कमर्शियल रूप से स्वीकार किए जाने वाले गानों की जरूरत थी। केवल यश जी और आदि को ही पता था कि उन्हें क्या चाहिए।“
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वीर जारा - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
चुनिंदा अनसुनी धुनें अपने कंपोज किए जाने के करीब 50 साल बाद रिकॉर्ड की गईं। ऐसा पहले कभी नहीं हुआ था और बिलबोर्ड मैगजीन ने इसके महत्व के बारे में विस्तार से लिखा। उस वक्त सॉन्ग ऑफ द इयर बन जाने वाला ‘तेरे लिए’ गीत की धुन 1975 की फिल्म ‘मौसम’ के गाने ‘दिल ढूंढ़ता है’ की एक किनारे रख दी गई धुन पर आधारित थी। 1981 में यश चोपड़ा की ‘सिलसिला’ से बतौर गीतकार अपना डेब्यू करने वाले जावेद अख्तर ने लगभग दो दशक बाद यश चोपड़ा के साथ दोबारा काम किया। उस वक्त लता मंगेशकर की उम्र 75 वर्ष हो चुकी थी लेकिन इन गीतों को लता की आवाज मिलना ही उचित और उपयुक्त था क्योंकि मूल रूप से मदन मोहन ने ये धुनें दशकों पहले अपनी पसंदीदा गायक लता मंगेशकर के लिए ही कंपोज की थीं।

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वीर जारा - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
संजीव बताते हैं कि गाने रिकॉर्ड होने में पूरे साल भर का वक्त लगा था। वह कहते हैं, “यश जी इस बात को लेकर एकदम स्पष्ट थे कि फीमेल सॉन्ग्स सिर्फ और सिर्फ लता जी ही गाएंगी। इस बात से मैं रोमांचित था क्योंकि मदन जी ने ये सारी धुनें लता जी के लिए ही बनाई थीं और अगर इनको लता जी ने नहीं गाया होता तो बात अधूरी रह जाती। लेकिन इसी के साथ-साथ मैं चिंतित भी था कि मदन जी के लिए 30 साल बाद गाना लता जी को बड़ा चैलेंजिंग लगेगा। उस वक्त उनकी सेहत भी अच्छी नहीं रहती थी और लोग उनके बारे में जजमेंट पास करने में अनफेयर हो सकते थे। लेकिन उन्होंने हिम्मत जुटाई और ऐसा गाया जैसा उनके अलावा दूसरा कोई गा ही नहीं सकता था।” जब फिल्म ‘वीर जारा ’ का संगीत हिट हुआ तो संजीव की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। वह बताते हैं, “वीर जारा की बदौलत मेरी हर कल्पना एक ही झटके में पूरी हो गई। शाहरुख खान, प्रीति जिंटा और रानी मुखर्जी इस फिल्म की स्टार कास्ट में शामिल थे। अमिताभ बच्चन और हेमा मालिनी इन धुनों पर एक बार फिर से नाचे और एक बार फिर उनके गाने चार्ट में लगभग पूरे साल टॉप पर रहे। आखिरकार मदन मोहन के संगीत ने कई लोकप्रिय पुरस्कार भी जीते।“
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वीर जारा - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
फिल्म ‘वीर जारा ’ की लोकप्रियता में इसके कलाकारों के अभिनय और संगीत के अलावा इसकी सिनेमैटोग्राफी ने भी किसी किरदार की तरह काम किया। फिल्म की 16वीं सालगिरह पर सिनेमैटोग्राफर अनिल मेहता इसे याद करते हुए कहते हैं, 'एक बेटे की ओर से अपने पिता के लिए इससे बेहतर ट्रिब्यूट कुछ नहीं हो सकता।' भारतीय सिनेमा की दो कालजीय रोमांटिक फिल्मों 'वीर-जारा' और 'जब तक है जान' में यश चोपड़ा के साथ काम करने वाले सिनेमैटोग्राफर अनिल मेहता बताते हैं कि किस तरह आदित्य चोपड़ा ने अपने पिता यश चोपड़ा के लिए ट्रिब्यूट के रूप में वीर-जारा की कहानी और पटकथा लिखी थी।

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अनिल मेहता - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
अनिल कहते हैं, “वीर-जारा में आदि और यश-जी ने जिस तरह साथ मिलकर काम किया, उसे देखकर तो मैं सचमुच हैरान हो गया था। दरअसल इस फिल्म का स्क्रीनप्ले आदि ने लिखा था। मेरे विचार से यह आदि की ओर से सबसे बेहतर ट्रिब्यूट था। मैं मानता हूं कि, इस फिल्म के सीन्स को यश जी के नजरिए से लिखने और उनकी भावनाओं को पर्दे पर उतारने का पूरा क्रेडिट आदि को जाता है। सेट पर भी, आदि ने हर जरूरी चीज को पूरा करने के लिए एक बड़े सपोर्ट सिस्टम की तरह काम किया।”

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वीर जारा - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
अनिल बताते हैं कि यश चोपड़ा के साथ क्रिएटिव तरीके से जुड़कर उन्हें काफी अच्छा लगा। इस बारे में बात करते हुए वह कहते हैं, "हम सब जानते हैं कि, जब आप यश चोपड़ा की फिल्म में काम करते हैं तो वहां सभी को बराबरी का दर्जा दिया जाता है, और सेट पर ऐसी क्वालिटी का होना बेहद मायने रखता है। इसलिए, चाहे बॉलीवुड का सबसे बड़ा स्टार हो या फिर कोई बड़ा डायरेक्टर हो, सेट पर काम शुरू होने के बाद सभी का दर्जा एक समान था और सभी ने इस फिल्म में जी-जान से अपना योगदान दिया और, और मैं आपको बता दूं कि फिल्म की कला निर्देशक शर्मिष्ठा रॉय ने भी वीर जारा के लुक में बहुत बड़े पैमाने पर योगदान दिया।”
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Veer Zara - फोटो : amar ujala mumbai
'वीर जारा' के हीरो शाहरुख खान हैं। अनिल बताते हैं कि कौन सी बात उन्हें रोमांस का किंग बनाती है और वह कैमरे के सामने इतने सहज तरीके से कैसे काम करते हैं। वह कहते हैं, "एक एक्टर के रूप में मैंने हमेशा शाहरुख को अद्वितीय माना है। मेरा मतलब है कि उनमें किसी भी चीज को एक पायदान ऊपर ले जाने की काबिलियत है। मुझे वीर जारा में अदालत में उनके द्वारा पढ़ी गई कविता का दृश्य याद है। उन्होंने बस चंद मिनटों शायद पांच या दस मिनटों के लिए उस कविता को पढ़ा। और फिर जब वह सेट पर आए तो मानो पूरी कविता उनके दिमाग में छप चुकी थी। उन्होंने हमारे लिए एक से ज्यादा बार इस सीन का टेक दिया और सच कहूं तो एक बार भी उनके इमोशन में कोई कमी नहीं आई। किसी भी एक्टर के लिए इस लेवल का कंट्रोल और अपने परफॉर्मेंस में इतनी बारीकी देखकर मुझे बड़ा ताज्जुब हुआ।” आज के बाइस्कोप में इतना ही, कल बात करेंगे एक और ओल्डी गोल्डी की..। सिलसिला जारी है।

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