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Mukesh Jasoos Review: मुस्कुराइए कि राहुल बग्गा की ये बेस्ट एक्टिंग है, चुस्त पटकथा का असली मजा

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मुकेश जासूस रिव्यू - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
वेब सीरीज रिव्यूमुकेश जासूस
लेखक: हीना डिसूजा, सजल कुमार, बिक्रमजीत सिंह व दिगांत व्यास
निर्देशक: हीना डिसूजा, दिगांत व्यास
कलाकार: राहुल बग्गा, परितोष त्रिपाठी, पूनम ढिल्लों, राजेश्वरी सचदेव, रुचि मालवीय व अनामिका शुक्ला।
ओटीटी: डिज्नी प्लस हॉटस्टार
रेटिंग: ***1/2

छोटी छोटी किस्तों में कही जा रही डिज्नी प्लस हॉटस्टार क्विक्स की कहानियां ट्रेलर देखने के बाद से ही अतरंगी जान पड़ती हैं। इनमें से वेब सीरीज 'मुकेश जासूस' इस वीकएंड पर आप जरूर देख लीजिए। मस्त सीरीज है। 10-12 मिनट के एपीसोड्स। सारे के सारे आप मुफ्त में बिना सब्सक्रिप्शन के भी देख सकते हैं। राहुल बग्गा और परितोष त्रिपाठी की कमाल एक्टिंग है। पूनम ढिल्लों दारू वाली आंटी के अवतार में हैं। साथ में है बढ़िया राइटिंग और उम्दा निर्देशन। सहायक कलाकारों ने भी बढ़िया काम किया है।
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मुकेश जासूस का दृश्य - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
वेब सीरीज 'मुकेश जासूस' इस सीजन का चौंकाने वाला खुलासा जैसी है। न कहीं कोई प्रचार। न ओटीटी की पीआर एजेंसी की तरफ से किसी का फोन। मुफ्त का चंदन ऐसे ही घिसे जाने के लिए नंदन में छोड़ा जा चुका है। गुरुवार को सलमान खान की फिल्म ‘राधे: योर मोस्ट वांटेड भाई’ देखने के बाद कुछ हल्का फुल्का देखने के लिए वेब सीरीज 'मुकेश जासूस' के पहले एपीसोड पर क्लिक किया तो बिना सातवें एपीसोड तक लगातार देखते जाने के हटने का मन नहीं किया। बिंज वॉच के दौरान अरसे बाद कोई सीरीज इतनी मनोरंजक लगी।
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मुकेश जासूस का दृश्य - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
'मुकेश जासूस' की असल स्टार इसकी पटकथा है। चार चतुर लोगों ने इसकी बुनावट चारों कोनों से ऐसी सटीक रखी है कि सिरहाना, पैताना सब दुरुस्त है। कास्टिंग भी बहुत कमाल की है। हर कलाकार ऐसे लगता है जैसे वही किरदार हो। अर्जुन के पिता का मुकेश के समने बुक्का फाड़कर रोना हो या फिर चाय की दुकान पर कॉफी लेकर आने वाला सहायक। सबने अपने अपने हिस्से का काम सौ फीसदी किया है। ऋषिकेश मुखर्जी की फिल्मों जैसी आगे बढ़ने वाली इसकी कहानी एक लाश के दफनाने से शुरू होती है और एक एलएलबी फेल वकील के जासूस बन जाने की हरकतों से आगे बढ़ती है।

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मुकेश जासूस का दृश्य - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
वेब सीरीज 'मुकेश जासूस' के दो सितारे हैं, राहुल बग्गा और परितोष त्रिपाठी। बिल्कुल ‘चुपके चुपके’ के परिमल और सुकुमार जैसे। राहुल का किरदार यहां इसलिए ज्यादा चुनौती भरा है क्योंकि मुकेश की चुनौतियां घर और बाहर दोनों जगह हैं। घर में उसकी बीवी उसके सामने ही किसी और में मगन है। बाहर उसको सब कुछ तुक्के पर ही सेट करना है। राहुल बग्गा ने यहां बेहतरीन अभिनय किया है। वह राजकुमार राव और आयुष्मान खुराना की लीग के कलाकार हैं, हिंदी सिनेमा के दिग्गजों की नजर इस सीरीज पर जरूर पड़नी चाहिए नहीं तो वे एक बेहतरीन अभिनेता खो देंगे।
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मुकेश जासूस का दृश्य - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
मुकेश के दोस्त के किरदार में परितोष त्रिपाठी ने भी सीरीज में जान डाल दी है। उनकी मुख मुद्राएं दर्शकों को बरबस हंसाती है। ये परितोष का ही किरदार है जो राहुल बग्गा को मुकेश जासूस बनाने में पूरी मदद करता है। सोशल इन्फलुएंसर बनी रुचि मालवीय की कोशिशें अच्छी हैं। सातवें एपीसोड में दिखीं अनामिका शुक्ला भी अपना असर छोड़ने में कामयाब रहीं। कास्टिंग डायरेक्टर से फिल्म डायरेक्टर बन चुके मुकेश छाबड़ा को पुलिस इंस्पेक्टर के रोल देखना सरप्राइज जैसा रहा। एक्टिंग मुकेश ने भी बेहतरीन की है। राजेश्वरी सचदेव जरूर अपने किरदार में मिसफिट हैं।
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मुकेश जासूस का दृश्य - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
कथा, पटकथा, निर्देशन और अभिनय में बेहतरीन वेब सीरीज 'मुकेश जासूस' के संवाद थोड़ा और चुटीले होते तो ये वेब सीरीज ‘पंचायत’ से आगे निकल सकती थी। वहां भारतीय ग्राम्य जीवन का बिना मिलावट वाला दर्शन था। यहां मुंबई का असली चेहरा है जो ऊंची ऊंची इमारतों में काम करने वालों की सांसों से बसता है। झोपड़पट्टियों की ये बिल्कुल असली सी जिंदगी की कहानी कहती वेब सीरीज 'मुकेश जासूस' कहीं कहीं ‘जाने भी दो यारों’ के सुधीर और विनोद की भी याद दिलाती रहती है।
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मुकेश जासूस का पोस्टर - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
सीरीज के ओपनिंग क्रेडिट्स अच्छे से गढ़े गए हैं। सीरीज में ऐसी ही क्रिएटिविटी इसके कैमरामैन को भी दिखानी चाहिए थी। एडीटिंग चुस्त है लेकिन बैकग्राउंड म्यूजिक में ताजगी की कमी है। तकनीकी तौर पर फिल्म थोड़ा और बेहतर हो सकती थी। लेकिन फिर भी ऐसे कठिन समय में चेहरे पर मुस्कान ला देना ही बहुत बड़ी जीत है।
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