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Movie review: भीतर तक झकझोरती है द ताशकंद फाइल्स

Fri, 12 Apr 2019 10:55 AM IST
anand anand मुंबई डेस्क, अमर उजाला
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Tashkent Files - फोटो : social media
मूवी रिव्यू: द ताशकंद फाइल्स
कलाकार: श्वेता बसु प्रसाद, मिथुन चक्रवर्ती,नसीरुद्दीन शाह, पल्लवी जोशी, राजेश शर्मा, पंकज त्रिपाठी, मंदिरा बेदी आदि।
निर्देशक: विवेक रंजन अग्निहोत्री
रेटिंग: ***  


देश के सबसे विवादास्पद विषयों पर आधारित है यह फिल्म। विवेक अग्निहोत्री की यह कोशिश काफी हद तक आपको अपने इतिहास के पन्ने पलटने के लिए मजबूर कर देगी। यह फिल्म आपको कहीं कहीं समय से आगे भागते हुए दिखाई पड़ती है, तो कभी इतनी धीमी गति से चलती है कि आम आदमी के लिए इसे समझना मुश्किल हो सकता है। 
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Tashkent Files - फोटो : instagram
फिल्म भारत के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की रहस्यमय मृत्यु का किस्सा दोबारा देश के सामने रखती है। यह फिल्म आज के समय में दर्शायी गई है। फिल्म एक महत्त्वाकांक्षी पत्रकार रागिनी फुले के इर्द गिर्द घूमती है, जो एक खास न्यूज़ स्कूप के इंतज़ार में है। उसके हाथ कहीं से ताशकंद फाल्स लग जाती हैं, जिसमें लाल बहादुर शास्त्री की रहस्यमय मृत्यु का सच लिखा होता है।

वह उन तथ्यों को पढ़कर अखबारों में छपवा देती है। जिसके चलते सरकार को लाल बहादुर शास्त्री जी की मृत्यु का केस दोबारा खोलना पड़ता है। धीरे धीरे कहानी शास्त्री जी की मौत के बाद हुए भारत के संविधान और सरकार में बदलाव के रास्ते पर चलकर सच ढूंढने की कोशिश करती है।
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the Tashkent files - फोटो : amar ujala mumbai
फिल्म में रागिनी फुले का किरदार श्वेता बसु प्रसाद ने अदा किया है।  10 साल की उम्र में ही अपनी राष्ट्रीय पुरस्कार जीत चुकी श्वेता की फिल्म के जरिए दमदार वापसी हुई है।  शास्त्री जी की मृत्यु से परदा हटाने के लिए नियुक्त की गई सरकारी समिति में मिथुन चक्रवर्ती, नसीरुद्दीन शाह, पल्लवी जोशी, पंकज त्रिपाठी, मंदिरा बेदी, राजेश शर्मा हैं।

सभी के उम्दा प्रदर्शन ने फिल्म में जान डाली है। मंदिरा बेदी ने भी काफी अच्छी एक्टिंग दिखाई है। मिथुन चक्रवर्ती और नसीरुद्दीन शाह  इन सभी पर एक्टिंग में भारी हैं। जासूस के किरदार में विनय पाठक कहानी की अहम कड़ी बनते हैं। पंकज त्रिपाठी तो हैं ही सबसे अलग।

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the Tashkent files - फोटो : amar ujala mumbai
फिल्म का डायरेक्शन सराहनीय है। आधे से ज्यादा समय एक छोटे से सरकारी दफ्तर में शूट हुई यह फिल्म आपको अपने नाखून चबाने के लिए मजबूर करदेगी। लेकिन निर्देशक विवेक अग्निहोत्री ने जो दर्शाने की कोशिश वह शायद सभी को काफी हद तक पता है।

फिल्म की कहानी को पुख्ता करने के लिए कई तरह के रशियन स्पाई एजेंसी यानी केजीबी के पुराने दस्तावेजों का प्रयोग किया गया है। फिल्म का बैकग्राउंड म्यूजिक सही है, वह कहानी में असली रोमांच लेकर आता है।
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the Tashkent files - फोटो : amar ujala mumbai
एडिटिंग और फिल्म की कहानी में जल्दबाजी दिखाई देती है। देश के अहम सामाजिक मुद्दों पर जो उंगली विवेक अग्नीहोत्री ने उठाने की कोशिश की है वह ढीले धागे में बंधी है। जिन दस्तावेज़ों का फिल्म में प्रयोग किया गया है, उसी पर आखिर में कहा जाता है कि यह सभी दस्तावेज पुख्ता तौर पर नहीं माने जा सकते। जिसके बाद विवेक की यह फिल्म दर्शकों को वहीं वापस लाकर खड़ा करदेती है, जहां से फिल्म की शुरूआत हुई। अमर उजाला के वीकली रिव्यू में इस फिल्म को मिलते हैं 3 स्टार। 
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