महारानी
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जमा नहीं ‘रानी’ से ‘महारानी’ का सफर
‘महारानी’ की कहानी बिहार के मुख्यमंत्री रहे लालू प्रसाद यादव और उनकी पत्नी राबड़ी देवी की लोकप्रियता से खाद पाती है। बीज इस कहानी का बिहार में ही है लेकिन सुभाष इस पौधे को बरगद नहीं बनने देते। वह इसकी पत्तियां, कलियां, कोपलें लगातार काटते रहते हैं और 10वें एपीसोड के आखिर तक ये पौधा सिर्फ बोंजाई ही बन पाता है। भीमा का असहाय होने पर अपनी पत्नी को मुख्यमंत्री बनाना समझ आता है। लेकिन, रानी की महारानी बनने की जो रफ्तार है, वह हजम होना मुश्किल है। गाय, गोबर और गोरी का ये सम्मिश्रण मुंबइया पब्लिक की आंखों पर तो ‘हिंदी हार्टलैंड’ का पर्दा डाल सकती है, लेकिन ये वेब सीरीज है 500 रुपये की टिकट वाला सिनेमा नहीं। हुमा कुरैशी ने अपने अभिनय में पूरी जान लगा दी है रानी से महारानी बनने में। लेकिन, उनका किरदार करीने से लिखा नहीं गया है। इस किरदार में थोड़ा और मां का आंचल, थोड़ा और पत्नी का कलेजा मिलना रह गया है।