हिंदी सिनेमा के सबसे मशहूर लेखकों में शुमार रहे सलीम-जावेद ने शुरू में तमाम ओरीजनल आइडियाज पर काम किया। खूब सारी कहानियां लिखीं जिनके तार किन्हीं दूसरी फिल्मों से नहीं टकराते थे। लेकिन, बाद में उन्हें लगा कि शायद हिंदी सिनेमा को ओरीजनल कहानी पच नहीं पाती है। तो उन्होंने ऐसी कहानियों पर फिल्में लिखनी शुरू कीं जिनके बीज तो पहले से ही सिनेमा में बोए जा चुके थे, लेकिन जिनके समीकरणों का नए जमाने को जमने वाला विस्तार कम लेखक ही सोच पाए। राजेश खन्ना से लेकर अमिताभ बच्चन से होते हुए सलीम-जावेद की जो कहानी अनिल कपूर तक आई, उसमें खासियत अनिल कपूर की ये रही कि उन्होंने अमिताभ बच्चन के लिए लिखे गए एक रोल को परदे पर यूं करके दिखा दिया कि कहीं से लगा ही नहीं कि ये रोल अनिल कपूर के लिए नहीं लिखा गया था।
रिलीज के 34 साल पूरे
अनिल कपूर और श्रीदेवी दोनों के करियर में मील का पत्थर मानी जाने वाली फिल्म ‘मि. इंडिया’ की आज मैं बात कर रहा हूं जो 29 मई 1987 को रिलीज हुई। मुंबई के मराठा थिएटर में इसे देखने के लिए लोगों का रेला उमड़ पड़ा था और मुंबई के फिल्म समीक्षक जब कोलाबा के स्ट्रैंड थिएटर में इसका फर्स्ट डे, फर्स्ट शो देखकर निकले तो फिल्म के हिट होने का एलान हो चुका था।
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'मिस्टर इंडिया'
- फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
अमिताभ के लिए लिखी गई फिल्म
ये तो आपको पता ही होगा कि अमिताभ बच्चन को फिल्म ‘शोले’ दिलाने में सलीम खान का बड़ा हाथ रहा है। पूरे हॉल में अकेले बैठे रमेश सिप्पी के लिए फिल्म ‘ज़ंजीर’ का शो सलीम खान ने अपने पैसे से किया था। फिर, मनमोहन देसाई से अमिताभ बच्चन की पहली मुलाकात भी सलीम खान ने वैसे ही कराई जैसे चंद्रा बारोट ने उनकी मुलाकात मनोज कुमार से कराई थी। ये सारी शुरूआती मुलाकातें तुरंत किसी फैसले में भले न तब्दील हो सकी हों लेकिन ये सारी मुलाकातें आगे चलकर अमिताभ बच्चन के लिए तमाम हिट फिल्में लेकर आईं। हिंदी सिनेमा पैसों का खेल है। रिश्ते यहां हर रोज बदलते हैं। सलीम-जावेद को ये गुमान हो गया था कि वह बड़े लेखक हैं। सारे सितारे उनकी फिल्मों का हिस्सा बनने के लिए लालायित रहते हैं तो क्यों न खुद ही फिल्म प्रोड्यूसर बना जाए।
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'मिस्टर इंडिया'
- फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
अमिताभ ने नहीं घटाई फीस
बतौर प्रोड्यूसर जो पहली फिल्म सलीम-जावेद बनाना चाहते थे, वह थी फिल्म ‘मि. इंडिया’। हीरो अमिताभ बच्चन। दोनों ये भी चाहते थे कि अमिताभ इसके लिए अपनी फीस भी कम कर दें। लेकिन, ये उन दिनों की बात है जब अमिताभ के बही खाते अजिताभ की निगरानी में थे। उन्होंने फीस कम करने से मना कर दिया और बताते हैं कि अमिताभ ने कह दिया, ‘लोग थिएटर में मेरी शक्ल देखने आते हैं और जिस फिल्म में मैं दिखूंगा ही नहीं, उसमें मेरे होने न होने से क्या फर्क पड़ता है।’
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बोनी कपूर, अनिल कपूर, श्रीदेवी
- फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
सलीम-जावेद में यहां से पड़ी दरार
बात सलीम खान को चुभ गई। जावेद अख्तर को अलग ले जाकर उन्होंने बात की। बताते हैं कि दोनों ने मिलकर ये तय किया कि अब कभी अमिताभ बच्चन के साथ काम नहीं करेंगे। लेकिन, बात तब बिगड़ी जब जावेद अख्तर अगली मर्तबा अमिताभ बच्चन के सामने पड़े और उन्होंने पूरी बात का ठीकरा सलीम खान के सिर फोड़ दिया। जावेद अख्तर का इससे पहले राजेश खन्ना से पंगा हो चुका था और अमिताभ बच्चन के ना कहने पर जावेद अख्तर ने फिल्म ‘मि. इंडिया’ के लिए राजेश खन्ना के साथ लंबी बैठकी भी की। उनसे अपनी पिछली बार की गलती की माफी भी मांगी पर राजेश खन्ना नहीं माने। फिल्म जगत में राजेश खन्ना और जावेद अख्तर की इस बैठक की खूब चर्चा रही और किशोर कुमार ने फिल्म के तमाम गाने तो इसी भ्रम में रिकॉर्ड कर दिए कि फिल्म के हीरो राजेश खन्ना ही हैं। खैर, अमिताभ बच्चन और राजेश खन्ना के इंकार के बाद फिल्म के हीरो अनिल कपूर बने। अनिल कपूर और श्रीदेवी को लेकर उन दिनों फिल्म निर्देशक बापू एक फिल्म शुरू करने जा रहे थे। बोनी की तब तक बापू से अच्छी ट्यूनिंग हो चुकी थी। बापू को भी बोनी में एक समझदार निर्माता समझ आने लगा था। बोनी की बतौर प्रोड्यूसर पहली फिल्म ‘हम पांच’ के निर्देशक भी बापू ही थे। अनिल और श्रीदेवी की बापू की फिल्म की तारीखें खाली कराकर बोनी ने फिल्म ‘मि. इंडिया’ शुरू की।
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शेखर कपूर और 'हवा हवाई' के रूप में श्रीदेवी
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बोनी कपूर ने चुना शेखर को
फिल्म ‘मि. इंडिया’ में अनिल कपूर और श्रीदेवी का आना भले इत्तेफाक रहा हो पर इसके निर्देशक शेखर कपूर को इस फिल्म में बोनी कपूर खुद लेकर आए। बोनी ने शेखर कपूर की पहली फिल्म ‘मासूम’ का नरेशन सुना था। और, वह इस नए निर्देशक से प्रभावित भी बहुत थे। बोनी एक बार शबाना आजमी के साथ शेखर कपूर से मिलने गए थे और वहीं बच्चों की एक फिल्म के लिए शेखर को 10 हजार रुपये का चेक देकर साइन कर आए थे। शेखर कपूर अतरंगी किस्म के फिल्मकार हैं। देव आनंद के वह भांजे हैं और तमाम फिल्मी दिग्गजों के साथ उनका उठना बैठना रहा।
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'मिस्टर इंडिया' फिल्म का एक दृश्य
- फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
मि.इंडिया के बाद छोड़ दी मुंबई
अपनी पहली ही फिल्म ‘मासूम’ से शेखर कपूर को देश दुनिया में खूब शोहरत मिली और दूसरी फिल्म ‘मि. इंडिया’ के पूरी होते होते उन्होंने हॉलीवुड में बढ़िया सेटिंग कर ली। मामला उनका वहा जमा तो वह तमाम हिंदी फिल्में अधूरी छोड़कर ही मुंबई से चले गए थे। अभिनेता सतीश कौशिक ने फिल्म ‘मि. इंडिया’ में कैलेंडर का अद्भुत रोल तो किया ही है, वह इस फिल्म के एसोसिएट डायरेक्टर भी हैं। सतीश कौशिक ने ही शेखर कपूर के चले जाने के बाद उनकी शुरू की हुई दो फिल्में ‘रूप की रानी चोरों का राजा’ और ‘प्रेम’ पूरी की थीं। देओल के करियर की पहली फिल्म ‘बरसात’ भी पहले शेखर कपूर ही निर्देशित कर रहे थे। आमिर खान और प्रीति जिंटा को लेकर शेखर कपूर ने एक फिल्म ‘टाइम मशीन’ भी शुरू की थी।
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'काटे नहीं कटते' गाने में श्रीदेवी और अनिल कपूर
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सदी का सबसे मादक गाना
खैर, हम लौटते हैं अपनी आज के बाइस्कोप की फिल्म ‘मि. इंडिया’ की तरफ। बोनी कपूर की श्रीदेवी के साथ ये पहली फिल्म थी और इसी फिल्म के दौरान दोनों के बीच जो रिश्ता पनपा, वह आगे चलकर पति पत्नी के रिश्ते में तब्दील हो गया। फिल्म ‘मि. इंडिया’ का गाना ‘काटे नहीं कटते ये दिन ये रात...’ श्रीदेवी के करियर का सबसे कामुक गाना माना जाता है। मैं इसे हिंदी सिनेमा के लिए बने गानों में सदी का सबसे मादक गाना मानता हूं। सरोज खान ने इस गाने में श्रीदेवी को बिल्कुल किसी अप्सरा की तरह पेश किया है। लेकिन, कम लोगों की पता होगा कि ये गाना दरअसल खुद बोनी कपूर की कल्पना से निकला है। श्रीदेवी को दक्षिण भारत के तमाम फिल्म निर्देशकों ने परदे पर एक से बढ़कर एक ग्लैमरस किरदारों में पेश किया है। लेकिन, बोनी ने जब फिरोज खान की फिल्म ‘जांबाज’ देखी तो उनके होश ही उड़ गए। उन्हें यकीन ही नहीं हुआ कि श्रीदेवी साड़ी में इतनी खूबसूरत दिख सकती हैं। उन्होंने शेखर कपूर को बस इतना ही कहा कि श्रीदेवी को इस गाने में इतना मादक, मोहक और आकर्षक दिखना चाहिए कि उसके बाद सारे गाने फेल हो जाएं। शेखर कपूर ने वही किया।
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'मोगैंबो' के किरदार में अमरीश पुरी
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शेखर को पसंद नहीं आया ’मोगैंबो खुश हुआ!’
वैसे शेखर कपूर को हिंदी सिनेमा की चंद मशहूर लाइनों में शुमार हो चुके फिल्म के संवाद ‘मोगैंबो खुश हुआ’ को लेकर फिल्म के रिलीज के दिन तक एतराज रहा। उनका बस चलता तो वह फिल्म में एक दो जगह को छोड़कर ये लाइन सब जगह से एडीटिंग के दौरान उड़ा ही देते। वैसे मोगैंबो के रोल के लिए अनुपम खेर ने भी ऑडीशन दिया था, लेकिन शेखर को उनके व्यक्तित्व में आतंक कम हास्य ज्यादा नजर आया। आखिर में ये रोल अमरीश पुरी को मिला। फिल्म ‘मि. इंडिया’ की कहानी बहुत साधारण सी है। अशोक कुमार की 1957 में रिलीज हुई फिल्म ‘मि. एक्स’ जैसी ही है। अशोक कुमार ने इस फिल्म में एक ऐसे शख्स का किरदार निभाया था जो दिखाई नहीं देता।फिल्म ‘मि. इंडिया’ में वह इस साइंटिस्ट के दोस्त बने हैं जो ये फॉर्मूला खोज लेता है। अनिल कपूर ने उसी साइंटिस्ट के बेटे का रोल किया है जो अनाथ बच्चों की देख रेख करता है। कहानी का ये एंगल फिल्म ‘ब्रह्मचारी’ से लिया गया है। मतलब कि फिल्म ‘मि. एक्स’ और फिल्म ‘ब्रह्मचारी’ का कॉकटेल है फिल्म ‘मि. इंडिया’ की कहानी।
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श्रीदेवी और अनिल कपूर
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हीरोइन को मिली सबसे मोटी फीस
फिल्म में काम करने के लिए तब अमरीश पुरी को 10 लाख रुपये मिले थे और जब इतने ही रुपये श्रीदेवी की मां ने अपनी बेटी को ये फिल्म करने देने की फीस के तौर पर मांगे तो बोनी कपूर ने लाख रुपये और बढ़ाकर श्रीदेवी को 11 लाख रुपये फिल्म ‘मि. इंडिया’ में काम करने के लिए दिए थे। ये हिंदी सिनेमा में किसी हीरोइन को उस वक्त तक मिली सबसे बड़ी फीस थी। फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर कमाई भी खूब की, उस साल कमाई के मामले में ये फिल्म धर्मेंद्र की फिल्म ‘हुकूमत’ के बाद नंबर दो पर रही थी। धर्मेंद्र की उन दिनों हिंदी सिनेमा में तूती बोलती थी और फिल्म ‘मि. इंडिया’ के गाने ‘हवा हवाई’ को चैरिटी शो ‘होप 86’ में परफॉर्म किए जाने पर वह आग बबूला भी हो गए थे। लेकिन, ये भी सच है कि फिल्म ‘मि. इंडिया’ के संगीत ने उस साल बिक्री का नया रिकॉर्ड बना दिया था। फिल्म के गाने सुपरहिट रहे थे और जावेद अख्तर के लिखे व लक्ष्मीकांत प्यारेलाल के संगीतबद्ध गानों ने उस साल खूब धूम मचाई थी। फिल्मफेयर अवार्ड्स उस साल भी नहीं हुए थे लेकिन फिल्म ने हर तरफ फिर भी धूम मचाई थी। श्रीदेवी का तो नाम ही उन दिनों मिस हवा हवाई पड़ गया था।
'मिस्टर इंडिया' का एक दृश्य
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चलते चलते...
फिल्म ‘मि. इंडिया’ की लोकप्रियता का ही कमाल था कि इसके रीमेक बाद में तमिल और कन्नड़ में भी बने। बोनी कपूर और सलमान खान के जब रिश्ते अच्छे थे तो दोनों ने मिलकर फिल्म ‘मि. इंडिया’ का सीक्वेल बनाने की भी योजना बनाई थी। फिल्म में सलमान खान पहली बार अपने करियर में निगेटिव रोल करने जा रहे थे। ये बात साल 2008 की है। फिल्म में श्रीदेवी और अनिल कपूर अपने अपने किरदार ही करने वाले थे। बोनी ने फिल्म के म्यूजिक पर काम तक शुरू करा दिया था और इसके लिए ए आऱ रहमान को साइन तक कर लिया था। हॉलीवुड के तमाम उम्दा तकनीशियनों की मदद से बनने वाली इस थ्रीडी फिल्म पर बाद में काम ठप हो गया।
(‘बाइस्कोप’ कॉलम में प्रकाशित यह आलेख बौद्धिक संपदा अधिकारों के तहत संरक्षित हैं।)