क्या कहना
- फोटो : अमर उजाला, मुंबई
हिंदी सिनेमा की कालजयी फिल्म जाने भी दो यारों निर्देशित करने वाले कुंदन शाह ने वैसे तो फिल्मों और टेलीविजन में तमाम कमाल किए हैं। लेकिन, फिल्म क्या कहना उनका सबसे बड़ा कमाल रहा। कमाल ये कि तमाम मुश्किलों के बावजूद ये फिल्म वह पूरी कर सके। और, उससे बड़ा कमाल ये कि जिस फिल्म को उसके निर्माताओं ने ही नकार दिया था, वह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर हिट हो गई। फिल्म में मजरूह सुल्तानपुरी के लिखे गानों और राजेश रोशन के संगीत का असर ये रहा कि इसका म्यूजिक उस साल यानी साल 2000 में बिके फिल्म म्यूजिक के टॉप 10 में शामिल रहा। और अपनी रिलीज के 20 साल पूरे कर रही फिल्म प्रीति जिंटा की इस फिल्म के नाम ही ये भी कमाल हमेशा रहेगा कि इस फिल्म के निर्माता चाहकर भी इसके हीरो चंद्रचूड़ सिंह को बीच फिल्म से निकाल नहीं पाए। और, वो तब जब कि चंद्रचूड़ सिंह की जगह काम करने को जो हीरो तैयार हुआ था वो कोई और नहीं बल्कि थे, सलमान खान।
कुंदन शाह ने क्लासिक फिल्म जाने भी दो यारों बनाने के बाद अपने असिस्टेंट रहे विधु विनोद चोपड़ा के लिए उनकी पहली फिल्म खामोश लिखी और उसके बाद टीवी पर नुक्कड़ और वागले की दुनिया बसाने में व्यस्त हो गए। शाहरुख खान के करियर की तमाम खास फिल्मों में गिनी जाने वाली फिल्म कभी हां कभी ना निर्देशित करने के बाद उन्होंने शुरू की थी, क्या कहना। क्या कहना की कहानी हनी ईरानी की लिखी है। हनी ईरानी ने जावेद अख्तर से अलग होने के बाद ही अपनी पहले की लिखी कहानियों को सीरियसली लेना शुरू किया। यशराज फिल्म्स के लिए लगातार चार फिल्में लम्हे, परंपरा, आईना और डर लिखने के बाद हनी ईरानी ने फिल्म दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगी की कहानी की क्रेडिट्स में अपना नाम न दिए जाने से नाराज होकर यश चोपड़ा के साथ काम करना बंद कर दिया था।