निर्माताः गुनीत मोंगा
निर्देशकः अमित कुमार
सितारेः विजय वर्मा, नवाजुद्दीन सिद्दिकी, नीरज कबी, गीतांजलि
रेटिंग ***
जिंदगी में एक सही रास्ता होता है और दूसरा गलत रास्ता। एक तीसरा रास्ता भी होता है... फिल्मीवाला! जिदंगी के रास्ते अक्सर साफ दिखाई देते हैं लेकिन कभी हालात इतने जटिल होते हैं कि क्या सही और क्या गलत तय करना कठिन होता है। मुश्किल तब और बढ़ती है जब चुनाव के लिए वक्त कुछ पल का हो। मॉनसून शूटआउट ऐसे ही पल दो पल की कहानी है। जिसमें युवा पुलिस अफसर आदि (विजय वर्मा) के सामने भरी बरसात में पेशेवर हत्यारा शिवा (नवाजुद्दीन सिद्दिकी) खड़ा है।
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nawazuddin
- फोटो : nawazuddin
आदि को उसे शूट करने का ऑर्डर है लेकिन वह सोच में पड़ जाता है कि क्या शिवा को जिंदा भी पकड़ा जा सकता है? वह द्वंद्व में है कि उसने शिवा को गोली मारी तो जिंदगी क्या मोड़ ले सकती है और गोली नहीं मारी तो क्या हो सकता है?
तीसरी परिस्थिति भी उसके जहन में है। क्या करे आदि? यहां सवाल सिर्फ जिंदगी, करिअर और प्रेम का नहीं है। वह शिवा की जिंदगी, परिवार और उसके बच्चे के बारे में सोचता है। एक पल के फैसले से चीजें बन सकती हैं, बिगड़ सकती हैं।
निर्देशक अमित कुमार की यह डेब्यू फिल्म है जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी सराही गई है। हालांकि इसका तना-बाना जटिल है लेकिन घटनाओं और कहने के अंदाज में पारदर्शिता है।
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Monsoon Shootout
फिल्म में एक कहानी की अलग-अलग परतें हैं। यूं हो तो क्या हो और यूं न हो तो क्या हो? फिल्म कहीं बोर नहीं होने देती। सही-गलत को नापती-तौलती बढ़ती है और चौंकाता हुआ अंत आपकी सोच में गोली-सा धंस जाता है।
विजय वर्मा इस फिल्म की खोज कहे जा सकते हैं। युवा पुलिस अफसर के रूप में उनमें कई दृश्यों में अर्द्ध सत्य के ओम पुरी की छवि नजर आती है। उनका अभिनय सहज और असरकारी है। नवाजुद्दीन शातिर अपराधी की भूमिका में हमेशा ही अच्छे लगे हैं। गैंग्स ऑफ वासेपुर हो या रमन राघव 2.0। उनकी आखें बोलती हैं।
मॉनसून शूटआउट उन्हें पसंद आएगी जो सिनेमा में बौद्धिक प्रयोग पसंद करते हैं। अमित कुमार की कहानी और निर्देशन पर पकड़ है। यहां अपराधी-पुलिस वाला हाई वोल्टेज ड्रामा नहीं है। अमित ने ट्रीटमेंट में इसे सच्चाई के करीब रखा। कैमरे और कलाकारों का उन्हें अच्छा सहयोग मिला।
नीरज कबी और गीतांजलि का अभिनय भी अच्छा है। मुंबई की अपराध कथाएं भले ही आप कई फिल्मों में देख चुके हैं लेकिन अमित की फिल्म का स्वाद और अनुभव जरा अलग है। मुंबई की अपराध कथाएं भले ही आप पहले भी कई फिल्मों में देख चुके हैं लेकिन अमित की फिल्म का स्वाद और अनुभव जरा अलग है। यह ठंड का मौसम है लेकिन इसमें मानसून की यह कहानी अपने रोमांच से कुछ गर्मी पैदा करती है।