फिल्म- कार्गो
- फोटो : अमर उजाला, मुंबई
फिल्म ‘कार्गो’ अपने बनने के समय से चर्चा में रही फिल्म है। लंबा समय गुजर गया तबसे। फिल्म को तमाम लोगों ने पहले भी देखा, इसकी चाय पर चर्चाएं भी हुईं। लेकिन, कुछ अपने नाम के चलते और कुछ अपनी कहानी के चलते, ये फिल्म आम दर्शकों में उत्सुकता जगा नहीं पाई। फिर पिछले हफ्ते सोनी लिव ने एक बेहतरीन फिल्म को चार टुकड़ों में काटकर रिलीज किया तो ये समझ आया कि ओटीटी के दिग्गजों को भी हिंदी सिनेमा के दर्शकों की नब्ज समझ आती ही हो, तय नहीं है। ‘कार्गो’ उससे कहीं कमतर कहानी है। दोनों साइंस फिक्शन हैं, लेकिन दोनों में कहानी कहने का तरीका ही दोनों का असली अंतर है।