फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बाइस्कोप: इस फिल्म की फोटो ने दिलाई अमरीश पुरी को स्पीलबर्ग की फिल्म, आवाज से घबरा गए थे गांव के लोग

विज्ञापन
1 of 7
गहराई - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
तो चलिए आज का बाइस्कोप एक सवाल से शुरू करते हैं। कोरोना संक्रमण काल के दौरान 23 अप्रैल 2020 से शुरू हुए बाइस्कोप के इस पहले सीजन को सवा सौ से ज्यादा दिन हो चुके हैं। और, सवाल आज का ये है कि पुणे फिल्म इंस्टीट्यूट से एडिटिंग का गोल्ड मेडल लेकर निकलने वाली हिंदी फिल्म इंडस्ट्री की पहली प्रशिक्षित महिला तकनीशियन कौन हैं? नहीं याद आया, चलिए एक हिंट देते हैं। इस महिला ने आगे चलकर चार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीते और अब भी 74 साल की उम्र में सिनेमा के अलावा दूसरा कुछ सोचती नहीं है। पिछले साल उन्होंने प्रियंका चोपड़ा के प्रोडक्शन हाउस पर्पल पेबल पिक्चर्स के लिए सुलगती हुई फिल्म ‘फायरब्रांड’ बनाई जिसमें एक और नेशनल अवॉर्ड कलाकार लीड रोल में थीं, उषा जाधव। अब तो आप पहचान ही गए। जी हां, मैं अरुणा राजे की बात कर रहा हूं। बुधवार की शाम इवनिंग वॉक पर उन्हें फोन किया तो वैसी ही खनकती आवाज। वैसी ही आवाज में अब भी बच्चों सा कौतूहल। और, वैसी ही ऊर्जा। बोलीं, ‘सिनेमा और जीवन के बीच बनने वाले सेतु पर कुछ काम कर रही हूं। कोरोना खत्म होने दो, जल्दी बुलाती हूं सब कुछ बताने दिखाने को।’ इन्हीं अरुणा राजे की फिल्म ‘गहराई’ हमारे आज के बाइस्कोप की फिल्म है। फिल्म की रिलीज को बुधवार को 40 साल पूरे हो गए।

बाइस्कोप: उर्मिला से पहले इन हीरोइनों को ऑफर हुई ‘रंगीला’, आमिर ने इस बार किया शाहरुख का ठुकराया रोल
विज्ञापन

2 of 7
गहराई - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
‘एक्जॉरसिस्ट’ के बाद का सिनेमा
हिंदी सिनेमा में पारलौकिक विषयों पर बनी फिल्मों में ‘गहराई’ का नाम बहुत ही सम्मान से लिया जाता है। दुनिया भर में उन दिनों ‘द एक्जॉरसिस्ट’ का हल्ला था और किसी को यकीन भी नहीं हो पाया कि अरुणा राजे और विकास देसाई की जोड़ी विनोद खन्ना और शबाना आजमी के साथ ‘शक’ जैसी अवॉर्ड विनिंग फिल्म बनाने के बाद सीधे ‘गहराई’ बनाएगी। फिल्म में श्रीराम लागू, अनंत नाग और अमरीश पुरी के अलावा 14 साल की पद्मिनी कोल्हापुरे भी हैं। पारलौकिक शक्तियों का केंद्र वही है। अरुणा राजे से कहा कि ये फिल्म आज भी शुरू से आखिर तक देखने की इच्छा बार बार बनाए रखती है। तो वह कहती हैं, ‘हां, मुझे लगता है कि किसी फिल्म को बार बार देखने से हर बार उसे देखने का नजरिया भी बदलता रहता है। मैंने तो बहुत ही सीधी सादी कहानी लेकर एक फिल्म बनाई थी। लेकिन देखने वालों ने उसे दूसरे नजरिए से भी देखा। कहीं किसी ने इसे विकास में पर्यावरण की अनदेखी से भी जोड़कर देखा कि किसान का सम्मान न करने के चलते ही साइंस में यकीन रखने वाले एक शख्स के साथ ये सब हुआ। लेकिन, सच पूछें तो फिल्म बनाते समय ऐसा कुछ मैंने सोचा नहीं था।’

Aaj Ki Awaz का बाइस्कोप: यहां देखिए राज बब्बर और स्मिता पाटिल की असली प्रेम कहानी, कैमरे की जुबानी
विज्ञापन

3 of 7
गहराई - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
सिनेमा की पहली प्रशिक्षित तकनीशियन
फिल्म ‘गहराई’ पर आगे बढ़ने से पहले थोड़ी राम कहानी अरुणा राजे की भी आपको बताते चलते हैं। वह हिम्मती महिला हैं। प्रयोगधर्मी वीडियो संपादक हैं। विषय को सिर के बल खड़ा कर देने वालीं निर्देशक हैं और एक बहुत ही विचारवान, सहज, सरल और सुलभ फिल्मकार हैं। जीवन के 74 बरसों ने अरुणा को बहुत रुलाया भी है और बहुत हंसाया भी। पुणे फिल्म इंस्टीट्यूट से निकलने से पहले उन्हें विकास देसाई नामक पुरुष से उन्हें प्यार हुआ और जिस दिन उनकी बेटी गार्गी का निधन हुआ, उसके 24 घंटे बाद ही विकास ने उनके सामने तलाक का प्रस्ताव रख दिया। इससे पहले अरुणा ने अपनी बेटी गार्गी को हुए बोन कैंसर के इलाज के लिए कहां कहां चक्कर नहीं लगाए। अमेरिका तक हो आईं वह, पर बेटी को बचा नहीं सकीं। गार्गी को बोन कैंसर का पता तब चला जब वह अपने माता पिता के साथ फिल्म ‘सितम’ की शूटिंग कर रही थीं। अरुणा ने एक बार बताया था कि जब वह बेटी को लेकर यहां वहां भाग रही थीं, तभी उनके पति विकास को उनकी ही एक करीबी दोस्त से प्रेम हो गया। अरुणा इन दोनों को कब का क्षमा कर चुकी हैं और जीवन में करीब करीब कैवल्य को प्राप्त हो चुकी हैं। ‘गहराई’ का जिक्र छेड़ने पर वह ये बताना नहीं भूलतीं कि कैसे फिल्म की बैंगलोर (अब बंगलुरू) के पास शूटिंग के पहले दिन अमरीश पुरी की कड़क आवाज सुनकर डरे आस पास के गांव वाले रात में शूटिंग लोकेशन पर भागे चले आए थे कि देखें तो क्या हो गया।

बाइस्कोप: ‘काका’ के चलते विनोद खन्ना ने नहीं किए डिंपल के साथ इंटीमेट सीन, जैकी की बेस्ट एक्टिंग

4 of 7
गहराई - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
अमरीश पुरी की ऐसे मिली ‘इंडियाना जोन्स’
हॉलीवुड के मशहूर निर्देशक स्टीवन स्पीलबर्ग की एक फिल्म ‘इंडियाना जोन्स एंड द टेंपल ऑफ डूम’ में अमरीश पुरी ने मोला राम नाम के एक तांत्रिक का किरदार किया है। अमरीश पुरी को ये रोल मिलने के पीछे फिल्म ‘गहराई’ का बहुत बड़ा हाथ है। अरुणा बताती हैं, ‘उन दिनों फिल्म ‘गहराई’ की शूटिंग शुरू हो चुकी थी और फिल्म में अमरीश पुरी ने तांत्रिक का ही किरदार निभाया तो जब अमरीश पुरी को ‘इंडियाना जोन्स’ के लिए रेफरेंस फोटोग्राफ्स भेजने को कहा गया तो उन्होंने फिल्म ‘गहराई’ के सेट पर खींचे गए अपने फोटो भेज दिए और उन फोटो के आधार पर ही अमरीश पुरी को स्टीवन स्पीलबर्ग की फिल्म मिली।’ अमरीश पुरी के लिए साल 1980 वाकई उनके करियर का टर्निंग प्वाइंट वाला साल रहा। इस साल लोगों ने उन्हें निर्देशक बापू की फिल्म ‘हम पांच’ में पहचाना। राज खोसला की फिल्म ‘दोस्ताना’ में समझा और ‘गहराई’ में खूब सराहा। ये वही अमरीश पुरी थे जो साल भर पहले फिल्म ‘सावन को आने दो’ में जरीना वहाब के पिता के रोल में दर्शकों पर असर डालने की पूरी कोशिश करते नजर आए थे।

बाइस्कोप: जब ‘रंगबाज’ अनिल कपूर ने बदली शबाना आजमी की पहली धारणा, ‘एक बार कहो’ के पूरे हुए 40 साल
विज्ञापन

5 of 7
गहराई - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
शूटिंग के दौरान के किस्से
फिल्म ‘गहराई’ को अमरीश पुरी की तकदीर बदल देने वाली फिल्म माना जाता है। उनकी जो तस्वीरें हॉलीवुड तक पहुंची उनसे उन्हें स्पीलबर्ग की फिल्म ‘इंडियाना जोन्स’ तो मिली है, रिचर्ड अटनबरो की फिल्म ‘गांधी’ भी मिल गई। अमरीश पुरी की गाड़ी यहां से चल निकली। फिल्म ‘गहराई’ की कहानी एक किशोरी पर किसी आत्मा का साया आने के बाद परेशान माता पिता की कहानी है। परिवार का बड़ा बेटा नंदू इन सब चीजों में यकीन नहीं करता लेकिन उससे भी अपनी बहन की हालत देखी नहीं जाती। कहानी में तमाम मोड़ ऐसे हैं जो दर्शकों को बार बार चौंकाते हैं। और, फिल्म की शूटिंग के समय भी ऐसे तमाम हादसे होते रहे जिनसे अरुणा राजे चौंकाती रहीं। वह बताती हैं, ‘जिस घर में हम शूटिंग कर रहे थे उसमें जब चार पांच दिन का काम बाकी था तो पता नहीं मकान मालिक को क्या सूझा उसने एक दिन हमसे हमारा सारा सामान बाहर निकालने को कह दिया। पता चला कि बाकी बचे दिनों की वह अब दूनी से भी ज्यादा कीमत चाह रहा था। मेरी मां का घर भी वहीं पास में था। हमने फिल्म के बड़े हिस्से की शूटिंग वहीं की है। जंगल जो फिल्म में दिखता है वह मेरी मां के घर के बाहर खड़े पेड़ हैं। अमरूद वाला बगीचा भी मेरी मां के घर के पड़ोस का ही है।’

बाइस्कोप: ऋषि कपूर को इस फिल्म ने 15 साल पहले दिया था बर्थडे गिफ्ट, ‘बॉबी’ की स्टार के साथ बनी जोड़ी
विज्ञापन

6 of 7
फिल्म की शूटिंग के वक्त का दृश्य - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
‘शोले’ की टक्कर का साउंड डिजाइन
अरुणा राजे चूंकि तकनीकी तौर पर प्रशिक्षित वीडियो संपादक रही हैं तो उन्हें बतौर निर्देशक फिल्म के तकनीकी पक्ष की साज संभाल करनी खूब आती है। वह जब फिल्म बनाती हैं तो कैमरे से लेकर साउंड तक में पूरा दखल रखती हैं। जो काम आर डी बर्मन से रमेश सिप्पी ने फिल्म ‘शोले’ में कराया, तकरीबन वैसा ही कुछ काम अरुणा राजे ने फिल्म ‘गहराई’ में लक्ष्मीकांत प्यारेलाल से कराया है। अरुणा राजे का ही तब का प्रताप था कि लक्ष्मी-प्यारे की जोड़ी ने इस फिल्म के लिए तिब्बती साज मंगाने से लेकर अमेरिकी संगीत की जानकारी रखने वालों तक की सेवाएं लीं। कैमरा कई बार खुद अरुणा राजे ही संभाल लेती थीं। स्टैडीकैम जैसा कुछ तब होता नहीं था तो वह कैमरे को हाथों में ही पकड़ कर चल देतीं और विकास पीछे से उनको थामे रहते ताकि कहां रुकना है कहां चलना है, इसका अंदाजा लगता रहे। फिल्म के संगीत में भी अरुणा राजे ने तमाम प्रयोग किए। प्राकृतिक आवाजों में अनपेक्षित आवाजें मिलाकर फिल्म का बैकग्राउंड म्यूजिक तैयार हुआ है। और, बच्ची पर जो आत्मा आती है, उसकी आवाज जलाल आगा ने निकाली है।

बाइस्कोप: कादर के संवादों का कमाल, डिंपल की कलम का धमाल और तीन बत्ती के जग्गू का नाना संग असली बवाल
विज्ञापन
विज्ञापन

7 of 7
पद्मिनी कोल्हापुरे, प्रिंस चार्ल्स - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
चलते चलते
सन 1980 में रिलीज हुई फिल्म ‘गहराई’ को उस वक्त की एक और घटना ने खूब चर्चा दिलाई। लोगों को तब पद्मिनी कोल्हापुरे के बारे में ज्यादा पता नहीं था। लेकिन एक दिन देश दुनिया के अखबारों में उनके नाम का हल्ला हो गया। हुआ यूं कि भारत दौरे पर पहुंचे प्रिंस चार्ल्स जब एक फिल्म की शूटिंग देने बंबई पहुंचे तो वहां मौजूद पद्मिनी कोल्हापुरे ने उन्हें जोश में आकर चूम लिया। प्रोटोकॉल के हिसाब से पद्मिनी को वहां पहुंचे प्रिंस चार्ल्स का माला पहनाकर स्वागत करना था लेकिन माला पहनाने के बाद पद्मिनी ने जब प्रिंस चार्ल्स को किस किया तो वह फोटो पूरी दुनिया में छपा और पद्मिनी का नाम एकाएक सुर्खियों में आ गया। फिल्म ‘गहराई’ को भी इससे खूब चर्चा मिली। आज के बाइस्कोप में इतना ही, कल बात करेंगे एक और ओल्डी गोल्डी की..। सिलसिला जारी है।

(बाइस्कोप अमर उजाला डिजिटल का दैनिक कॉलम है जिसमें हम उस दिन रिलीज हुई किसी पुरानी फिल्म के बारे में चर्चा करते हैं।)

 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें