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Bioscope S2: फिल्म ‘वो 7 दिन’ की मेकिंग की सात दिलचस्प कहानियां, संजीव कुमार वाली तो इमोशनल कर देगी

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वो 7 दिन - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
अभी कुछ हफ्तों पहले जब बोनी कपूर के बेटे अर्जुन कपूर की फिल्म ‘सरदार का ग्रैंडसन’ रिलीज हुई तो अर्जुन ने उन दिनों को याद किया जब पृथ्वीराज कपूर आदि के परिवारों संग उनके दादा सुरिंदर कपूर का परिवार भी पाकिस्तान से भारत आ बसा। सुरिंदर कपूर और पृथ्वीराज कपूर दोनों हिंदी सिनेमा के कपूर खानदान कहलाते हैं लेकिन इस खानदान के बीच हैसियत का अंतर पाटने का काम जिस एक शख्स ने किया, वह हैं अनिल कपूर। अनिल कपूर अपने बड़े भाई बोनी कपूर के साथ मिलकर अपने पिता सुरिंदर कपूर की फिल्म प्रोडक्शन कंपनी में दिन रात खपे रहते। पिता सुरिंदर कपूर की बस एक ही तमन्ना होती उन दिनों कि काश, उनका एक बेटा सुपरस्टार बन जाए। छोटे मोटे रोल करते रहे अनिल कपूर ने ये तमगा पाया आज ही के दिन 1983 में रिलीज हुई फिल्म ‘वो 7 दिन’ से। निर्माता निर्देशक संजय लीला भंसाली लाख लोगों को समझाएं कि उनकी फिल्म ‘हम दिल दे चुके सनम’ एक गुजराती नाटक पर बनी है, लेकिन हिंदी सिनेमा के शौकीन उनकी इस फिल्म को ‘वो 7 दिन’ की रीमेक ही मानते हैं।
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वो 7 दिन - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
भाग्यराज की तमिल फिल्म का रीमेक

फिल्म ‘वो 7 दिन’ के बनने की कहानी पर ही एक फिल्म अलग से बन सकती है। अनिल कपूर किस्मत के धनी इंसान हैं। उनकी बेटियां उनके घर लक्ष्मी बनकर आईं। और उनकी मेहनत ने हमेशा ऋद्धि और सिद्धि का साथ बनाए रखा। आप सोच कर देखिए कि फिल्म के राइट्स खरीदने गए तो पैसे कम पड़ गए। राइट्स मिले तो हीरो बिदक गया। दूसरा हीरो आया तो हीरोइन ने काम करने से मना कर दिया। ये सब सेटिंग हुई तो फाइनेंसर नखरे दिखाने लगे। लेकिन, बोनी कपूर ऐसे ही हिंदी सिनेमा के दिग्गज निर्माता नहीं बने। छोटे भाइयों अनिल कपूर और संजय कपूर का साथ पाकर उन्होंने बड़े बड़े तीर हिंदी सिनेमा में मारे हैं और जो पहला तीर उनका बिल्कुल सही निशाने पर लगा, वह है फिल्म ‘वो 7 दिन’। अनिल कपूर की ये फिल्म भी तमिल के मशहूर लेखक, निर्देशक के भाग्यराज की फिल्म पर बनी है। इस फिल्म का तेलुगू रीमेक बोनी कपूर के पसंदीदा निर्देशक बापू पहले ही बना चुके थे। और, जब इसके हिंदी रीमेक राइट्स बोनी के पास आए तो उनकी पहली पसंद थे बापू जिनके साथ वह ‘हम पांच’ बना चुके थे।
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वो 7 दिन - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
मिथुन चक्रवर्ती के पास नहीं मिली तारीखें

बोनी कपूर यह फिल्म पद्मिनी कोल्हापुरी और मिथुन चक्रवर्ती के साथ बनाना चाहते थे। दोनों इसके पहले एक साथ स्वामी दादा में दिख तो चुके थे लेकिन किसी फिल्म के लीड पेयर में साथ आने का ये उनका पहला मौका होता। लेकिन मिथुन तब तक स्टार हो चुके थे और उनके पास फिल्मों को इतनी लंबी लाइन लगी थी कि वह चाहकर भी बोनी को हां नहीं कह पाए। फिर संजीव कुमार का नाम भी सामने आया लेकिन उन पर सबकी सहमति नहीं बनी और इसके बाद जिस हीरो के नाम पर लंबा विचार चला वो थे रणधीर कपूर जिनकी फिल्म ‘बीवी ओ बीवी’ उन दिनों खूब चर्चा में थी। अनिल कपूर की हालत उन दिनों घर में छोरा गांव में ढिंढोरा वाली थी। वह चाहते थे ये रोल करना लेकिन बोनी से कह नहीं पा रहे थे। फिल्म के डायरेक्टर बापू ने इसके लिए बोनी से बात छेड़ी। रोल अनिल कपूर की उम्र और अनुभव के हिसाब से बड़ा था लेकिन उन्होंने इसे एक चुनौती समझा। खूब तैयारी की, खूब मेहनत की और बन गए प्रेम प्रताप पटियालेवाला। फिल्म में पहले प्रेम को यूपी के किसी शहर का होना था लेकिन अनिल को हरियाणवी बोलना ज्यादा आसान लगा हालांकि नाम के हिसाब से उनकी जुबान पंजाबी होनी चाहिए थी।

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...सबसे बड़ा रुपैया

बोनी कपूर ने फिल्म ‘वो 7 दिन’ में अनिल कपूर को हीरो बनाने की निर्देशक बापू की बात मान तो ली लेकिन अब जो रायता फैला, उसे समेटना अकेले बोनी के बस की बात नहीं थी। दरअसल, उनकी पिछली फिल्म ‘हम पांच’ की कमाई देखकर तमाम फाइनेंसर उनकी इस फिल्म पर निगाहें जमाए बैठे थे। पद्मिनी कोल्हापुरी के बतौर हीरोइन साइन होने की खबरें भी उन तक पहुंच चुकी थी। सबको भरोसा था कि ‘प्रेमरोग’ और ‘विधाता’ जैसी फिल्मों की हीरोइन की फिल्म में पैसा लगाकर उनके वारे न्यारे हो जाएंगे। लेकिन, जैसे ही बोनी ने ये एलान किया कि फिल्म ‘वो 7 दिन’ में पद्मिनी के साथ हीरो उनका छोटा भाई अनिल कपूर होगा तो एक दो बड़े फाइनेंसर्स ने तो बोनी का फोन ही उठाना बंद कर दिया। लेकिन, बोनी ठहरे बोनी। भाई को हीरो बनाने के लिए कह दिया तो बस कह दिया। उन्होंने तमाम जुगाड़ लगाकर फिल्म का फोकस ठीक करने के लिए नसीरूद्दीन शाह से बात की।
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अपनी ही चाल में यूं फंसे नसीर

मिथुन चक्रवर्ती अब तक सुपरस्टार बन चुके थे तो भला नसीरूद्दीन शाह भी कहां ‘हम पांच’ के दिनों वाले नसीर बचे थे। उनको भी मिथुन की तरह पैसे की माया समझ आ चुकी थी। ‘उमराव जान’ और ‘बाजार’ जैसी फिल्में पा चुके नसीर उन दिनों शेखर कपूर की फिल्म ‘मासूम’ की भी शूटिंग शुरू कर चुके थे। बोनी को भगाने के लिए नसीर ने इतनी मोटी फीस मांग ली कि उन्हें लगा कि बोनी के बस की ये बात नहीं है। लेकिन बोनी ठहरे पक्के वाले फिल्म प्रोड्यूसर। उन्हें पता था कि नसीर फिल्म में आए तो बाजी उनके हक में पलट सकती है तो बोनी ने नसीर के अपनी प्राइस बताते ही हां कर दी। अब नसीर मुकर नहीं सकते थे। इसके बाद बोनी ने फिल्म का हुलिया इतना शानदार बना दिया कि फिल्म वितरकों के उनके पास दिन रात फोन आने लगे। एडवांस की पेशकश भी होने लगी। अनिल कपूर, पद्मिनी कोल्हापुरी और नसीरुद्दीन शाह के साथ में निर्देशक बापू, गीतकार आनंद बक्षी, संगीतकार लक्ष्मीकांत प्यारेलाल, सिनेमैटोग्राफी बाबा आजमी और एडीटर एन चंद्रा। फिल्म ‘वो 7 दिन’ का नक्शा बन चुका था, बस इसमें रंग भरे जाने बाकी थे।


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संजीव कुमार की मेहरबानी

फिल्म ‘वो 7 दिन’ के दो-तीन किस्से और भी दिलचस्प हैं। एक किस्सा इनमें से जुड़ा है अपने जमाने के दमदार अभिनेता संजीव कुमार से। संजीव कुमार का नाम इस फिल्म के हीरो के लिए भी सोचा गया था। लेकिन, फिल्म ‘वो 7 दिन’ बनने में अगर किसी एक शख्स का एहसान बोनी आज भी मानते हैं तो वह संजीव कुमार ही हैं भले वह फिल्म के हीरो नहीं थे। हुआ यूं कि के भाग्यराज की फिल्म ‘अंधा 7 नाटकल’ के राइट्स खरीदने बोनी कपूर और अनिल कपूर चेन्नई पहुंच गए। उन्होंने एक मोटा मोटा अंदाजा लगा लिया था कि फिल्म के रीमेक राइट्स कितने में मिल जाएंगे। लेकिन मामला सोच से कहीं बड़ा हो गया। उन दिनों फोन पर पैसे मंगाने की सुविधा होती नहीं थी। और, इस फिल्म के रीमेक राइट्स खरीदने बंबई से एक दो निर्माता और भी चेन्नई पहुंच चुके थे। बोनी को पता चला कि संजीव कुमार चेन्नई में हैं। वह उनके पास मदद मांगने पहुंच गए। संजीव कुमार वहां एक फिल्म की शूटिंग कर रहे थे और उनके प्रोड्यूसर ने उनको उसी दिन भुगतान भी किया था। ये रकम बोनी कपूर के काम आई फिल्म ‘वो 7 दिन’ की मूल तमिल फिल्म के रीमेक राइट्स खरीदने में।
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और, फिर बिदक गईं पद्मिनी

अगला किस्सा हुआ पद्मिनी कोल्हापुरी के साथ। पद्मिनी कोल्हापुरी को बोनी ने मिथुन की हीरोइन बनाने के नाम पर साइन किया था। तो उनको जैसे ही पता चला कि उन्हें मिथुन की बजाय एक नए लड़के के साथ हीरोइन बनाया जा रहा है तो वह पिनक गईं। बोनी को ये खबर मिली तो उन्होंने सिर पकड़ लिया। वह अनिल से बोले, मैंने जो कुछ करना था कर दिया अब इसे तुम ही संभालो। अनिल की ये बतौर लीड पहली फिल्म थी और पद्मिनी कोल्हापुरी थी उन दिनों की सुपरस्टार। एक तरफ वह दिलीप कुमार और राज बब्बर की फिल्म ‘मजदूर’, राजेश खन्ना की फिल्म ‘सौतन’ कर रही थीं और दूसरी तरफ उन्हें कहा जा रहा था नए नवेले अनिल कपूर की हीरोइन बनने को। अनिल कपूर के साथ काम करने को दूसरी कोई हीरोइन मिल जाती तो अनिल कपूर को कभी पद्मिनी कोल्हापुरी की इतनी खुशामद नहीं करनी पड़ती। अनिल खुशामद करने वाले इंसान नहीं हैं लेकिन इस फिल्म में अनिल ने पद्मिनी को मनाने के लिए क्या क्या पापड़ नहीं बेले..!
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...चलते चलते

फिल्म ‘वो 7 दिन’ हिट हुई तो बोनी कपूर ने एक जबरदस्त पार्टी देकर इसकी कामयाबी का जश्न मनाया। अनिल कपूर ने भी अपने पिता सुरिंदर कपूर का घर में एक सुपरस्टार होने का ख्वाब पूरा किया। और, पिता ने भी उसी दिन उस दौर की सुपरस्टार श्रीदेवी को लेकर अनिल कपूर के साथ एक फिल्म बनाने का एलान कर दिया। इस फिल्म का नाम था ‘गोविंदा’। फिल्म ‘गोविंदा’ तो नहीं बनी लेकिन बाद में बोनी कपूर ने श्रीदेवी की इन्हीं तारीखों का इस्तेमाल किया अनिल कपूर के साथ एक और फिल्म बनाने में जिसका नाम है, ‘मिस्टर इंडिया’। ‘मिस्टर इंडिया’ की मेकिंग की कहानी आप बाइस्कोप में पढ़ ही चुके हैं।


(‘बाइस्कोप’ कॉलम में प्रकाशित यह आलेख बौद्धिक संपदा अधिकारों के तहत संरक्षित हैं।)
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