टीवी की मशहूर अभिनेत्री हिना खान ब्रेस्ट कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रही हैं। वह इस बीमारी का डटकर सामना कर रही हैं। अभिनेत्री के इस मुश्किल समय में उनके शुभचिंतक और प्रशंसक उनका लगातार हौसला बढ़ा रहे हैं। हिना इन दिनों कीमोथेरेपी से गुजर रही हैं। अभिनेत्री को जब से इस बीमारी का पता चला है वह एक इंसान की शुरू से आभारी रही हैं। वह इंसान कोई और नहीं बल्कि दिग्गज अभिनेत्री महिमा चौधरी हैं, जो खुद कैंसर से जंग जीत चुकी हैं। अपने एक इंस्टाग्राम पोस्ट में हिना ने साझा किया था कि महिमा ही वह पहली इंसान थीं, जिन्होंने ब्रेस्ट कैंसर का पता चलने पर उनका समर्थन किया था और कीमोथेरेपी के दौरान उनसे अचानक मुलाकात भी की थी।
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हिना खान
- फोटो : इंस्टाग्राम@realhinakhan
हाल ही में अभिनेत्री महिमा चौधरी ने एक बातचीत में हिना खान के साथ अपनी बॉन्डिंग के बारे में खुलकर बात की और बताया कि कैसे उन्होंने उन्हें भारत में अपना इलाज करवाने की सलाह दी थी। इंडिया टुडे के साथ एक साक्षात्कार में महिमा ने हिना के साथ अपनी मुलाकात को याद करते हुए कहा, ‘मैं हिना से एक पार्टी में बहुत ही अनौपचारिक रूप से मिली थी और हम एक-दूसरे के संपर्क में थे।’ अभिनेत्री ने आगे कहा, ‘लेकिन, बीमारी का पता चलने के बाद उन्होंने सबसे पहले मुझे ही फोन किया। उन्होंने कहा, 'मैंने खुद को बुक कर लिया है और मैं अमेरिका जा रही हूं और मैं यह-वह करूंगी।' मैंने कहा, 'मुझे भी ऐसा ही लगा। लेकिन, तुम अमेरिका में अपने दम पर रहोगी। और यह बहुत ही कठिन उपचार है।’ Guneet Monga: ऑस्कर में भेजी जाने वाली फिल्मों पर बोलीं गुनीत मोंगा, कहा- ऐसी फिल्म भेजी जानी चाहिए, जिसका..
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हिना खान
- फोटो : इंस्टाग्राम@realhinakhan
कैंसर से जंग को जीत चुकी अभिनेत्री महिमा ने बातचीत के दौरान बताया, ‘जब आप उपचार से गुजर रहे होते हैं, तो यह भयानक होता है। मैंने कहा, 'इसे बॉम्बे में करो'। एक ही डॉक्टर का इस्तेमाल करो, क्योंकि दवा एक ही है, चाहे आप इसे यहां निगलें या अमेरिका में। वहां का डॉक्टर भी भारतीय होगा। वास्तव में, अगर आप किसी अमेरिकी डॉक्टर को अपना इलाज करते हुए देखेंगे, तो आपको लगेगा, 'क्या मैं अपना इलाज भारतीय डॉक्टर से नहीं करवा सकता?' आपको भरोसा नहीं होगा। लेकिन, यहां आपको भरोसा होगा।’
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हिना खान
- फोटो : इंस्टाग्राम-@realhinakhan
अभिनेत्री महिमा चौधरी ने कहा, ‘कोविड के दौरान, जब लोग वहां यानी अमेरिका में पैरासिटामोल ले रहे थे, तो हम भी यहां ले रहे थे। जब दुनिया भर में इलाज एक जैसा है, तो अपने देश में क्यों नहीं?’ उन्होंने कहा, ‘जब आप अपना दुख साझा करते हैं, तो बंधन अलग होता है। जैसे हम जश्न मनाने के लिए इकट्ठा होते हैं, वैसे ही हमें तब भी इकट्ठा होना चाहिए जब कोई किसी बीमारी से जूझ रहा हो। इससे उन्हें प्रेरणा मिलती है।’