फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Inside Story: अल्लू अरविंद और मधु मंटेना ने पांच साल पहले शुरू की फिल्म, ‘रामायण’ ने कराई दोस्तों में महाभारत

विज्ञापन
1 of 8
रणबीर कपूर - फोटो : अमर उजाला
‘लुटेरा’, ‘हंसी तो फंसी’, ‘उड़ता पंजाब’ और ‘एनएच 10’ जैसी फिल्मों के शुरू होने से पहले इसमे ब्लैकबोर्ड पर चॉक से बनता अक्षर ‘फ’ और जोर से आती आवाज, ‘फ से फैंटम’ याद है न आपको? ये लोगो था मधु मंटेना, विक्रमादित्य मोटवानी, विकास बहल और अनुराग कश्यप की साझेदारी में बनी फिल्म कंपनी ‘फैंटम फिल्म्स’ का। साल 2010-11 में बनी इस कंपनी के आधे शेयर बाद में रिलायंस एंटरटेनमेंट ने खरीदे। फिर ‘मीटू’ का हल्ला हुआ कंपनी के सारे पार्टनर बिखर गए। और, मधु मंटेना ने इसके बाद बनाई नई कंपनी अल्लू मंटेना मीडिया वेंचर्स एलएलपी। इसी कंपनी ने फिल्म ‘रामायण’ की शुरुआत की। स्पेशल इफेक्ट्स के लिए प्राइम फोकस को साथ लिया और उनकी फीस के बराबर उनकी हिस्सेदारी रखी, लेकिन अब इस फिल्म का निर्माण खटाई में पड़ता दिख रहा है।
विज्ञापन

2 of 8
लाइगर फैन इवेंट - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
हिंदी सिनेमा का अधिकतर कारोबार ‘फोकसबाजी’ पर ही ज्यादा फोकस रहता है। जितना बड़ा जिसका फोकस, उतनी ही शातिर उसकी पीआर एजेंसियां, वैसे ही उनके इशारे पर ‘प्लांटेड’ खबरें करने वाले इंफ्लुएंर्स जैसे पत्रकार और वैसा ही फिल्म का भविष्य। कोरोना संक्रमण काल से हिंदी सिनेमा में शुरू हुआ भाड़े के फैंस और पैसे लेकर ट्वीट व सोशल मीडिया शेयर करने वाले इंफ्लुएंसर्स का बुलबुला किसी भी दिन बस फूटने ही वाला है। ताजा मामला इस पूरे मायाजाल का फिल्म ‘रामायण’ का है। इसे समझने के लिए फिल्म कारोबार की थोड़ी बेसिक समझ भी जरूरी है। चलिए आपको समझाने की कोशिश करते हैं...
विज्ञापन

3 of 8
मधु मंटेना, नितेश, अल्लू अरविंद और अन्य - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
किसी बड़ी फिल्म का बनना हिंदी सिनेमा में सिर्फ इस बात पर निर्भर करता है कि निर्देशक के पास एक कहानी ऐसी होनी चाहिए, जिस पर काम करने के लिए कोई बड़ा सितारा हामी भर दे। इसके बाद निर्देशक इस सितारे के नाम पर निर्माता तलाश करता है। निर्माता इस निर्देशक और सितारे को साइन करने के लिए कुछ रकम खर्च करता है, फिल्म कारोबार की भाषा में इसे ‘सीड मनी’ कहते हैं। मधु मंटेना ने नितेश तिवारी के साथ मिलकर यही काम साल 2019 में किया। नितेश तिवारी ने रणबीर कपूर को रामायण का ‘विचार’ सुनाया। रणबीर ने सैद्धांतिक रूप से रजामंदी दे दी और बाकी काम नितेश तिवारी की टोली ने करना शुरू कर दिया। नितेश तिवारी की पिछली फिल्म ‘बवाल’ दर्शकों को कतई पसंद नहीं आई और दूसरी कोई फिल्म फिलहाल उनके पास नहीं है।

4 of 8
सलमान खान और करण जौहर - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
कोई भी निर्माता इन दिनों तब तक बड़े बजट की फिल्म बनाना नहीं शुरू कर रहा है जब तक कि उसके टीवी, ओटीटी और दूसरे अधिकारों की बिक्री को लेकर वह आश्वस्त न हो जाए। सलमान खान की फिल्मों ‘द बुल’ और ‘टाइगर वर्सेज पठान’ के बारे में आप पढ़ ही चुके हैं। टाइगर श्रॉफ की फिल्म ‘स्क्रू ढीला’ पर भी इसी वजह से ताला लगा। फिल्म बनाने का पूरा खर्चा निर्माता टीवी, ओटीटी और दूसरे अधिकारों की बिक्री से निकाल लेता है। सिनेमाघरों से होने वाली कमाई उसके लिए बोनस है। इसीलिए, तमाम निर्माताओं को इन दिनों पड़ी भी नहीं है कि उनकी फिल्म सिनेमाघरों में चलेगी या कि नहीं। लेकिन, ‘रामायण’ का मामला थोड़ा अलग है।
विज्ञापन

5 of 8
रणबीर कपूर की एआई फोटो - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
फिल्म ‘रामायण’ का जितना बजट बताया जा रहा है, उतनी रकम फिल्म की रिलीज से पहले निर्माता को मिल ही जाएगी, शुरू में फिल्म में पैसा (सीड मनी) लगाने को तैयार बैठे मधु मंटेना को ये गणित ठीक नहीं लगा। और, उन्होंने इस फिल्म से अपना पल्ला झाड़ लिया। प्राइम फोकस को वह अपने साथ इस शर्त पर लेकर आए थे कि वे उनका दिया काम (असाइनमेंट) पूरा करेंगे और अपना हिस्सा फिल्म में लेंगे। लेकिन, मधु मंटेना अलग हुए और प्राइम फोकस ने फिल्म को लेकर बाजार में काम शुरू कर दिया।
विज्ञापन

6 of 8
नमित मल्होत्रा और यश - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
साउथ सिनेमा के अभिनेता यश को साथ लाकर प्राइम फोकस ने इसे अंतर्राष्ट्रीय बाजार में बेचने की तैयारी की है। इसीलिए, कथित रूप से फिल्म का बजट भी बढ़ा चढ़ाकर बताया जा रहा है। ये गणित भी हिंदी फिल्म निर्माताओं ने सब्सिडी के चक्कर में सीखा है। तमाम दूसरे देश फिल्मों की शूटिंग पर सब्सिडी देते हैं। निर्माता फिल्म उतने में ही बनाते हैं जितनी सब्सिडी वहां से मिलनी होती है लेकिन फिल्म का बजट ऐसा बनाते हैं कि वह सब्सिडी की धनराशि से कम से कम तीन गुना हो। हाल ही में रिलीज हुए एक मेगा बजट फिल्म के निर्माता इसी चक्कर में विदेश में जांच के दायरे में आ चुके हैं और उनकी पिछली फिल्मों की सब्सिडी पर भी इसी को लेकर संकट आ चुका है। कुछ कुछ ऐसा ही मामला फिल्म ‘रामायण’ का भी है।
विज्ञापन

7 of 8
आदिपुरुष और कल्कि 2898 एडी - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
फिल्म ‘आदिपुरुष’ 500 करोड़ रुपये में बनी, ‘कल्कि 2898 एडी’ 600 करोड़ रुपये में बन रही है, लेकिन किसी निर्माता ने अपनी फिल्म की लागत अमेरिकी डॉलर में ‘लीक’ कराने की कोशिश नहीं की। फिल्म ‘रामायण’ की लागत सीधे सीधे 100 मिलियन डॉलर यानी 10 करोड़ डॉलर बताई गई। ये इसलिए कि इसके हिस्सेदार ढूंढने के लिए विदेश में ज्यादा गणित किसी को न लगानी पड़े। हाल ही में रिलीज हुई हॉलीवुड फिल्म ‘किंगडम ऑफ द प्लैनेट ऑफ द एप्स’ का बजट करीब 160 मिलियन डॉलर बताया जाता है। और, फिल्म ने ये रकम रिलीज के पहले हफ्ते में ही टिकट खिड़की पर पीट ली है। लेकिन, फिल्म ‘रामायण’ ऐसा कर पाएगी इसमें संदेह है। इसके अलावा फिल्म के कानूनी विवाद में पड़ने से इसमें विदेशी निवेशकों का दिलचस्पी लेना संदेह के घेरे में आ चुका है। ऐसे ही एक मामले के चलते रिलायंस एंटरटेनमेंट में पैसा लगाने को तैयार बैठे तमाम विदेशी निवेशक अपना हाथ पीछे खींच चुके हैं।
विज्ञापन

8 of 8
अल्लू अरविंद और अल्लू अर्जुन - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
अब आपका बताते हैं कि कथित रूप से रणबीर कपूर और साई पल्लवी के साथ बन रही फिल्म ‘रामायण’ से अल्लू अर्जुन परिवार का क्या रिश्ता है? जिस अल्लू मंटेना मीडिया वेंचर्स एलएलपी की तरफ से इस फिल्म को अपना बता रहे निर्माताओं को नोटिस जारी किया गया है, उसमें मंटेना नाम तो मधु मंटेना का ही है, लेकिन रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज में दर्ज रिकॉर्ड के मुताबिक  कंपनी के दूसरे पार्टनर हैं, अरविंद बाबू अल्लू। अरविंद बाबू अल्लू को साउथ सिनेमा में अल्लू अरविंद के नाम से जाना जाता है और वह दिग्गज सुपरस्टार अल्लू अर्जुन के पिता हैं। 28 जून 2021 को अस्तित्व में आई अल्लू मंटेना मीडिया वेंचर्स एलएलपी के संपर्क सूत्र के रूप में गीता आर्ट्स के प्रभाकर का ईमेल आईडी दिया गया है। गीता आर्ट्स अल्लू अरविंद की ही फिल्म निर्माण कंपनी है। इस पूरे मामले को लेकर निर्माता मधु मंटेना से भी बात करने की कोशिश की गई, लेकिन उनको भेजे गए संदेश का अभी तक जवाब नहीं आया है। गीता आर्ट्स की प्रतिक्रिया भी इस मामले में प्रतीक्षित है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें