ओह हो, ये तो बहुत मायूसी वाली बात हो गई, फिर...?
घर पर कोई फोन नहीं। मोबाइल का तो जमाना ही नहीं था। मैं बहुत मायूस हो गया। रुआसा हो गया था। चौथे दिन एक बार और बैठकर मैं खिड़की से हटने ही वाला था तो एक हॉर्न की आवाज आई। एक एंबेसडर आकर रुकी। उसमें से कल्लू मियां उतरे और उन्होंने कहा कि सॉरी थोड़ा शूटिंग का शेड्यूल आगे पीछे हो गया था तो मैं नहीं आ पाया। बोले, कि आप तैयार हैं? मेरे मुंह से तो यही निकला कि हम तो चार दिन से तैयार हैं। मुझसे ज्यादा कौन तैयार होगा, इस दुनिया में। दौड़ा मैं सूट लेकर और पहुंचा वहां तो पहली बार मैंने शशि कपूर को देखा। मुझे लगा कि वाकई सितारे ऐसे ही होते हैं, खूबसूरत, गोरे, एकदम लाल..इतने हसीन थे शशि जी, उनसे निगाहें नहीं हटीं। और, राखी जी को भी देखा, उनके ही साथ सीन था।