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Manisha Koirala Interview: रज्जो शुरू से बागी थी, मल्लिका जान की बगावत अलग है, संजय का विकास दुनिया ने देखा है

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मनीषा कोइराला - फोटो : अमर उजाला
नेपाल को तीन प्रधानमंत्री देने वाले कोइराला परिवार की लाडली मनीषा का बचपन काशी में और कैशोर्य दिल्ली में पढ़ाई करते बीता। महज 21 साल की उम्र में वह शोमैन सुभाष घई की फिल्म ‘सौदागर’ की हीरोइन बनीं। लेकिन, मनीषा की किस्मत बदली फिल्म ‘1942 ए लव स्टोरी’ में अंग्रेजों के खिलाफ बगावत करने वाली युवती रज्जो के किरदार से। उन दिनों संजय लीला भंसाली निर्देशक विधु विनोद चोपड़ा के सहायक हुआ करते थे। बताते हैं कि फिल्म के सारे गीत संजय के निर्देशन में ही तैयार हुए थे। मनीषा एक बार फिर अंग्रेजों से मोर्चा ले रही हैं, उसी कालखंड की एक और कहानी ‘हीरामंडी’ में और एक बार फिर काम कर रही हैं अपने सबसे पसंदीदा निर्देशक संजय लीला भंसाली के साथ। मनीषा कोइराला से ‘अमर उजाला’ के सलाहकार संपादक पंकज शुक्ल ने ये खास बातचीत की।
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संजय लीला भंसाली, मनीषा कोइराला - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मु्ंबई
वेब सीरीज ‘हीरामंडी’ का कालखंड वही है जो आपने कोई तीन दशक पहले फिल्म ‘1942 ए लव स्टोरी’ में जीया था। तब संजय लीला भंसाली निर्देशक विधु विनोद चोपड़ा के सहायक हुआ करते थे और एक बार फिर आप भंसाली के साथ वैसा ही कुछ बागी किरदार करने जा रही हैं?
उन दिनों की यादें अब भी ताजा हैं और जितना अच्छा वह दौर था, वैसा ही हसीन ये दौर भी है। फिल्म ‘1942 ए लव स्टोरी’ में मेरा किरदार रज्जो शुरू से ही अंग्रेजों के खिलाफ बगावत में शामिल रहता है, यहां हम ‘हीरामंडी’ की दुनिया में भीगे हुए थे। ये सही है कि इसमें भी अंग्रेजों के खिलाफ बगावत की बात है लेकिन वह कहानी के उपसंहार के करीब ज्यादा उभरकर सामने आती है। और, इस दौरान संजय का जो विकास बतौर निर्देशक हुआ है, वह तो पूरी दुनिया ने देखा ही है।
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मनीषा कोइराला - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मु्ंबई
लेकिन, रज्जो को देखकर दर्शकों को उससे प्यार हो गया था, यहां मल्लिका जान के किरदार से तो डर लग रहा है..
जी, मुझे भी डर लग रहा था। मैंने ऐसा किरदार पहले कभी नहीं किया है। और, मुझे मालूम नहीं था कि मैं कैसे करूंगी, लेकिन इतना मालूम था कि मैं जान दे दूंगी, जान लगा दूंगी और जो भी संजय हमसे करवाना चाहते थे, वह एकदम पूरे समर्पण के साथ करूंगी। ये बहुत, बहुत, बहुत ही नया किरदार है मेरे लिए।

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हीरामंडी के सेट पर संजय लीला भंसाली और मनीषा कोइराला - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मु्ंबई
‘हीरामंडी’ को अगर अगर संजय लीला भंसाली ने सिर्फ दो ढाई घंटे की फिल्म के रूप में बनाया होता तो बेहतर होता या कि सीरीज ही इस कहानी के लिए बेहतर है?
मुझे लगता है कि हर विषय को विस्तार देकर वेब सीरीज के रूप में बनाया जा सकता है। लेकिन, उस विषय में उतनी क्षमता भी होनी चाहिए। ‘हीरामंडी’ में बहुत सारी कहानियां हैं। एक तो इसका जो मुख्य विषय है, वह है ही, और भी बहुत सारी क्षेपक कथाएं हैं। और, ये सब बहुत ही नाटकीय, बहुत रोचक और बहुत जिंदादिल कहानियां हैं। मुझे लगता है कि ‘हीरामंडी’ सिर्फ एक सीजन ही नहीं, इसमें कई सीजन तक आगे जाने की सामग्री है।
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मनीषा कोइराला - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मु्ंबई
हिंदी सिनेमा में मुस्लिम सामाजिक फिल्मों का लंबा दौर रहा है। ऐसे विषयों पर बनी तमाम फिल्में मसलन ‘मुगले ए आजम’, ‘चौदहवीं का चांद’, ‘मेरे हुजूर’ सुपरहिट रही हैं। आपको कौन कौन सी ऐसी फिल्में याद आईं ये सीरीज करते समय?
मैंने बहुत सारी पिक्चरें इस तरह की देखी हैं लेकिन खास इस सीरीज के लिए मैंने कोई फिल्म नहीं देखी। हालांकि, संजय का मेरे लिए निर्देश था कि मैं फिल्म ‘नूरजहां’ का थोड़ा सा हिस्सा यूट्यूब पर देख लूं। संजय की ये बात कहीं मेरे दिमाग में, मेरे जहन में बनी रही। बस, मैंने उतना ही संदर्भ पुरानी फिल्मों का अपने किरदार मल्लिका जान में रहने दिया। बाकी उस दौर की फिल्में हैं, वे मैंने अपने इस किरदार को निभाने के लिए विशेष रूप से नहीं देखीं।
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संजय लीला भंसाली, मनीषा कोइराला - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मु्ंबई
संजय के बारे में ये तो एक बात बहुत मशहूर है कि वह अपनी हीरोइनों को अभिनेत्री नूतन की फिल्में ‘सीमा’, ‘सुजाता’ और ‘बंदिनी’ देखने को कहते रहे हैं, संजय के साथ अपनी पहली फिल्म ‘खामोशी’ करते समय आपके साथ भी ऐसा कोई संयोग बना क्या?

ये बात तो सही है कि संजय लीला भंसाली ने हिंदी सिनेमा की तकरीबन सारी कालजयी फिल्में देखी हुई हैं। अपनी फिल्म या सीरीज के किरदार के साथ जो भी कुछ मिलता जुलता उनको समझ आता है, उसे देखने के लिए वह जरूर कहते हैं। जैसे, ‘हीरामंडी’ के लिए ऋचा चड्ढा को उन्होंने ‘पाकीजा’ और मीना कुमारी की दूसरी फिल्में देखने को कहा। वह ऋचा के इस किरदार में वैसा ही भाव लाना चाहते थे। ये तो तय है कि अपनी फिल्म की अभिनेत्रियों की अदाकारी के लिए जरूरी हुआ तो संजय हमेशा पुरानी फिल्मों का संदर्भ बताएंगे।
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मनीषा कोइराला - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मु्ंबई
और, शायद इसीलिए भंसाली की फिल्मों के महिला किरदार इतने प्रभावशाली होते हैं।
हम सब अभिनेत्रियों की तमन्ना रहती है कि हम सब किसी तरह संजय लीला भंसाली की हीरोइन बन सकें। इतनी खूबसूरती से दिखाते हैं वह औरतों को कि कोई और दूसरा नहीं दिखा सकता। हां, यशराज (चोपड़ा) जी दिखाते थे, अपनी फिल्मों के रूमानी दौर में। और, मेरे जीवन का ये दुखद पहलू रहा कि मौका मिलने के बाद भी अपनी निजी आशंकाओं के चलते मैं उनके साथ फिल्म नहीं कर पाई।
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हीरामंडी की अभिनेत्रियां - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मु्ंबई
‘हीरामंडी’ की शूटिंग पर आप सबसे वरिष्ठ अभिनेत्री रहीं, बाकी अभिनेत्रियों जो इस सीरीज में आपके साथ काम कर रही हैं, मसलन सोनाक्षी सिन्हा, अदिति राव हैदरी, संजीदा शेख, शर्मिन सेगल और ऋचा चड्ढा, इनके साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा?
ये सब अदाकारी का नया खून हैं। इनके भीतर मैंने अपनी अदाकारी को लेकर अनोखा समर्पण देखा है। ये सब बहुत ही अनुशासित, मेहनती और अपने कर्म के प्रति समर्पित अभिनेत्रियां हैं। सबका अपने किरदारों को लेकर बहुत ही सटीक ख्याल रहता था और उनके विचारों को जानकर मुझे अपना किरदार करने में बहुत सहूलियत मिली। ये सब ऊर्जावान कलाकार हैं और इनके आसपास रहने से मुझे अपने काम को लेकर बहुत प्रेरणा मिली।
 
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