वैभव राज गुप्ता
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
और, वही हुआ। बेनीगंज से सीतापुर तक का बहुत कुछ इस किरदार में आपने अपने निजी अनुभव से डाला है। कोई खास रिश्तेदार भी है जो अन्नू मिश्रा जैसा ही हो?
जब मैंने ‘गुल्लक’ का फर्स्ट सीजन किया था तो काफी कुछ पीछे जाना पड़ा था मुझे। अपने गांव, अपने लोगों के पास, जो छोटे छोटे संदर्भ एक कस्बाई जीवन शैली के उसमें डाले गए वे सारे मेरे जीवन में असल रूप में हो चुके हैं। अब भी मैं जब सीतापुर जाता हूं तो उनको बताता हूं कि मैंने आपका नाम, आपकी शैली, आपकी अदा यहां इस्तेमाल की है। मैंने ऐसे तो बहुत सारे अन्नू देखे हैं जीवन में लेकिन मेरे मामा का लड़का सोनू गुप्ता, वह इस किरदार के सबसे करीब है। उसकी शख्सीयत से मैंने बहुत कुछ चुराया है अन्नू मिश्रा को करने के लिए।