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रणधीर, ऋषि और राजीव कपूर के मामा थे राजेंद्र और प्रेमनाथ, दोनों के पिता के बीच भी था गहरा रिश्ता

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कपूर परिवार - फोटो : Social media

हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के सूत्रधार माने जाने वाले कपूर परिवार के बारे में तो आप सभी ने काफी कुछ सुना और पढ़ा है। पृथ्वीराज कपूर से लेकर रणबीर कपूर तक ये खानदान बॉलीवुड में अपना दबदबा बनाए हुए है और समयचक्र के साथ ही अपना सिक्का चलाता रहा है। लेकिन इन सबके बीच शायद कम ही लोग जानते होंगे कि 60 के दशक में अपने हास्य अभिनय का लोहा मनवाने वाले दिग्गज हास्य अभिनेता राजेंद्र नाथ और उनके बड़े भाई व पर्दे पर मुख्य विलेन प्रेम नाथ से कपूर खानदान का बेहद गहरा रिश्ता है। जबकि कपूर फैमिली के मुकाबले ये दोनों इंडस्ट्री में काफी बाद में आए थे और बैकग्राउंड भी फिल्मी नहीं बल्कि ब्यूरोक्रेसी में था।

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पृथ्वी राज कपूर, राज कपूर, कृष्णा कपूर - फोटो : Social media
दरअसल, प्रेम नाथ और राजेंद्र नाथ की बहन कृष्णा मल्होत्रा पृथ्वी राज कपूर की बहू और राजकपूर की पत्नी थीं। वही कृष्णा मल्होत्रा जिन्हें बाद में कृष्णा कपूर के नाम से जाना जाने लगा। ऐसे में प्रेम और राजेंद्र नाथ रणधीर, ऋषि और राजीव कपूर के सगे मामा लगे। इस रिश्ते की कहानी ऐसी थी कि राज कपूर और कृष्णा मल्होत्रा की शादी सरकारी बंगले में हुई थी। तब वह महज 16 साल की थीं और राज कपूर उनसे छह साल बड़े थे। कृष्णा के पिता का नाम करतार नाथ मल्होत्रा था जो मध्य प्रदेश के रीवा में आईजी यानी की पुलिस महानिरीक्षक थे।
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कपूर ब्रदर्स - फोटो : Social media
पेशावर (पाकिस्तान) के रहने वाले पृथ्वी राज कपूर को 1930 के दौरान फिल्मों के कारण कई शहरों में जाना पड़ता था। जब वह अपनी नाटक कंपनी ‘पृथ्वी थिएटर' को कई शहरों में लेकर जाने लगे तो मध्य प्रदेश के छोटे-से शहर रीवा में पहुंचे। यहां उनके साथ दोनों बेटे राज और शम्मी कपूर भी हो लिए। यहीं से दोनों परिवार की किस्मत आपस में जा मिली।

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कपूर परिवार - फोटो : Social media
उस दौरान करतार नाथ मल्होत्रा रीवा के आईजी थे, तो उनके सरकारी बंगले पर कपूर परिवार की बेहतरीन खातिरदारी हुई। जानकार कहते हैं कि करतार रिश्ते में पृथ्वीराज कपूर के ममेरे भाई लगते थे। धीरे-धीरे दोनों परिवार में घनिष्ठता बढ़ती गई। इसी के साथ कपूर परिवार ने मुंबई में अपना ठिकाना जमा लिया था। इसी के बाद जब मायानगरी में कपूर खानदान फिल्मों का निर्माण करने लगा तो करतार सिंह के बेटे नरेंद्र नाथ और प्रेम नाथ भी अपनी किस्मत आजमाने मुंबई चले गए।
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कपूर भाइयों के साथ राजेंद्र नाथ - फोटो : Social media
बाद में प्रेम नाथ ने छोटे भाई राजेंद्र नाथ को भी मुंबई बुला लिया था। इसके बाद राज कपूर और शम्मी कपूर का मल्होत्रा परिवार के घर रीवा आना-जाना लगा रहता था। कुछ समय बीतने के बाद पृथ्वी राज के बेटे राज कपूर का रिश्ता आईजी साहब की बेटी करतार मल्होत्रा के साथ तय हो गया। उस समय आईजी साहब की शान-ओ-शौकत और रुतबे का अंदाज अलग ही हुआ करता था। 12 मई 1946 को कपूर खानदान धूमधाम से रीवा में बारात लेकर गया। बारातियों को रॉयल मेंशन में ठहराया गया था। सबकी मौजूदगी में दोनों की शादी हो गई।
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राज कपूर, कृष्णा कपूर - फोटो : Social media
राज और कृष्णा की मुलाकात के पीछे भी एक दिलचस्प किस्सा है। पृथ्वी राज कपूर फिल्मी बैकग्राउंड की बहू नहीं लाना चाहते थे, क्योंकि वह नहीं चाहते थे कि उनका बेटा फिल्मी और निजी जिंदगी को एक साथ मिला दे। इसलिए वे पारंपरिक लड़की की तलाश में थे। फिर उन्होंने अपने ममेरे भाई के बेटे प्रेम नाथ के साथ राज कपूर को रीवा घूमने भेज दिया था। इसके बाद उनकी कहानी बिल्कुल फिल्मी स्टाइल में आगे बढ़ी। वे जब घर के अंदर घुसे तो संगीत की मीठी आवाज सुनाई दे रही थी। बस वे उसके पीछे-पीछे चल पड़े। खिड़की के अंदर देखा तो बस राज कपूर की आंखें वहीं ठिठक गईं।
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पति व बेटों संग कृष्णा कपूर - फोटो : Social media
उन्होंने देखा कि अंदर एक लड़की सफेद साड़ी में लिपटी बालों में मोगरे के फूल लगाए सितार बजा रही थी। वो कोई और नहीं बल्कि कृष्णा मल्होत्रा ही थीं। उस समय वह संगीत सीखा करती थीं। बस राज कपूर के मन में उनकी तस्वीर छप गई। शादी के बाद भी कृष्णा अधिकतर खासकर सफेद साड़ियां पहनती थीं और बालों में मोगरा लगाती थीं, क्योंकि राज कपूर इसे पसंद करते थे।

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राजेंद्र नाथ - फोटो : Social media
राजकपूर से शादी के बाद कृष्णा कपूर हो चुकीं कृष्णा मल्होत्रा के कुल 13 भाई-बहन थे। बताया जाता है कि उनके पिता ने तीन शादियां की थीं। प्रेम नाथ, राजेंद्र नाथ और कृष्णा दूसरी पत्नी के बच्चे थे। पिता के रिटायर होने के बाद उनका परिवार जबलपुर आ गया था। कृष्णा के पति फिल्मों में थे और अच्छी पकड़ बना रहे थे। फिर कृष्णा के भाई राजेंद्र नाथ और अन्य भाइयों ने फिल्मों में भविष्य तलाशना शुरू किया। सबसे पहले राजेंद्र नाथ के बड़े भाई प्रेम नाथ मुंबई पहुंचे थे। उन्हें पृथ्वी राज कपूर के थियेटर में काम मिल गया था। जब उन्हें सफलता मिलने लगी तो छोटे भाई राजेंद्र नाथ को भी अपने पास बुला लिया था। राजेंद्र नाथ छोटे होने के कारण मस्तमौला थे और करियर को लेकर गंभीर नहीं थे। जब प्रेम नाथ ने उन्हें समझाया कि अपना खर्चा खुद उठाएं और कामयाब बनें तो उन्होंने असल में मेहनत शुरू की।

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प्रेम नाथ राजेंद्र नाथ - फोटो : Social media
राजेंद्र नाथ को अशोक कुमार अभिनीत 'वचन’ फिल्म में पहली बार काम करने का मौका मिला था। इसमें उनकी छोटी भूमिका थी। इसके बाद 'बेगम और बादशाह', 'गुलाम' सहित कुछ फिल्मों में उन्हें छोटी-छोटी भूमिकाएं मिलीं तो उनका हैसला बढ़ने लगा। लेकिन उन्हें लीड रोल नहीं मिल रहा था। इसे देख बड़े भाई प्रेम नाथ ने खुद राजेंद्र नाथ को अपनी फिल्म 'गोलकुंडा का कैदी' फिल्म में साइड हीरो का रोल दे दिया था। लेकिन 1954 में रिलीज हुई यह फिल्म फ्लॉप हो गयी। साथ ही राजेंद्र नाथ का हीरो बनने का जोश ठंडा पड़ गया।

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राजेंद्र नाथ - फोटो : Social media

इसके पांच साल के बाद राजेंद्र नाथ ने 1959 में 'हम सब चोर हैं' में हास्य भूमिका निभाई। उनके रोल के लिए भरपूर तारीफ हुई। इसके बाद ‘मिस इंडिया’, शरारत, और 'जब प्यार किसी से होता है' जैसी फिल्मों में काम कर कॉमेडियन की छवि स्थापित कर ली थी। उनके पोपट लाल के किरदार ने उन्हें कॉमेडी की दुनिया में अमर बना दिया। उनके शो ने यूरोप और अमेरिका तक में नाम कमाया।

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भाई राजेंद्र नाथ को केक खिलातीं कृष्णा कपूर - फोटो : Social media
प्रेम नाथ और राजेंद्र नाथ के इंडस्ट्री में रहते ही बहनोई राज कपूर के बच्चे बड़े हो गए थे। राजीव, ऋषि और रणधीर फिल्मों में अपनी जगह बनाने लगे थे। रणधीर कपूर और नीतू सिंह को लेकर उन्होंने फिल्म 'ग्रेट क्रैशर' शुरू की थी, लेकिन जल्द ही राजेंद्र नाथ भारी कर्जे में डूब गए। फिर भाई नरेंद्र नाथ की मौत के बाद उनका फिल्मी दुनिया से मन उठ गया। अभिनय की अंतिम पारी उन्होंने 'हम पांच' धारावाहिक में पूरी की। शम्मी से उनकी दोस्ती पृथ्वी थियेटर में काम करने के दौर में हुई और आखिर तक कायम रही। इसके अलावा दरबारा स्कूल रीवा के अपने सहपाठी कांग्रेस नेता अर्जुन सिंह से भी उनके रिश्ते बने रहे। 13 फरवरी 2008 को उन्होंने मुंबई में अंतिम सांस ली। इससे पहले प्रेम नाथ 3 नवंबर 1992 में ही दुनिया को अलविदा कह गए थे।
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कपूर परिवार - फोटो : Social media
प्रेम नाथ के बेटे प्रेम किशन और मॉन्टी नाथ दोनों ने ही अभिनय की दुनिया में हाथ आजमाया। प्रेम किशन निर्देशन की लाइन में कामयाबी की तलाश करते रहे। मॉन्टी ने ‘हम हैं लाजवाब (1982)’, ‘तेरी कसम (1982), ‘प्रेम रोग (1982)’, ‘आवाज (1984)’, ‘राहू केतू (1978)’, ‘जीते हैं शान से (1987)’ और ‘हीर रांझा (1992)’ में की। उन्हें भी लीड रोल में शायद ही कभी देखा गया हो। वहीं, प्रेम किशन के बड़े बेटे, मॉन्टी के भतीजे और प्रेम नाथ के पोते सिद्धार्थ पी मल्होत्रा भी अभिनय की दुनिया में नजर आए। उन्होंने फिल्मों के अलावा टीवी शोज भी किए। अभिनेता प्रेम किशन की बेटी और सिद्धार्थ पी मल्होत्रा की बहन आकांक्षा मल्होत्रा भी फिल्मों में एक्टिव रहीं और उन्होंने ‘ये मोहब्बत है’, ‘ऐसा क्यों होता है’ और ‘वीरे दी वेडिंग’ में अभिनय करने का मौका मिला। जबकि मॉन्टी के बच्चे अधिराज मल्होत्रा और अर्जुन मल्होत्रा इस चकाचौंध भरी दुनिया से दूर हैं। तो इस तरह फिल्म इंडस्ट्री में प्रेम नाथ की पीढ़िया धीरे-धीरे भुला दी गईं।
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