नागेश कुकूनूर की फिल्म इकबाल से हिंदी सिनेमा में शोहरत कमाने वाली श्वेता प्रसाद ने अपनी पहली ही फिल्म मकड़ी में बेस्ट चाइल्ड आर्टिस्ट का नेशनल अवार्ड जीता। हाल ही में उन्हें फिल्म मर्द को दर्द नहीं होता में भी एक खास रोल में देखा गया। तमिल और तेलुगू सिनेमा ने उन्हें खासी इज्जत दी। अब उनकी नई फिल्म ताशकंद फाइल्स रिलीज हो रही है। अमर उजाला संवाददाता अक्षित त्यागी से श्वेता की एक खास मुलाकात।
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SHWETA BASU
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आपने हिंदी सिनेमा के दिग्गज निर्देशकों की फिल्मों में काम करने से मना किया और अदाकारी से लंबा ब्रेक लिया, इसकी वजह?
इकबाल के बाद मेरे पास राजकुमार संतोषी की हल्ला बोल और मधुर भंडारकर की ट्रैफिक सिगनल के प्रस्ताव आए थे। लेकिन, मैं पहले पढ़ाई पूरी करना चाहती थी। मैंने जर्नलिज्म से ग्रैजुएशन किया और 2012 से लेकर 2016 तक शास्त्रीय संगीत पर शोध के बाद एक डॉक्यूमेंट्री भी बनाई। इसके बाद मैं अनुराग कश्यप के साथ फैंटम फिल्म्स में काम करने लगी। मैं अभिनय छोड़ चुकी थी लेकिन अभिनय ने मुझे नहीं छोड़ा। एक शॉर्ट फिल्म के दौरान मुझे लगा कि मुझे एक्टिंग ही करनी चाहिए। तो मैंने चंद्रनंदिनी साइन किया। वह खत्म हुआ, उसके एक हफ्ते के अंदर ही मुझे ताशकंद फाइल्स के लिए कॉल आ गया।
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shweta prasad basu
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क्या किरदार निभा रहीं हैं आप ताशकंद फाइल्स में?
मेरे किरदार का नाम है रागिनी फुले, जिसने अभी बस अपने करियर की शुरूआत ही की है। वह बहुती ही महत्त्वाकांक्षी पत्रकार है। बड़ी बड़ी हेडलाइन्स या किसी भी तरह के कांड का पर्दाफाश करने की फिराक में रहती है। एक दिन उसे ताशकंद फाइल्स मिलती हैं और उसकी ज़िंदगी एक बड़ा मोड़ लेती है।
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shweta basu
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आपने 10 साल की उम्र में ही नेशनल अवॉर्ड पा लिया, अब आप फिर से खुद को जमाने के जतन कर रही हैं?
संघर्ष कभी नहीं रुकता, जिंगदगी का दूसरा नाम ही संघर्ष है और वही सीख भी देता है। मैं ना तो किसी एक्टिंग स्कूल गई हूं न ही कोई खास कोर्स किया है। जो भी सीखा है वह यहीं आकर या काम करते करते सीखा है। मैने 10 साल की उम्र में अवार्ड जीता लेकिन उस बात को 18 साल बीत गए। अब अलग अलग चुनौतियों हैं।
आगे की योजनाएं क्या हैं, क्या वापस निर्देशन में जाने का इरादा है?
नहीं बिलकुल नहीं, अब कुछ डायरेक्ट नहीं करना। मुझे लिप्स्टिक लगाकर आराम से कैमरे के सामने अपनी लाइन्स बोलना ज्यादा पसंद है, एक्टिंग ही करूंगी। मेरी आने वाली फिल्म का नाम है जामुन है जो मैने रघुबीर यादव के साथ की है। उसमें मैं एक दिव्यांग का किरदार कर रहीं हूं। यह फिल्म सुंदरता के नए मायने बताती है।