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सत्येन कप्पूः वो कलाकार जिसने भगवान से कहा मुझे अभिनेता बना देना लेकिन हीरो मत बनाना

Fri, 02 Apr 2021 06:09 PM IST
विजयाश्री गौर एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
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सत्येन कप्पू - फोटो : सोशल मीडिया
हिंदी सिनेमा में बहुत से ऐसे कलाकार मौजूद हैं जो कभी हीरो बनने का सपना लेकर इंडस्ट्री में आए थे, जिनमें किसी का सपना पूरा हुआ तो कोई साइड हीरो या निर्देशक-खलनायक बन गया। हालांकि क्या आप मान सकते हैं कि इसी फिल्म जगत में कभी एक ऐसा कलाकार भी था, जो अभिनेता बनना चाहता था। लेकिन उसने भगवान से मांगा कि उसे हीरो नहीं बनाना, बल्कि कैरेक्टर आर्टिस्ट बनाना? इसकी वजह ये थी कि हीरो के हिस्से में सिर्फ रोमांस आता है और कलाकार के हिस्से में अभिनय। ऐसे विचारों वाले हिंदी सिनेमा के दमदार अभिनेता थे सत्येन कप्पू। जिन्होंने फिल्मों में अपने हुनर का जौहर दिखाया था। आज आपको बताते हैं उनके बारे में कुछ दिलचस्प बातें।
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सत्येन कप्पू - फोटो : You Tube
6 फरवरी 1931 को मुंबई में एक ब्राह्मण परिवार में सत्येन कप्पू का जन्म हुआ था। उनके पिता का नाम था बुद्ध सिंह शर्मा और माता का नाम था गंगा देवी। उनके एक बड़े भाई का नाम राधे श्याम शर्मा था। वहीं सत्येन कप्पू का असली नाम था सत्येंद्र शर्मा, लेकिन बचपन में सब उन्हें प्यार से कप्पू-कप्पू बुलाते थे, इसलिए उन्होंने अपना नाम सत्येन कप्पू कर लिया था।
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सत्येन कप्पू - फोटो : You Tube
सत्येन कप्पू में बेहद छुटपन में ही गंभीरता आ गई थी। इसकी वजह ये थी कि जब वे छोटे थे, तभी उनके माता-पिता का निधन हो गया था। बचपन में ही माता-पिता के गुजर जाने से उनके ऊपर खुद की परवरिश की जिम्मेदारी आ गई थी। उनके कुछ रिश्तेदारों ने सत्येन कप्पू  को गुरुकुल में छोड़ दिया था, वहीं उनकी पढ़ाई-लिखाई हुई। हालांकि वो बचपन से ही फिल्मों में काम करने का शौक रखते थे। जब वो 16-17 साल के हुए तो उनके बड़े भाई उन्हें मुंबई ले आए। यहां वे थिएटर में काम करने लगे।

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Ashok Kumar, - फोटो : Social Media
सत्येन कप्पू हिंदी सिनेमा के बेहतरीन अभिनेता अशोक कुमार के जबरदस्त फैन थे और उनकी ही तरह एक वर्सटाइल अभिनेता बनना चाहते थे। सत्येन कप्पू को फिल्म में उनका पहला ब्रेक 1961 में निर्माता-निर्देशक-लेखक बिमल रॉय ने दिया था और फिल्म का नाम था 'काबुलीवाला'। इसके बाद उन्होंने कई फिल्मों में अलग-अलग तरह के रोल किए। उन्हें सबसे ज्यादा खुशी इस बात की थी कि वह फिल्मों में अलग-अलग किरदार निभा रहे थे।
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सत्येन कप्पू - फोटो : You Tube
उन्होंने अपने करियर में करीब 400 फिल्मों में काम किया था, जिसमें 'डॉन', 'कटी पतंग', 'दीवार', 'खोटे सिक्के' और 'शोले' जैसी सुपरहिट फिल्में शामिल हैं। सिर्फ बॉलीवुड में ही नहीं बल्कि उन्होंने कई क्षेत्रीय फिल्मों में भी अपने हुनर का परचम लहराया। सत्येन कप्पू बेहद संजीदा और जमीन से जुड़े व्यक्ति थे। वह अक्सर कहा करते थे कि मैं ज्यादा पढ़ा-लिखा तो नहीं हूं, लेकिन जिंदगी ने मुझे जो अनुभव दिया, उसने मुझे लायक बना दिया।
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सत्येन कप्पू - फोटो : You tube
1951 में सत्येन कप्पू ने 8 दिसंबर को कैलाशवती से अरेंज मैरिज कर ली। उनकी चार बेटियां हुईं। उमा, विनिता, दृप्ति और तृप्ति। तृप्ति बहुत अच्छी लेखिका हैं और वो कई सीरियल के लिए कहानी लिखती हैं। अपने जीवन के आखिरी पलों में भी सत्येन कप्पू सक्रिय रहे और फिल्मों में काम करते रहे। सन 2006 में रिलीज हुई फिल्म 'सरहद पार' उनकी आखिरी फिल्म थी। 27 अक्तूबर 2007 में सत्येन कप्पू ये दुनिया छोड़कर चले गए, लेकिन अपने पीछे एक मीठी याद और गहरी सीख छोड़ गए, जो आने वाली पीढ़ी के लिए हमेशा काम आएंगी।
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